अब पकिस्तान बोलेगा मैडरिन ,करेगा चीनी संग नौकरी

अखिलेश अखिल

भाषा और भूगोल का अपना मिजाज है। कभी भूगोल बदलते ही भाषा बदल जाती है तो कभी भाषा के नाम पर भूगोल बन बिगड़ जाता है। दुनिया भर में इस तरह के खेल होते रहते हैं। इधर पाकिस्तान से एक बड़ी खबर आ रही है कि अब वह चीनी भषा मैडरिन बोलेगा, पढ़ेगा और मैडरिन के अनुसार अपने जीवन को सवारेगा। इसके भला किसे आपत्ति! अधिक से अधिक भाषा का ज्ञान इंसान को दुनिया समझने के काबिल बनाता है। लेकिन आश्चर्य इस बात को लेकर है कि जिस पाकिस्तान में सबसे ज्यादा पंजाबी और पश्तो बोलने वालों की आबादी सबसे ज्यादा है उसे वहाँ आजतक आधिकारिक भाषा के रूप में मान्यता नहीं मिली है। खैर यह सब पाकिस्तान की अपनी मर्जी है।

कहा जा रहा है कि समय के साथ रिश्ते भी बदल जाते हैं। दुनिया में चल रही भू -राजनीति और बनते बिगड़ते रिश्तो पर नजर डालें तो साफ़ हो जाता है कि पाकिस्तान अपने रिश्तों को बहुत ही जल्दी बदलने वाले देशों में भी शुमार होता दिख रहा है। कल तक पाकिस्तान अमेरिका का पिछलगू बना घूम रहा था ,आज चीन उसका सबसे बड़ा हमसफ़र बनता दिख रहा है। जाहिर है चीन की भी अभी पाकिस्तान की जरूरत है और जिस तरह से चीनी माल बनकर तैयार रखे हुए हैं ,उसे एक बड़े बाजार की जरूरत भी है। चीनी सरकार पर वहाँ के व्यापारियों का इसके लिए दबाब भी है।

यही वजह है कि पाकिस्तान ने अपने ‘पक्के दोस्त’ चीन से रिश्ते मजबूत करने की दिशा में एक अहम कदम उठाया है। उसने मैंडरिन या मंदारिन को पाकिस्तान की आधिकारिक भाषा घोषित किया है। ख़बरों के मुताबिक पाकिस्तानी सीनेट ने इस बाबत दिए गए प्रस्ताव को स्वीकृति भी दे दी है। बताया जा रहा है कि इस फैसले से पाकिस्तान और चीन के रिश्ते और मजबूत होंगे, साथ ही चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारा (सीपीईसी) परियोजना से जुड़े लोगों को मदद मिलेगी।

गौरतलब है कि संयुक्त राष्ट्र में पाकिस्तान के राजदूत हुसैन हक्कानी ने एक ट्टीट में कहा, ‘70 सालों की छोटी सी अवधि में पाकिस्तान ने ऐसी चार भाषाओं को बढ़ावा दिया है जो उसकी आबादी में कइयों की मातृभाषा नहीं रही हैं।’ हुसैन हक्कानी ने जिन चार भाषाओं का जिक्र किया वे हैं अंग्रेजी, उर्दू, अरबी और मैंडरिन जिसे आम तौर पर चाइनीज कहा जाता है। पाकिस्तान में पंजाबी का बोलबाला है। इसके अलावा वहां के लोग पश्तो और दूसरी भाषाएं भी बोलते हैं। लेकिन इनमें से किसी को भी वहां की आधिकारिक भाषा घोषित नहीं किया गया है।

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