राजस्थान विधानसभा चुनाव: तीसरे मोर्चे की चुनौती!

राजस्थान विधानसभा चुनाव में भाजपा और कांग्रेस में टक्कर है। दोनों ही पार्टियां अपनी जीत तय करने के लिए राजनीति- रणनीति पर लगातार गंभीर मंथन कर रही हैं। वहीं बड़े जातीय संगठन भी चुनाव परिणाम को प्रभावित करने के लिए सियासी गलियारों में अपनी भूमिका का हुंकार भर रहे हैं। ब्राह्मण, जाट और गुर्जर के तीन नेता ताल ठोंकते दिख रहे हैं।

ये तीनों नेता हैं प्रदेश में जनसंघ और भारतीय जनता पार्टी के संस्थापकों में शामिल घनश्याम तिवाड़ी, आरक्षण आंदोलन को लेकर बागी तेवर दिखा रहे कर्नल किरोड़ी सिंह बैंसला और निर्दलीय विधायक हनुमान बेनीवाल। ये तीनों नेता सीएम वसुंधरा राजे के साथ हुए मतभेद के कारण भाजपा से अलग होकर भाजपा के लिए चुनौती बन गए हैं।

भाजपा से अलग होकर भारत वाहिनी पार्टी से नया दल बनाने वाले घनश्याम तिवाड़ी और निर्दलीय विधायक हनुमान बेनीवाल ने तीसरा मोर्चा बनाने की पहल शुरू कर दी है। संभवत: बसपा से हाथ मिल जाएं। गुर्जर समाज के प्रभावी नेता कर्नल किरोड़ी बैंसला ने सार्वजनिक रूप से तीसरे मोर्चे को समर्थन देने की घोषणा कर दी है।

राज्य में करीब 51 प्रतिशत ओबीसी मतदाता हैं। सवर्ण मतदाता 18 प्रतिशत हैं। एससी 18 प्रतिशत तो एसटी 13 प्रतिशत हैं। ओबीसी में सबसे अधिक वोट जाट समाज (94 प्रतिशत) के हैं। गुर्जर 5 प्रतिशत हैं। शेष में नाई, यादव, कुमावत सहित अन्य जातियां हैं। ब्राह्मण मतदाताओं की संख्या 7 प्रतिशत है। बैंसला गुर्जर समाज, बेनीवाल जाट और तिवाड़ी ब्राह्मण समाज को एकजुट कर तीसरी शक्ति खड़ी करने में जुटे हुए हैं।

राजपूत करणी सेना भी एक बड़ी चुनौती के रूप में भाजपा के सामने है। आरक्षण और एससी-एसटी एक्ट के मुद्दे पर करणी सेना भाजपा से नाराज है। बागियों के तेवर से लग रहा कि राजस्थान के विधानसभा चुनाव में इनका चला तो बड़े उलटफेर होंगे।

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