लोकसभा चुनाव में हार की वजहें तलाश रहा RJD, महंगा पड़ा सवर्ण आरक्षण का विरोध

पटना: लोकसभा चुनाव में राष्‍ट्रीय जनता दल (RJD) हार की मुख्य वजहें तलाश जा रहा है, ताकि आगामी विधानसभा चुनाव में दोबारा दमदार लड़ाई की जमीन तैयार की जा सके। तीन सदस्यीय टीम को हफ्ते भर में रिपोर्ट देनी है। अभी तक जो मुख्य वजहें सामने आईं हैं, उनमें सवर्ण आरक्षण का विरोध, महागठबंधन के घटक दलों के आधार वोट का ट्रांसफर नहीं होना और यादवों का अति पिछड़ी जातियों के साथ तालमेल नहीं हो पाना प्रमुख हैं। कमेटी के निष्कर्ष लेकर आरजेडी के प्रदेश अध्यक्ष रामचंद्र पूर्वे पार्टी सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव (Lalu Prasad yadav) से मिलने रांची रवाना हो गए हैं।

चुनाव नतीजे के बाद हार की हताशा से उबरने के लिए आरजेडी के शीर्ष नेतृत्व ने तेजस्वी यादव (Tejashwi Yadav) की अध्यक्षता में पराजय के वास्तविक कारणों की पड़ताल जरूरी समझा था। इसके लिए 28 मई को राबड़ी देवी (Rabri Devi) के सरकारी आवास पर बैठक बुलाई गई। बैठक में पार्टी के प्रमुख नेता शामिल रहे। हां, इसमें लालू प्रसाद यादव के बड़े बेटे व लोक सभा चुनाव में कुछ सीटों पर पार्टी के विरोध में चुनाव प्रचार करने वाले तेज प्रताप यादव नहीं पहुंचे।

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राष्ट्रीय उपाध्यक्ष जगदानंद सिंह के नेतृत्व में तीन सदस्यीय जांच कमेटी बनाई गई है, जिसमें अब्दुल बारी सिद्दीकी और आलोक मेहता शामिल हैं। कमेटी को अपनी रिपोर्ट हफ्ते भर के अंदर देनी थी, किंतु समय ज्यादा बीत गया। अभी तक प्रक्रिया ही चल रही है।

प्रारंभिक पड़ताल में सामने आया है कि सवर्ण आरक्षण के प्रबल विरोध के चलते आरजेडी का न केवल वर्तमान का नुकसान हुआ है, बल्कि भविष्य की सियासत के भी प्रभावित होने का खतरा है। लालू प्रसाद यादव के जेल जाने के बाद तेजस्वी यादव ने जिस तरह से पार्टी की कमान संभाली थी, उसकी चौतरफा तारीफ हो रही थी। जाति-बिरादरी से अलग युवाओं का एक वर्ग ऐसा था जो तेजस्वी को प्रगतिशील मानकर बिहार का भविष्य देख रहा था।

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