अखिलेश सरकार में हुआ घोटाला आया सामने, निदेशक समेत छह अफसर निलंबित

लखनऊ: लोकसभा चुनाव जैसे-जैसे पास आ रहे हैं वैसे ही अखिलेश यादव की मुश्किलें बढ़ती जा रही हैं. एक तरफ वो बसपा के साथ गठबंधन कर अपनी जीत की ताल ठोक रहे हैं वहीं, दूसरी तरफ उनके शासनकाल में हुए घोटाले उनकी मुश्किलों को बढ़ाने का काम शुरू कर चुके हैं.

अखिलेश सरकार में 2012-13 के दौरान पशुपालन विभाग में हुई भर्ती में धांधली का बड़ा खुलासा हुआ है. जांच में पाया गया कि भर्ती में मनमाने तरीके से मानकों को दरकिनार किया गया. प्रदेश भर में 1148 पशुधन प्रसार अधिकारियों की हुई भर्ती में अफसरों ने लिखित परीक्षा 100 की जगह 80 नंबरों की करवाई और 20 नंबर का इंटरव्यू रख दिया. जिसके सहारे मनपसंद अभ्यर्थियों को चुना गया

सीएम योगी ने घोटाले पर कड़ी कार्रवाई करते हुए विभाग के अपर निदेशक समेत छह अफसरों को निलंबित कर दिया गया है. शासन ने भर्ती घोटाले में दोषी मानते हुए पशुपालन निदेशक चरण सिंह यादव सहित अपर निदेशक अशोक कुमार सिंह, बस्ती के अपर निदेशक जीसी द्विवेदी, लखनऊ मंडल के अपर निदेशक डॉक्टर हरिपाल, बरेली मंडल के अपर निदेशक एपी सिंह और अयोध्या के अपर निदेशक अनूप श्रीवास्तव को निलंबित कर दिया है.

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के आदेश पर एसआईटी ने भर्ती में घोटाले का पर्दाफाश किया है. जांच के बाद एसआईटी टीम ने प्रशासन को रिपोर्ट भेज दी जिस पर कार्रवाई की गई है.

उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और सपा अध्यक्ष ने अपने शासनकाल में विकास का खूब राग अलापा लेकिन सपा सरकार वास्तव में क्या विकास करने में व्यस्त थी या प्रदेश में नए घोटालों की सूची बनाने में व्यस्त थी, इसका खुलासा भी धीरे धीरे होने लगा है. 2012-13 के दौरान पशुपालन विभाग में हुई भर्ती में धांधली का बड़ा खुलासा हुआ है. जांच में पाया गया कि भर्ती में मनमाने तरीके से मानकों को दरकिनार किया गया.

गोमती रिवरफ्रंट घोटाला सबसे चर्चित

सपा सरकार में घोटालों की लंबी लिस्ट है. अखिलेश सरकार के दौरान जो भी भर्तियां निकाली गईं, उनमें अनियमितता के चलते हाई कोर्ट से रोक लग जाती रही. सरकार बदलने के बाद से ही लगातार एक के बाद घोटाले सामने आ रहे हैं.

योगी सरकार ने गोमती रिवर सौंदर्यीकरण परियोजना की जांच शुरू की थी जिसका काम समाजवादी पार्टी सरकार के समय में हुआ था. उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में 1500 करोड़ गोमती रिवर फ्रंड प्रॉजेक्ट अखिलेश यादव के ड्रीम प्रोजेक्ट में से एक था. इस योजना में बड़ी वित्तीय अनियमितता की आशंका के बाद ही यूपी की योगी सरकार ने जांच के आदेश दिए थे. इसके साथ ही इस मामले में उन्होंने सीबीआई जांच की भी सिफारिश की थी जिसके बाद सीबीआई ने इस मामले की जांच अपने हाथ में ले ली थी.

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