अनशन में आने से रोककर किसानों को हिंसा की ओर ढ़केल रही है सरकार: अन्ना

नई दिल्ली: समाजसेवी अन्ना हजारे ने कहा कि केंद्र सरकार उनके अनशन को असफल करने के लिए तरह-तरह के हथकंडे अपना रही है। अनशन में किसान नहीं पहुंचे इस लिए उसने किसानों को लेकर दिल्ली पहुंचने वाली अनेक ट्रेनों को रद्द कर दिया है। उन्होंने चेतावनी दी कि देश का किसान बदहाली का शिकार है। उसके घावों पर मरहम लगाने की जगह उसे कुरेदना ठीक नहीं है। उन्हें अपनी बात कहने से रोकने के चलते वे हिंसक हो सकते हैं। उन्होंने सवाल किया क्या सरकार किसानों को हिंसा की ओर ले जाना चाहती है?

दिल्ली के रामलीला मैदान में अन्ना लोकपाल और किसानों को उचित मूल्य के मुद्दों पर अनिश्चितकालीन अनशन कर रहे हैं। देशभर से किसान वहां जुटने लगे हैं, लेकिन जो ट्रेनें प्रदर्शनकारियों को लेकर दिल्ली आ रही थीं, उन्हें रद्द कर दिया गया है। सरकार के रवैये पर नाराजगी जताते हुए अन्ना बोले जो ट्रेनें प्रदर्शनकारियों को लेकर दिल्ली आ रही थीं, उन्हें रद्द कर दिया गया है। क्या आप उन्हें हिंसा की ओर ढ़केलना चाहते हैं? मेरे लिए पुलिस फोर्स भी तैनात कर दी गई हैं। मैंने कई पत्र लिखे कि मुझे पुलिस सुरक्षा नहीं चाहिए। आपकी सुरक्षा मुझे नहीं बचाएगी। इसके बाद भी सुरक्षा लगा दी है। सरकार का यह रवैया ठीक नहीं है।

लोकपाल के लिए अपना विरोध शुरू करने के साथ ही अन्ना ने कहा मैंने कई बार अनशन किए, लेकिन कभी हिंसा का सहारा नहीं लिया। सरकार ने पता यहां आनेवाले लोगों को रोकने के लिए ट्रेनें और बसें रोक दीं हैं। यह लोकतंत्र का गला घोंटने वाली बात है। सरकार किसानों की समस्याओं पर ध्यान नहीं दे रही है। अन्ना ने कहा जब लोगों को न्याय नहीं मिलता तब उनके पास आंदोलन करने के अलावा कोई दूसरा चारा नहीं बचता। अंग्रेज चले गए हैं, लेकिन इस देश में लोकतंत्र कहां है। राजनेताओं से नाराजगी जताते हुए उन्होंने कहा नेता जनता का दुख नहीं समझते, बल्कि सिर्फ खुद के बारे में सोचते हैं।

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