ये हैं मोदी के वे वादे…जो अब जुमले साबित हो रहे

आदमी के जुबान की कीमत क्या होती है यह कोई पीएम मोदी जी से पूछे। पिछले सालों में उनके हर जुबान का मान इस देश की जनता ने रखा। मोदी जी जो कहते गए, दीन दुखियारी जनता उसे सिर माथे पर लेकर धारण किया और विश्वास जताया। केवल इसलिए कि जो आदमी इतना दमख़म के साथ बोल रहा है उसमे कोई सच्चाई तो होगी। भरी-भरी सभाओं में मोदी जी ने जनता से तरह तरह के वादे किये। जनता से तालियां बजवाई, जयजयकार के नारे लगवाए लेकिन उसे मिला क्या ? सरकार कहती है कि उसने बहुत कुछ किया। इतना किया कि आजाद भारत में किसी सरकार ने नहीं किया। जो किया उसकी लम्बी सूची सरकार के पास है। लेकिन जो नहीं किया उसपर सरकार के लोग मौन है। जितने वायदे मोदी ने किया उस पर अब कोई कुछ नहीं बोलता। ना सरकार के लोग और नाही पीएम मोदी। वे वायदे बड़े थे। जनता से जुड़े थे। पीएम मोदी के अधिकतर जुबान अब जुमले से हो गए है। जुबान से निकली बातें अगर पूरी ना हो तो उसे क्या कहेंगे ?

आइये इनके वायदे की जानकारी आप को दे दें। बनारस के तट पर खड़े होकर मोदी जी ने क्या वायदा किया था। आपको याद भी होगा। मां गंगे से वायदा किया गया था कि गंगा अब मैली नहीं रहेगी। गंगा का अब उद्धार होगा। लेकिन माँ गंगा आज भी अपने उद्धार का राह देख रही है। आज भी वह मैली की मैली है। इस साल जुलाई में एक आरटीआई अर्जी के जवाब में भारत सरकार ने बताया कि गंगा की सफाई पर अब तक 3,800 करोड़ रुपए खर्च हो चुके हैं लेकिन कितनी सफाई हुई इसका पता नहीं। 2017 की एक आरटीआई के जवाब में केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने बताया है कि हरिद्वार में गंगा नदी का पानी पीना तो दूर नहाने के लिए भी ठीक नहीं है। इस साल एक आरटीआई के जवाब में सरकार ने माना है कि वाराणसी के घाटों के किनारे गंगा के पानी में विष्ठा कोलिफॉर्म बैक्टीरिया का दूषण 58 फीसदी बढ़ गया है।

2014 में एक गुजराती चैनल को दिए एक्सक्लूसिव इंटरव्यू में नरेंद्र मोदी के इस ब्यान से आम भारतीयों में आशा की उम्मीद जगी थी। लगा था 1993 के मुंबई बम धमाकों के मास्टरमाइंड दाऊद इब्राहिम के दिन लदने वाले हैं। उस पर भी मोदी जी ओसामा बिन लादेन जैसा कोई ऑपरेशन करेंगे। घर में घुस कर मारेंगे। लेकिन हुआ क्या, ढाक के तीन पात। मई 2017 में एक आरटीआई के जवाब में भारतीय विदेश मंत्रालय ने कहा कि भारत की किसी भी जांच एजेंसी ने विदेश मंत्रालय से दाऊद के प्रत्यर्पण की मांग तक नहीं उठाई है। अब लग रहा है मोदीजी के लिए भी इस डॉन को पकड़ना मुश्किल ही नहीं नामुमकिन है।

2014 के लोकसभा चुनाव प्रचार के दौरान नरेंद्र मोदी ने देश से यह वायदा किया था। खूब तालियां बटोरी थी और खूब वाह वाह भी लूटी थी। सुनंने में बहुत अच्छा लगा था। आपको बता दें मोदी सरकार ने भी वही रवैया अपनाया जो पूर्वत सरकारें अपनाती रही हैं। मोदी सरकार ने जब इस पर कदम नहीं उठाया तो सुप्रीम कोर्ट को ही शुरुआत करनी पड़ी। 14 दिसंबर 2017 को सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को 1581 दागी सांसदों और विधायकों से जुड़े मामलों के लिए 12 विशेष अदालतें बनाने को कहा। लेकिन अब तक तक सिर्फ दो अदालत ही बन पाई हैं। इस साल अगस्त में सुप्रीम कोर्ट ने जब केंद्र सरकार से पूछा कि क्या वह चुनाव आयोग को आदेश दे सकती है कि जो राजनीतिक दल दागी उम्मीदवारों को टिकट दें उनकी मान्यता चुनाव आयोग ख़त्म करे तब केंद्र सरकार की तरफ से बोलते हुए अटॉर्नी जनरल के के वेणुगोपाल ने कहा कि इस पर फैसला सिर्फ संसद ही ले सकती है। यह अदालत के अधिकार में नहीं आता।

कौन-कौन है जो अभी भी अपने खाते में 15-20 लाख रूपये आने की उम्मीद लगाए बैठा है? जो उम्मीद लगाए बैठे हैं वो धन्य हैं। 2016 के एक आरटीआई के जवाब में प्रधानमंत्री कार्यालय ने बताया कि मोदी जी के इस वायदे को पूरा करने की तारीख के बारे में पूछा गया सवाल आरटीआई कानून के तहत सूचना के दायरे में नहीं आता। लिहाजा, इस बारे में कोई जवाब नहीं दिया जा सकता। रही बात स्विट्ज़रलैंड में भारतीयों के काले धन की तो उस पर जून 2018 में स्विस नेशनल बैंक की रिपोर्ट ने कहा है कि स्विस बैंकों में भारतीय लोगों का जमा पैसा 2017 में 50 प्रतिशत तक बढ़ गया है। और तो और भारत में कितना काला धन है इसकी जानकारी देने से भी मोदी सरकार ने मना कर दिया। इस साल एक आरटीआई के जवाब में वित्त मंत्रालय ने कालेधन के अनुमान को लेकर तैयार की गई तीन रिपोर्ट्स को जनता से साझा करने से इनकार कर दिया।

आखिर वाला तो किसी क्रूर मज़ाक से कम नहीं। दिल पर हाथ रख कर कहिए…… क्या सचमुच अच्छे दिन आ गए हैं ? आज महंगाई आसमान छू रही है। पेट्रोल 90 तक और डीज़ल और 80 रूपये पर लीटर तक पहुँच गया है। डॉलर अर्श पर तो रुपया फर्श पर जा रहा है। साल के अंत तक डॉलर के मुक़ाबले रुपया 80 के पार पहुँच जाएगा। काले धन के नाम पर नोटबंदी लागू कर जनता को ठगा गया। नोटबंदी से कई छोटे और मंझोले उद्योग बंद हुए , लाखों लोगों की नौकरी गई , 100 से ज़्यादा लोगों की जान गई, महिलाओं और गरीबों की बरसों की बचत के पैसे हवा हो गए। हर साल बजट में नया टैक्स और नया सेस जोड़ कर आम आदमी की कमर तोड़ी जा रही है। सबसे ज़्यादा मार मिडिल क्लास लोगों को पड़ रही है। क्या यह मोदी जी का अच्छे दिन का सपना?

कहते हैं न आदमी की ज़ुबान की कीमत होती है। नहीं तो लोगों से किया वायदा जुमला बन कर रह जाता है। अपने नेता की बात पर विश्वास करना अच्छी बात है पर अंधविश्वास करना अच्छा नहीं। किसी भी बात को पहले जानिए फिर मानिए। आखिर में….. आप केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी की ज़ुबानी सुन लीजिए कि मोदी जी का अच्छे दिन का वायदा एक जुमला था।

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