अगले लोकसभा चुनाव को लेकर बीजेपी की चिंता और विश्लेषकों का चिंतन

अखिलेश अखिल

हालांकि अगले लोक सभा चुनाव के बारे में हार जीत की संभावना पर बहस करना अभी जल्दबाजी हो सकती है लेकिन जिस तरह से देश का मिजाज बदलता दिख रहा है और राजनीति के भीतर की राजनीति कुलांचे मार रही है उससे लगता है कि बीजेपी के भीतर भी बहुत कुछ ठीक नहीं है। 2019 के चुनाव को लेकर बीजेपी की चिंता बढ़ी है और पीएम मोदी और पार्टी अध्यक्ष अमित शाह उस जुगाड़ में लगे दिख रहे हैं कि बीजेपी को 2014 की तरह ही भारी बहुमत कैसे मिल सके। पार्टी प्रमुखों को इस बात को चिंतित होना लाजमी भी है।

बीजेपी नेताओं को .चिंता इस बात की है कि अगर अगले साल मई में होने वाले लोक सभा चुनाव में वह सामान्य बहुमत हासिल न कर पाई तो क्या होगा? अगर कहीं लोक सभा में सबसे बड़ी पार्टी या दूसरे नंबर का ही दल बनकर रह गई तो क्या होगा? बीते दिनों सामने आए कुछ ओपिनियन पोल सर्वे, सहयोगी दलों द्वारा दबाव बनाने की ख़बरें और कुछ विश्लेषणों का निष्कर्ष भाजपा की इस चिंता की पुष्टि करता दिखाई देता है। आपको बता दें कि लोक सभा में कुल 545 सीटें हैं। बहुमत के लिए किसी भी पार्टी को 272 का आंकड़ा पार करना होता है। साल 2014 की बात करें तो उससे पहले के 30 साल के दौर में पहली बार ऐसा हुआ था जब किसी एक पार्टी ने 272 से ज़्यादा सीटें हासिल की थीं। बीजेपी ने 282 सीटें जीती थी। लेकिन पिछले महीने हुए सर्वे रिपोर्ट बता रहे थे कि बीजेपी को 2014 की तुलना में कम सीटें मिलेगी।

पीएम मोदी और अमित शाह के लिए यह चिंता का विषय है। पार्टी कभी नहीं चाहेगी कि 2019 का चुनाव उसके हाथ से निकले। जाहिर है बीजेपी को 2019 में भी उत्तरभारत में अपनी ताकत बरकरार रखनी होगी। यह बात और है कि उत्तरभारत में आज भी बीजेपी के आधार वोट में कोई कमी आती नजर होती है और यही वह वजह है कि पीएम मोदी चाहते हैं कि इस साल के अंत तक कई विधान सभा चुनाव के साथ लोक सभा चुनाव को भी संपन्न करा लिया जाय। इस बावता वे पीएम तमाम विपक्षी पार्टियों से भी मिल जल रहे हैं। बीजेपी को लगता है कि मोदी के नाम पर भी उत्तर भारत में समा बंधा हुआ है तमाम विरोध के बावजूत बीजेपी की सरकार सहयोगी दलों के साथ बन सकती है। आगे क्या होगा यह देखने की बात होगी। लेकिन इतना साफ़ है कि बीजेपी में चिंता तो बढ़ी है।

समय के साथ एनडीए के भीतर भी खेल जारी है। यह बात और है कि बहुमत की वजह से इस सरकार में एनडीए की राजनीति बहुत ही कमजोर है। किसी का कुछ चलता दिखाई नहीं देता। कोई भी एनडीए सहयोगी अपनी बात को लेकर जिद्द करता नहीं दिखता। लेकिन हो सकता है कि चुनाव से पहले क्षत्रप पार्टियां सीटों को लेकर बीजेपी से तोलमोल करे और भविष्य की राजनीति को देख समझ कर अपना निर्णय ले। इसकी जानकारी बीजेपी को भी है और वह इन तमाम संभावनाओं पर भी नजर रखे हुए है। इसके साथ यह भी साफ़ है कि एनडीए के कई सहयोगी विरोध करते भी नजर आ रहे हैं। इनमें शिवसेना, शिरोमणि अकाली दल, तेलुगु देशम पार्टी (टीडीपी) और अन्य छोटे दल प्रमुख हैं। शिवसेना घोषणा कर चुकी है कि वह महाराष्ट्र में अकेले दम पर ही चुनाव लड़ेगी।

उसे शिकायत है कि महाराष्ट्र में भाजपा ने उसका जनाधार लील लिया है। ऐसे ही पिछले कुछ समय से टीडीपी खुलेआम नाराज़गी ज़ता रही है। उसे आंध्र प्रदेश के पुनर्निर्माण के लिए केंद्र से आर्थिक मदद चाहिए। उसकी चिंता यह भी है कि भाजपा आंध्र में उसकी विरोधी वाईएसआर कांग्रेस को भी पटाने में लगी है। इन दोनों दलों की तरह अकाली दल ने भी अपना असंतोष ज़ताया है। उसकी ओर से हाल में ही आए बयान कहा गया कि भाजपा को अपने सहयोगियों से बेहतर व्यवहार करना चाहिए। इन तमाम अावाज़ों का मतलब सीधा है। भाजपा के सहयोगी अब उस पर दबाव बढ़ाने लगे हैं। और अगर अगले चुनाव में पार्टी बहुमत से थोड़ा भी कम रही तो उसे इन सहयोगियों की सख़्त सौदेबाज़ी का सामना करना पड़ सकता है।

ऐसे में साफ़ दिख रहा है कि मोदी को अगले चुनाव के बाद नए सहयोगियों की ज़रूरत पड़ सकती है। जाहिर है ऐसा होता है तो राजनीति भी अलग तरह की होगी। 2014 में अन्य दलों का लगभग सूपड़ा साफ कर दिया था बीजेपी ने। जैसे गुजरात, बिहार, झारखंड, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, राजस्थान, आदि में विपक्ष नाम की चीज भी नहीं बची। लेकिन गुजरात विधानसभा चुनाव और राजस्थान में तीन सीटों (दो लोक सभा और एक विधानसभा) के नतीजों ने चिंता बढ़ाई है। गुजरात में जहां भाजपा 100 के आंकड़े से नीचे ठहर गई है. वहीं राजस्थान में तीनों सीटें उससे कांग्रेस ने छीन ली हैं। इसीलिए अब कुछ लोग यह मान रहे हैं कि ऊपर जिन राज्यों का ज़िक्र हुआ है उनमें कांग्रेस अब भाजपा को नुकसान पहुंचाने की स्थिति में आ चुकी है। ऐसे में अब सबकी नजरें कर्नाटक चुनाव पर टिकी है। कर्नाटक के परिणाम बहुत कुछ कह जाएंगे। इस परिणाम के बाद बीजेपी की रणनीति देखने वाली होगी।

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