अखिलेश-मायावती से निपटने के लिए सीएम योगी ने बनाया नया समीकरण

अखिलेश अखिल

राजनीति में हार किसे पसंद है ? गोरखपुर और फूलपुर में बीजेपी की हार को योगी पचा नहीं पा रहे हैं। अखिलेश -मायावती की गठजोड़ वाली राजनीति सीएम योगी को और भयभीत कर रखा है। पिछले कई दिनों से योगी साहब इस खेल का तोड़ खोज रहे थे। कई सामाजिक जानकारों के साथ बैठकें की। जातीय समीकरण को जाना। देश भर के जातीय समीकरण को खोजा। हर नेता की राजनीति समझी तब जाकर सीएम योगी नजर बिहार में खेले गए नीतीश कुमार के खेल पर जाकर टिकी। लोगों ने खूब समझाया तो पता चला कि जिस तरह से बिहार में बिहार में नीतीश कुमार ने महादलित और अति पिछड़े की राजनीति को आगे बढाकर अपनी राजनीति बरकरार रखी,उसी तरह का खेल या समीकरण यूपी में भी लागू हो सकता है। योगी जी खुश हो गए और लग गए जातियों की सूचि समझने। अब जाकर तय हो गया है कि यूपी में भी योगी जी नीतीश की राह को अपनाएंगे यानी महादलित और अतिपिछड़ा का कार्ड तैयार करेंगे और अखिलेश -मायावती की राजनीति को धूल चटाएंगे। 2019 में योगी जी इसी समीकरण को और तेज करेंगे।

सूत्रों के मुताबिक़ बिहार की तर्ज पर जल्द ही योगी सरकार भी महादलित और अतिपिछड़ा कार्ड खेलेगी जिससे बीएसपी-एसपी गठबंधन के प्रभाव को कम किया जा सके। महादलितों-अतिपिछड़ों के भीतर सरकार को लेकर एक सकारात्मक माहौल बनाया जा सके। एक आईएएस अधिकारी ने नाम न जाहिर करने की शर्त पर बताया कि बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के फॉर्मूले पर अब उत्तर प्रदेश भी आगे बढ़ने जा रहा है। जानकारी के मुताबिक, “अखिलेश और मायावती के गठबंधन के असर को कम करने के लिए राज्य सरकार लोकसभा चुनाव से पहले ही आरक्षण को लेकर बड़ी कवायद शुरू करने जा रही है। इसके जरिए उत्तर प्रदेश में भी अब कोटे में कोटा की शुरुआत होगी। सरकार की ओर से महादलित और अतिपिछड़ा को लेकर जल्द ही अधिसूचना जारी की जाएगी। “

बता दें कि ओबीसी और एससी/एसटी को मिलने वाले आरक्षण में अब राज्य सरकार भी बिहार सरकार की तरह समाज में अति पिछड़ी जातियों और महादलितों को आरक्षण की सीमा तय करेगी। अति पिछड़ा और महादलित की श्रेणी में आने वाली जातियों को लेकर मंथन जारी है। उन्होंने बताया कि सरकार यह भी तय करने जा रही है कि महादलित और अतिपिछड़ा कार्ड सिर्फ झुनझुना न रहे। इसको अमल में भी लाया जाएगा। लोकसभा उपचुनाव से पहले होने वाली कई भर्तियां आने वाली अधिसूचना के आधार पर ही करवाई जाएंगी, जिससे अतिपिछड़े और महादलितों के भीतर सरकार के प्रति सकारात्मक माहौल बनाया जा सके।

सूत्रों के मुताविक महादलित और अतिपिछड़ा कार्ड का लोकसभा चुनाव में काफी दूरगामी असर पड़ेगा। इससे उन जातियों को झटका लगेगा, जिनको ओबीसी और अतिपिछड़ा कोटे का लाभ ज्यादा मिलता रहा है। अब उनकी एक निर्धारित सीमा होगी. उससे ज्यादा उन जातियों को कोटे का लाभ नहीं मिलेगा। हालांकि इस अधिसूचना को जारी करने से पहले सरकार हर स्तर पर इसके नफा-नुकसान को लेकर आंकलन में जुटी हुई है। यदि सबकुछ सही रहा तो अगले महीने तक यह अधिसूचना जारी हो जाएगी. सूत्रों ने भी स्वीकार किया है कि सरकार दलितों और अतिपिछड़ों के बीच अपनी पकड़ बनाने की कवायद तेज करने जा रही है। इसी एजेंडे के तहत सोमवार को उत्तर प्रदेश के पिछड़े जिलों को लेकर एक बैठक योजना भवन में हुई थी। इस बैठक में मुख्मयंत्री योगी, केंद्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह, केंद्रीय रेल राज्य मंत्री और संचार मंत्री मनोज सिन्हा भी मौजूद थे।

सूत्र ने बताया कि इस बैठक का एजेंडा यही था कि सरकार के मंत्री इन पिछड़े जिलों में कैंप करें और दलितों और अतिपिछड़ों में अपनी पैठ बनाने का प्रयास करें। इन जिलों में राज्य और केंद्र सरकार की योजनाओं को तेजी से लागू कराने के प्रयास किए जाएंगे। यूपी के आठ जिले विकास की मुख्यधारा से अलग-थलग हैं, जिसमें सिद्घार्थनगर, बलरामपुर, श्रावस्ती, बहराइच, सोनभद्र, चित्रकूट, चंदौली व फतेहपुर ऐसे जिले हैं, जो उत्तर प्रदेश में अति पिछड़े घोषित किए गए हैं।

बता दें कि जब इस तरह के राजनीतिक समीकरण तलाशे जा रहे थे तब बिहार के एक अधिकारी ने इस चौकाने वाले समीकरण का खुलासा किया और सभी यह पसंद भी आया।माना जा रहा है कि इस तरह के समीकरण तैयार करने के लिए आधा दर्जन से ज्यादा अधिकारियों को तैनात किया जा रहा है जो प्रदेश दलित और पिछड़े जातियों में से महादलित और अति पिछड़े जातियों की सूची बनाकर आगे की तैयारी करेंगे।

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