बिहार में जल प्रलय: 20 और पंचायतों में घुसा पानी, अब तक 16 जिलों की 75 लाख आबादी बाढ़ से प्रभावित

पटना: बाढ़ ने राज्य के 20 और पंचायतों को प्रभावित कर दिया है। इस तरह अब 16 जिलों के 126 प्रखंडों की 1260 पंचायतों की 75 लाख आबादी बाढ़ से प्रभावित हो चुकी है। आपदा प्रबंधन विभाग के अपर सचिव रामचंद्रडु ने प्रेस कांफ्रेंस में बताया कि बाढ़ पीड़ितों की सहायता के लिए युद्ध स्तर पर राहत एवं बचाव कार्य चलाए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि छह लाख 69 हजार बाढ़ पीड़ित परिवारों के खाते में छह-छह हजार की राशि भेज दी गई है।

यह राशि 401 करोड़ है। शेष पीड़ितों के खाते में सहायता राशि भेजने की कार्रवाई चल रही है। शीघ्र ही सभी के खाते में राशि भेज दी जाएगी। उन्होंने कहा कि बाढ़ प्रभावितों के लिए राज्य में 1204 सामुदायिक किचेन चलाए जा रह हैं, जहां पर अभी प्रतिदिन नौ लाख 30 हजार लोगों को भोजन कराया जा रहा है। सात राहत केन्द्र भी चलाए जा रहे हैं, जहां पर 12500 लोग रह रहे हैं।

तेज बारिश से बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में लोगों की बढ़ी चिंता
उधर उत्तर बिहार में मंगलवार शाम से कई इलाकों में शुरू तेज बारिश ने फिर सबकी बेचैनी बढ़ा दी। नेपाल के तराई इलाकों और चंपारण के कुछ हिस्सों में तेज बारिश होती रही। अगले तीन दिनों तक भारी बारिश का अलर्ट है। ऐसे में गंडक, बूढ़ी गंडक और बागमती जैसी नदियां फिर से बाढ़ क्षेत्र को खतरे में डाल सकती हैं। इस आशंका से बाढ़ पीड़ित डरे हुए हैं। वहीं जल संसाधन विभाग और आपदा प्रबंधन की टीमों को अलर्ट मोड में रखा गया है। हालांकि अभी मुख्य तीन नदियों गंडक, बूढ़ी गंडक व बागमती के जलस्तर में कमी आयी है। फिर भी दो नदियां अब भी खतरे के निशान से ऊपर बह रही हैं।

मुजफ्फरपुर में बूढ़ी गंडक व बागमती का जलस्तर अब भी खतरे के निशान से ऊपर है। बूढ़ी गंडक का पानी लगातार तिरहुत नहर के टूटे तटबंध से जिले के दो हिस्सों में बढ़ रहा है। एक तरफ सकरा मनियारी होते हुए पानी वैशाली के पातेपुर की ओर बढ़ रहा है, तो दूसरी ओर टूटे पश्चिमी तटबंध से पानी मुशहरी प्रखंड की ओर फैल रहा है। हालांकि पानी के बहाव की गति धीमी हुई है। बागमती के असर वाले औराई, कटरा व गायघाट में लोगों ने राहत की सांस ली है। इन तीन प्रखंडों में पानी उतर रहा है। लेकिन सरैया, पारू व साहेबगंज के बाढ़ प्रभावित क्षेत्र में संकट अभी बरकरार है।

उधर, दरभंगा में नदियों के जलस्तर में कमी दर्ज की गई है। जलस्तर में कमी के बावजूद बागमती खतरे के निशान से ऊपर बनी हुई है तो अधवारा कमतौल में खतरे के निशान के ऊपर है। वहीं कमला सोनवर्षा में खतरे के निशान से काफी नीचे आ गई है। नदियों के जलस्तर में कमी के साथ शहर में बाढ़ की स्थिति में सुधार आना शुरू हो गया है। शहर के उत्तरी व दक्षिणी भाग में बाढ़ के पानी में दो फीट की कमी आई है। हालांकि हनुमाननगर में स्थिति अब भी खराब है।

उधर, चंपारण के चनपटिया में बूढ़ी गंडक के जलस्तर में बढ़ोतरी दर्ज की गई है, जबकि लालबकेया में बूढ़ी गंडक का जलस्तर स्थिर पाया गया है। वाल्मीकिनगर बराज से मंगलवार को 1.86 लाख क्यूसेक पानी गंडक में छोड़ा गया है। चंपारण के दियारावर्ती प्रखंडों के लोग अभी बाढ़ की चिंता से उबर नहीं पाये हैं।

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