इलाहाबाद होगा प्रयाग राज और लखनऊ बनेगा लक्ष्मण नगर!

दिल्ली ब्यूरो: एक तरफ देश में विराजमान तमाम तरह की समस्यायों को लेकर हर रोज सुप्रीम कोर्ट सरकारों को कठघरे में खड़ा कर रही है और दूसरी तरफ देश की सरकार भावनात्मक मुद्दे उठाकर अपना राजनीतिक दाव खेलती रहती है। देश के लोगों को भी इसमें खूब मजा आता है। बीजेपी जैसी पार्टी धर्म और संस्कृति के नाम इस तरह की राजनीति कुछ ज्यादा ही करती है। इधर चुनावी मौसम में शहरों के नाम बदलने की राजनीति फिर से शुरू हो गयी है।

गुजरात में नाम बदलने की राजनीति लोगों को खूब आकर्षित कर रही है। अहमदाबाद का नाम बदलकर कर्णावती रखने की कोशिश की जा रही है। लखनऊ का नाम बदलकर लक्ष्मण नगर रखने के लिए तैयारी चल रही है जबकि इलाहाबाद का नाम प्रयागराज रखने को लेकर कई स्तर पर मंत्रणा की जा रही है। माना जा रहा है कि अर्धकुम्भ मेले में इलाहाबाद का नाम बदलने को लेकर गहन बैठक होगी और शायद तब इसका नाम बदल भी जाय।

बता दें कि पार्टियां और सरकारें लोगों को उनके प्राचीन सांस्कृतिक व धार्मिक गौरव की याद दिलाने के नाम पर शहरों के नाम बदलने का दांव चलते हैं। इसी दांव में बांबे का नाम मुंबई, कलकत्ता का कोलकाता, मद्रास का चेन्नई, बंगलोर का बेंगलुरू हो गया। अब फिर आधा दर्जन शहरों का नाम बदलने का प्रयास हो रहा है। जिन शहरों में यह प्रयास हो रहा है वे सारे राजनीतिक रूप से बेहद संवेदनशील हैं।

पिछले दिनों भाजपा के सांसद सुब्रह्मण्यम स्वामी ने अहमदाबाद का नाम बदल कर कर्णावती रखने की मांग की। उन्होंने उन्होंने इसके लिए लोगों को सड़कों पर उतरने और आंदोलन करने के लिए कहा। सांप्रदायिक रूप से बेहद संवेदनशील गुजरात के लिए यह बड़ा चुनावी मुद्दा हो सकता है। इसी तरह इलाहाबाद का नाम बदल कर प्रयाग राज करने का प्रस्ताव लाया जाने वाला है। इसके अलावा भोपाल, पटना और नई दिल्ली का नाम बदलने का प्रस्ताव भी है पर ये अभी ठंडे बस्ते में हैं, सही समय पर उनको निकाल कर जनता के सामने पेश किया जाएगा।

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