कागजों में चल रही नमामि गंगे योजना, गंगा मैली की मैली ही रही!

कानपुर। नमामि गंगे परियोजना को लेकर इससे जुड़े अधिकारियों की लापरवाही व उसकी पोल खुलती जा रही है। गंगा मैली की मैली ही रही। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पांच राज्यों में चल रही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की महत्वाकांक्षी नमामि गंगे परियोजना के कामों की समीक्षा कानपुर में 14 दिसंबर को करेंगे। पतित पावनी गंगा अधूरी कार्ययोजना का शिकार हो गईं। योजना में छह नाले टैप किए गए फिर भी गंगा की गोद में जहर जा रहा है। कागजों में बंद टेनरियां भी लाखों लीटर दूषित पानी उगल रही हैं। इधर कानपुर के लोगों और संतों की मानें तो यहां गंगा में आचमन प्रधानमंत्री के लिए किसी चुनौती से कम न होगा क्योंकि गंगा मैया में इतना मैल भर चुका है कि गंगाजल आचमन के लायक भी नहीं रहा है।

सूत्रों के मुताबिक़,शनिवार को सीएम योगी आदित्य्नाथ ने स्टीमर पर बैठकर अटल घाट से लेकर सीसामऊ नाले तक गंगा का निरीक्षण कर उसकी हकीकत जानी। लेकिन निरीक्षण के बाद जब वो वापस लौटे तो उनकी चुप्पी बहुत कुछ कह गई। समझने वाले समझ भी गये। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 14 दिसंबर को कानपुर आएंगे तो कार्यशाला के अलावा उनके ज्यादातर कार्यक्रम गंगा तट पर ही होंगे। यही नहीं वह अपनी समीक्षा बैठक भी गंगा की गोद में यानी बड़े स्टीमर (क्रूज) में कर सकते हैं,साथ ही भोजन भी गंगा की लहरों के बीच (क्रूज) में ही होने की संभावना है।

मुख्यमंत्री ने इस तरह की तैयारी करने के लिए अधिकारियों को निर्देशित किया। बैठक में उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मां गंगा के लिए यहां आ रहे हैं। इसलिए ज्यादातर कार्यक्रम गंगा तट पर कराए जाएं। गंदगी पर सख्त रुख भी अपनाया और अधिकारियों से कहा,पार्क,गली, सडक,बाजारों व चौराहों पर गंदगी का एक तिनका भी नहीं दिखना चाहिए। गंगा स्वछ व निर्मल रहे। प्लास्टिक पर पूरी तरह से प्रतिबन्ध लगे। नमामि गंगे के क्षेत्रीय संयोजक शिव बोधन मिश्रा ने रविवार को बताया कि, घाटों पर सफाई करने वाली एजेंसी द्वारा बरती जा रही लापरवाही की शिकायत उन्होंने प्रमुख सचिव नगर विकास से की है।

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