अनशन पर बैठे अन्ना हजारे आखिर चाहते क्या हैं?

अखिलेश अखिल

गांधीवादी अन्ना हजारे दिल्ली के रामलीला मैदान में अनशन पर बैठे हैं। शुक्रवार से जारी उनके भूख हड़ताल का दूसरा दिन है। यह बात और है कि पहले की तुलना में अन्ना के इस आंदोलन में भीड़ काफी कम है लेकिन अन्ना का हौसला बुलंद है। उन्होंने कहा है कि जब तक मांगे पूरी नहीं हो जाती, वे डिगने वाले नहीं हैं। ऐसे में सवाल यह है की आखिर अन्ना चाहते क्या हैं ? उनकी मांगे क्या है ? आइये पहले उनकी मांगो पर एक नजर डालते हैं।

अन्ना की 7 प्रमुख मांगें हैं। किसानों के कृषि उपज की लागत के आधार पर डेढ़ गुना ज्यादा दाम मिले, खेती पर निर्भर 60 साल से ऊपर उम्र वाले किसानों को प्रतिमाह 5 हजार रुपए पेंशन, लोकपाल कानून को कमजोर करने वाली धारा 44 और धारा 63 का संशोधन तुरंत रद्द हो, हर राज्य में सक्षम लोकायुक्त नियुक्त किया जाए, चुनाव सुधार के लिए सही निर्णय लिया जाए, कृषि मूल्य आयोग को संवैधानिक दर्जा तथा सम्पूर्ण स्वायत्तता मिले और लोकपाल विधेयक पारित हो और लोकपाल कानून तुरंत लागू किया जाए। तो ये है अन्ना की मांग।

अन्ना हजारे ने कहा है कि लोकतंत्र नहीं आया, अंग्रेज तो चले गए, सिर्फ गोरे गए और काले आ गए। जब तक किसानों को हक नहीं मिलता, तब तक लड़ना है। हड़ताल से पहले हजारे ने कहा कि उन्होंने सरकार को 42 बार पत्र लिखा, लेकिन उनकी नहीं सुनी गई। अंत में विवश होकर अनशन पर बैठना पड़ रहा है। इस बार आश्वासन पर आंदोलन खत्म नहीं होगा। जब तक मांग पूरी नहीं होगी, वे हटेंगे नहीं। अन्ना ने बताया कि प्रदर्शनकारियों को दिल्ली लेकर आ रही ट्रेन को केंद्र सरकार ने रद्द करा दिया है। इससे आंदोलनकारी हिंसा की ओर अग्रसर हो सकते हैं। मेरे लिए भी पुलिस बल तैनात कर दिया गया। कई पत्र लिखे और कहा था कि मुझे सुरक्षा नहीं चाहिए। केंद्र की सुरक्षा उन्हें नहीं बचा सकती। सरकार का धूर्त रवैया ठीक नहीं है।

अन्ना के आंदोलन में इस बार किसी राजनीतिक दल के नेता को मंच नहीं दिया जाएगा। इसके साथ ही टीम का प्रत्येक सदस्य एक शपथ पत्र अन्ना को दे चुका है कि भविष्य में किसी राजनीतिक गतिविधि में भाग नहीं लेगा। अन्ना के सहयोगियों का कहना है कि अब आंदोलन के सहारे कोई अरविंद केजरीवाल, मनीष सिसोदिया, किरन बेदी व जनरल वीके सिंह पैदा नहीं होगा। अन्ना कह चुके हैं कि इस बार आंदोलन में 2011 के आंदोलन का कोई सदस्य नहीं है। नए साथियों की टीम बनी है। सभी ने शपथ पत्र दिया है। इसके बाद ही आंदोलन के साथ काम करने की ड्यूटी दी गई है। अन्ना ने देशभर में घूम-घूमकर 600 कार्यकर्ताओं की टीम तैयार की है। इनमें 20 सदस्यों की एक कोर टीम भी बनाई गई है।

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