‘नैविगेटर ऑफ रिस्पांसिबल लेंडिंग-इंडिया’ का विमोचन

लखनऊ: फाइनेंसियल प्लानिंग स्टैंडर्ड बोर्ड इंडिया (एफपीएसबी) और भारतीय प्रबंधन संस्थान (आईआईएम) लखनऊ के तत्वाधान में आयोजित सेमीनार में जिम्मेदारी भरी उधारी व्यवस्था के संबंध में भारतीय उपभोक्ता ऋण क्षेत्र की स्थिति पर अपनी तरह की पहली ‘रिपोर्ट नैविगेटर ऑफ रिस्पांसिबल लेडिंग इंडिया’ का विमोचन किया गया।

इस अनुसंधान रिपोर्ट पर प्रतिक्रिया देते हुए एफपीएसबी के वाइस चेयरमैन एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी रंजीत मुधोलकर ने कहा, “उधारी देने और लेने के संदर्भ में दोनों पक्षों की पारस्परिक जिम्मेदारी होती है कि वे अपने अपने दायित्वों का निर्वहन करें जिससे कि सभी के लिए निर्बाध अनुभव का उद्देश्य सुनिश्चित हो सके। इस अध्ययन का उद्देश्य जिम्मेदार और स्वस्थ संबंध की एक रूपरेखा स्थापित करना है जिसके परिणाम स्वरूप परस्पर सुरक्षित एवं सुखद अनुभव मिल सके।

इस अनुसंधान के मुख्य निष्कर्षों के बारे में भारतीय प्रबंधन संस्थान, लखनऊ के मार्केटिंग मैनेजमेंट के एसोसिएट प्रोफेसर और इस अध्ययन की अगुवाई करने वाले प्रोफेसर देवाशीष दास गुप्ता (पीएचडी ने कहा, “भारत में उपभोक्ता ऋण उद्योग एक उल्लेखनीय गति से बढ़ रहा है जहां बैंक और एनबीएफसी उपभोक्ताओं को मिनटों में एक मोबाइल फोन से लेकर एक कार तक कुछ भी खरीदने के लिए आसान वित्त विकल्पों की पेशकश कर रही हैं। जहां यह एक प्रगतिशील और बढ़ती अर्थव्यवस्था का संकेत है। इस अध्ययन में उपभोक्ता के व्यापक हित और सकारात्मक उधारी व्यवस्था को परखा गया है। इस अध्ययन का लक्ष्य है कि इस क्षेत्र में संभावना तलाशना, मूल्यांकन करना और शिक्षित करना।

जानिए अनुसंधानकर्ताओं के बारे में

डॉ. रंजीत एस मुधोलकर
वाइस चेयरमैन एंड सीईओ
फाइनेंसियल प्लानिंग स्टैंडड्र्स बोड्र्स इंडिया

डॉ. रंजीत एस मुधोलकर फाइनेंसियल प्लानिंग स्टैंडड्र्स बोड्र्स इंडिया (एफबीएसबी इंडिया) के वाइस चेयरमैन और सीईओ हैं। उन्होंने पिछले 15 वर्षों के दौरान 2002 में की गई स्थापना से लेकर अब तक एफपीएसबी में परिवर्तन का नेतृत्व किया है। इस दरम्यान उन्होंने 2009 में एफपीएसबी से सम्बद्ध एशिया फैसिफिक फोरम को बतौर चेयरमैन अपनी सेवाएं दीं। वह एफपीएसबी लिमिटेड, यूएस, बोड्र्स ऑफ डायरेक्टर्स 2013-16 के लिए ग्लोबल बोर्ड मेम्बर्स को चयनित करने के लिए बनी नामिनेटिंग कमेटी के सदस्य भी रहे हैं।

डॉ. मुधोलकर ने बोड्र्स के दायित्वों का सफलतापूर्वक निर्वहन तो किया ही, सभी साझेदारों को एक कर संगठन के ग्रोथ को भी सुनिश्चित किया। वह संगठन के प्रवक्ता तो हैं ही, फाइनेंसियल प्लानिंग जर्नल के सम्पादक भी हैं। यह मंथली जर्नल है। भारत में फाइनेंसियल प्लानिंग कम्युनिटी में यह लीडिंग जर्नल है।

इससे पहले डॉ. रंजीत सेम्बिोओसिस इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट स्टडीज (एसआईएमएस) के डायरेक्टर रह चुके हैं। एसआईएमएस देश में बिजनेस मैनेजमेंट स्कूल में अग्रणी संस्थान है। 1997-2001 के बीच इस संस्थान ने चमकदार प्रगति प्रस्तुत की थी। डॉ. रंजीत को उनकी खूबियों के चलते ही टाइम्स ऑफ इंडिया ने उन्हें मिस्टर टर्नअराउंड, बिजनेस स्टैंडर्ड ने स्मार्ट पीपल और बिजनेस इंडिया ने फ्रंट रनर कह कर सम्बोधित किया था। उनका नाम वल्ड्र्स हू इज हू-मारकिस के 19वें संस्करण में प्रकाशित हो चुका है। यह उपलब्धि तभी हासिल होती है जब कोई सबसे कम उम्र में दुनिया के किसी भी बिजनेस स्कूल का डायरेक्टर बनता है। फाइनेंसियल प्लानिंग पर विशेषज्ञ के तौर पर वह कई मर्तबा टीवी शो में भागीदारी कर चुके हैं। इसके अलावा वह विभिन्न संगठनों में वरिष्ठ अधिकारियों को लेक्चर देते हैं।

देवाशीष दास गुप्ता
प्रो.आईआईएम लखनऊ

प्रोफेसर देवाशीष दास गुप्ता को विपणन (मार्केटिंग) और खुदरा (रिटेल) क्षेत्र में 20 साल का औद्योगिक और शैक्षिक अनुभव है। वह शॉपिंग व्यवहार (शॉपिंग बिहैवियर), विपणन प्रथाओं में नवाचार (इनोवेशन इन मार्केटिंग प्रैक्टिसेस), ग्राहक मूल्य प्रस्ताव (कस्टमर वैल्यू प्रोपोजिशन), गंतव्य ब्रांडिंग (डेस्टिनेशन ब्रांडिंग) और खाद्य खुदरा बिक्री (फूड रिटेलिंग) के क्षेत्र में कार्यरत हैं।

प्रो. दास गुप्ता के रिसर्च पेपर्स इंटरनेशनल जर्नल्स में प्रकाशित हो चुके हैं। वह इंटरनेशनल जर्नल ऑफ टूरिज्म (एलसेवियर), एशियन केस रिसर्च जर्नल और विकल्प (आईआई), मैनेजमेंट रिव्यू (आईआईएमबी), इम्पैक्ट (आईआईएम आई) और मेटामोरफोसिस (आईआईएमएल) के साथ बतौर समीक्षक जुड़े रहे हैं। गंतव्य विपणन (डेस्टिनेशन मार्केटिंग) पर केन्द्रित उनकी पुस्तक टूरिज्म मार्केटिंग को पियर्सन एजुकेशन ने प्रकाशित किया है।

प्रो. दास गुप्ता ग्लोबल फर्म्स और भारत सरकार पर बात करते हैं। बीएनपी पारीबस, एल एंड टी, बायेर, एसबीआई, एलआईसी, बीपीसीएल, गुजरात अम्बुजा सीमेंट पफिजेर, सीबीएसई, सिफी, जीएनएफसी, इंडो-गल्फ फर्टिलाइजर्स, जुआड़ी एग्रो, चम्बल फटिलाइजर्स और कोरोमंडल फर्टिलाइजर्स उनके कंसल्टिंग क्लाएंट्स हैं। वह विदेशी एक्जीक्यूटिव्ज के लिए इंटरनेशनल ट्रेनिंग प्रोग्राम कंडक्ट कर चुके हैं। कुछ साल पहले वह विदेशी एक्जीक्यूटिव्ज के लिए ट्रेनिंग प्रोग्राम आयोजित करने मस्कट (ओमान) गये थे। वह भारत सरकार को एजुकेशन पॉलिसी (शिक्षा नीति) पर सलाह दे चुके हैं। मौजूदा समय में वह उत्तर प्रदेश सरकार को मार्केटिंग स्ट्रेटजी में सुधार सम्बंधी मशविरा देने के साथ ही बहुत पुरानी राज्य स्वामित्व वाली खुदरा श्रृंखला की ब्रांड छवि को सुधारने में अपना सुझाव दे रहे हैं।

नोट: अगर आपको यह खबर पसंद आई तो इसे शेयर करना न भूलें, देश-विदेश से जुड़ी ताजा अपडेट पाने के लिए कृपया The Lucknow Tribune के  Facebook  पेज को Like व Twitter पर Follow करना न भूलें...
Loading...
-------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------- --------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------- --------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------- --------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------- ---------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------
E-Paper