श्मशान में बजी शहनाई, दूल्हा-दुल्हन ने चिता स्थल पर लिए 7 फेरे

नई दिल्ली: श्मशान में पावन रिश्ते के तार जुड़े। शहनाई बजी, फूलों से मंडप सजा, सात फेरे हुए, मंगल गीत गूंजे, साक्षी बना श्मशान घाट। इस अनोखी शादी के प्रेरणापुंज रहे प्रख्यात रामकथा वाचक मोरारी बापू। बापू के गुजरात स्थित पैतृक गांव तलगाजरडा के श्मशान घाट पर रविवार सुबह एक युवक व युवती दांपत्य सूत्र में बंधे।

इसी साल अक्टूबर में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लोकसभा क्षेत्र बनारस में मोरारी बापू ने अपनी 800वीं रामकथा मानस मसान गंगा तट पर श्मशान घाट के नजदीक सुनाई थी। तब बापू ने कहा था कि श्मशान को लेकर जनमानस में कायम भ्रांतियां दूर होनी चाहिए। श्मशान अशुभ नहीं, महान पवित्र स्थल है। यहां जन्मदिन के साथ विवाह समारोह भी होने चाहिए। बापू के इन विचारों से प्रभावित होकर ही भावनगर के महुवा कस्बा अंतर्गत साधु समाज के युवक घनश्याम और कोली समाज की पारूल ने श्मशान में शादी रचाने का फैसला लिया।

दोनों तलगाजरडा में बापू से मिले और श्मशान घाट में शादी की इच्छा जताई। बापू ने अनुरोध स्वीकार कर लिया। रविवार सुबह गांव तलगाजरडा के श्मशान घाट पर घनश्याम व पारूल सात जन्मों के बंधन में बंध गए। एक आम विवाह की तरह सारी रस्में पूरी की गईं। बैंडबाजे के साथ घनश्याम बरात लेकर श्मशान पहुंचा तो वधू पक्ष ने पलक-पांवड़े बिछा दिए। दोस्त-रिश्तेदार जमकर नाचे।

वर-वधू पक्ष के लोगों ने मिलकर श्मशान में गरबा भी किया। जहां चिता जला करती है, वहां हवन कुंड सजा, सात फेरे हुए। बापू की मौजूदगी में पंडित प्रभा शंकर ने शादी संपन्न कराई गई है। पूरा श्मशान घाट फूलों की खुशबू से महक उठा था। मोरारी बापू ने प्रसाद के रूप मे सभी को श्मशान घाट पर ही भोजन कराया। समारोह में सैकड़ों लोग मौजूद थे।

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