अजब-गजब! दामाद को गधे पर बिठा कर घुमाते हैं पूरा गांव! होली की अनोखी परंपरा

नई दिल्ली। होली की हर जगह की अपनी—अपनी परंपराएं हैं। बुंदेलखंड की बात करें Ajab Gajab news तो यहां फागें गाई जाती हैं। साथ ही अशोकनगर के पास करीला का मेला anokhi parampara भी विश्व प्रसिद्ध है। यहां—यहां विदेशों से आकर लोग मेले में शामिल होते हैं। लेकिन क्या आपने किसी ऐसी परंपरा के बारे में सुना है। जहां घर के सबसे सम्मानीय व्यक्ति यानि दामाद को गधे की सवारी कराई जाती हो। इतना ही नहीं इन्हें गधे पर बिठाकर पूरा गांव भी घुमाया जाता हो। यदि नहीं तो चलिए आज हम आपको बताते हैं इस अनोखी और खास परंपरा के बारे में।

महाराष्ट्र के बीड जिले में निभाई जाती है ये अनोखी परंपरा —

रंगों के साथ हुल्लड़बाजी के लिए भी होली का त्योहार चर्चा में होता है। वैसे तो लोग इसे एंज्वाय करते हैं लेकिन इसकी अनोखी परंपराएं इसे और अधिक खास बना देती हैं। आज हम जिस विचित्र परंपरा के बारे में बताने जा रहे हैं वह है महाराष्ट्र के ​बीड जिले की। जहां दामाद को गधे की सवारी कराई जाती है। पर इसके पीछे कारण क्या है, चलिए आज हम आपको बताते हैं।

बुरा न मानों होली है —
वैसे तो बुरा न मानो होली है कहकर लोग एक दूसरे को रंग लगा लेते हैं। लेकिन हद तो तब हो जाती है जब घर के दामाद को गधे पर बिठाकर पूरे गांव की सैर करा दी जाए। जी हां महाराष्ट्र के बीड में होने वाली इस परंपरा में दामाद को रंगों से सराबोर करके गधे पर बिठाया जाता है। इतना ही नहीं गधे को भी बकायदा पूरी तरह फूलों से सजाया जाता है।

क्यों शुरू हुई ये अनोखी परंपरा —
इस अनोखी परंपरा के शुरू होने की पीछे की कहानी भी अजीब है। ऐसा माना जाता है कि होली के रंग से बचने के लिए करीब 80 साल पहले विडा येवता गांव के देशमुख परिवार में रंग लगवाने से मना करने पर इस परंपरा की शुरुआत हुई थी। उस समय परिवार द्वारा रंग लगवाने से मना किए जाने पर ससुर अनंतराव देशमुख द्वारा फूलों से सजा गधा मंगवाया गया। इसके बाद दामाद को रंगों से भिगाकर पूरे गांव में घुमाया गया।

दामाद को खिलाई गई मिठाई —

इस दौरान दामाद को गधे की सैर कराकर उसकी पसंद के कपड़े दिलाकर उसे मिठाई भी खिलाई गई थी। माना जाता है तभी से ये परंपरा शुरू हुई होगी। करीब 80 साल यानि 8 दशक बाद भी आज से पूरे उत्साह के साथ यह परंपरा इस जगह पर निभाई जा रही है। कहते हैं होली से पहले ही दामादों की तलाश इस परंपरा के लिए शुरू कर दी जाती है। अगर दामाद न मिले तो किसी को इसकी उपाधि देकर ये परंपरा निभाई जाती है। ताकि इसमें रुकावट न आए।

दामाद भाग जाते हैं गांव से —
होली से पहले इसकी तलाश शुरू कर दी जाती है। लेकिन कई बार इस परंपरा से बचने के लिए भी लोग गांव से भाग जाते हैं। इसके लिए दामादों को कड़े पहरे में रखा जाता है। ताकि होली पर ये रफूचक्कर न हो जाएं।

दामाद को गधे पर बैठने पर मिलती है सोने की घड़ी —

ऐसा नहीं है कि ये परंपरा दामाद को बेइज्जत करती है। इसे केवल एक परंपरा के रूप में निभाया जाता है। इतना ही नहीं इस परंपरा के बाद दामाद को बेशकीमती तोहफों के साथ सोने की अंगूठी भी दी जाती है। इससे पहले दामाद की आरती उतारकर पूजा भी की जाती है।

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