इन आदतों के कारण साथ छोड़ देती हैं लक्ष्मी, होता है कष्ट

नई दिल्ली: चाणक्य ने लक्ष्मी और धन-दौलत को लेकर नीति ग्रंथ के तीसरे अध्याय के 21वें श्लोक में कई बातें कही हैं. वो कहते हैं कि मुर्खों का सम्मान करने वाले लोगों को पास लक्ष्मी का वास नहीं होता. इसलिए हमें मुर्खों से दूर रहना चाहिए. वो कहते हैं कि धन की देवी लक्ष्मी का स्वभाव चंचल है. ऐसे में व्यक्ति के एक गलत आचरण मात्र से लक्ष्मी उसका साथ छोड़ देती हैं. इसलिए जो व्यक्ति लक्ष्मी को अपने आस-पास देखना चाहते हैं उन्हें अपनी कुछ आदतों को छोड़ देना चाहिए.

> धन के बिना जीवन की कल्पना वर्तमान में समय में कठिन ही नहीं बल्कि नामुमकिन है. ऐसे में हमें गलत आचरण से बचना चाहिए चाणक्य कहते हैं कि व्यक्ति को सौम्य स्वभाव का होना चाहिए. क्रोधी व्यक्ति के पास लक्ष्मी कभी नहीं ठहरतीं. क्रोधी व्यक्ति का खुद पर नियंत्रण नहीं होता, ऐसे में वो गलत फैसले लेता है और खुद को बर्बाद कर देता है.
> अपने सामने वाले व्यक्ति को इज्जत देने वाले लोगों से लक्ष्मी खुश रहती हैं. दूसरों का सम्मान कर आप भी लक्ष्मी को खुश कर सकते हैं. हमेशा लोगों को अपमानित करने वाले व्यक्ति दुखी रहते हैं. क्योंकि लक्ष्मी उनसे नाराज हो जाती हैं. वैसे भी अपमान करने से दुश्मनी शुरू होती है और व्यक्ति को अपयश मिलता है. यही कारण है कि चाणक्य इस आदत से दूर रहने की सलाह देते हैं.

> लालची व्यक्ति कभी सफल नहीं हो पाता. इस आदत को चाणक्य भी सबसे बुरी आदतों में से एक मानते हैं. वो कहते हैं कि लालची मनुष्य कभी दूसरों का भला नहीं चाह सकते और ऐसे लोगों से लक्ष्मी दूर ही रहती हैं.

> धन के आने पर व्यक्ति को घमंड नहीं करना चाहिए. पैसे पर घमंड करने वाले व्यक्ति से लक्ष्मी माता दूर हो जाती हैं. चाणक्य के मुताबिक धन के प्राप्त होने पर ज्यादा उत्साहित होने के बजाए उसे सही जगह इस्तेमाल करने के बारे में सोचना चाहिए.

नोट: अगर आपको यह खबर पसंद आई तो इसे शेयर करना न भूलें, देश-विदेश से जुड़ी ताजा अपडेट पाने के लिए कृपया The Lucknow Tribune के  Facebook  पेज को Like व Twitter पर Follow करना न भूलें...
Loading...
-------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------- --------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------- --------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------- --------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------- ---------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------
E-Paper