उप्र में कोविड-19 के 5130 नये मामले, मृतकों की संख्या 2176 हुयी

लखनऊ: उत्तर प्रदेश में बीते 24 घंटों के दौरान कोविड—19 के 5130 नये मामले सामने आये जबकि 56 और मरीजों की मौत के साथ मंगलवार को मृतकों का आंकडा बढकर 2176 हो गया । अपर मुख्य सचिव (चिकित्सा एवं स्वास्थ्य) अमित मोहन प्रसाद ने बताया कि पिछले 24 घंटों में संक्रमण के 5130 नये प्रकरण सामने आये । उन्होंने कहा कि उपचाराधीन लोगों की संख्या 48, 998 है।

प्रसाद ने बताया कि कुल 80,589 लोग पूर्णतया स्वस्थ होकर अस्पतालों से छुटटी पा चुके हैं जबकि कोरोना वायरस संक्रमण से हुई मौतों का आंकडा 2176 है । प्रदेश में कोरोना संक्रमण के कुल मामले 1,31,763 हैं । उन्होंने बताया कि सोमवार को 1,01,039 नमूनों की जांचे की गयी जिनमें से 60,542 नमूने एंटीजन टेस्ट से जांचे गये । अब तक 33, 14, 435 टेस्ट किये जा चुके हैं ।

प्रसाद ने बताया कि जांच का डब्ल्यूएचओ का मानक प्रति दस लाख जनसंख्या पर 140 जांच प्रतिदिन का है । उसके हिसाब से उत्तर प्रदेश में प्रतिदिन लगभग 32 हजार टेस्ट किये जाने चाहिए । हम उस मानक से तीन गुने से ज्यादा टेस्ट रोज कर रहे हैं । देश में प्रतिदिन सबसे अधिक टेस्ट करने वाला प्रदेश उत्तर प्रदेश है । उन्होंने बताया कि इस समय 20, 818 लोग घरों में एकांतवास में हैं और घरों में रहकर स्वास्थ्यलाभ कर रहे हैं । निजी अस्पतालों में 1533 लोग भर्ती हैं जहां उपचार के लिए भुगतान करना होता है । सेमी पेड सुविधाओं यानी होटलों या एल—1 प्लस सुविधा में इस समय 197 लोग हैं ।

अपर मुख्य सचिव ने बताया कि सोमवार को पूल टेस्टिंग के माध्यम से पांच पांच नमूनों के 3248 पूल लगाये गये, जिनमें से 667 में संक्रमण की पुष्टि हुयी पाजिटिव मिले। इसके अलावा दस दस नमूनों के 241 पूल लगाये गये, जिनमें से 26 में संक्रमण की पुष्टि हुयी । उन्होंने बताया कि निगरानी कार्य निरंतर जारी है और 52, 473 इलाकों में निगरानी के जरिए 1,67,07,379 घरों में 8,41,00,169 लोगों का सर्वेक्षण किया गया । प्रदेश में अब तक 61,794 कोविड हेल्पडेस्क स्थापित की जा चुकी हैं । इनमें छह लाख 36 हजार से ज्यादा लक्षण युक्त लोगों की पहचान की गयी ।

कोविड हेल्प डेस्क सभी महत्वपूर्ण कार्यालयों और प्रतिष्ठानों में बनाये जाते हैं । हर कोविड हेल्पडेस्क पर इन्फ्रारेड थर्मामीटर और पल्स ऑक्सीमीटर अनिवार्य रूप से होता है । प्रसाद ने बताया कि जिन लोगों को घरों में पृथकवास में रखा जाता है, जोनल सेंटर से एक टीम उनके घर पर जाती है और परीक्षण करती है । यह टीम आवश्यक दवाएं निशुल्क देती है तथा घर वालों को संक्रमण से बचने के लिए भी दवाइयां देती है।

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