अनोखी खासियत के कारण इस किले का नाम पड़ा कुंवारा

नई दिल्ली: देश में कई किले (fort) हैं जो अपनी एक अलग पहचान से जाने जाते हैं और वह अपने उस पहचान की वजह से काफी प्रसिद्ध (famous) भी होते हैं आज हम आपको एक ऐसे किले के बारे में बताने जा रहे हैं, जिसका नाम सुनकर आप भी सोचेंगे कि आखिर क्या वजह थी इस नाम के पीछे की। लोग इस किले को कुंवारा किले के नाम से जानते है।

एकमात्र है पुरानी इमारत
पूरे अलवर में एकमात्र या किला ही सबसे पुरानी इमारत में से एक था ऐसा कहा जाता है कि इस किले को 1492 ईस्वी में हसन खान मेवाती ने शुरू करवाया था या किला अपनी भव रचना रचनात्मक डिजाइन के लिए पूरे देश में प्रसिद्ध है कहां जाता है इस किले पर मुगलों से लेकर मराठों और जाटों तक का शासन रहा है।

इस किले को बनवाते समय इस बात को ध्यान में रखा गया कि अगर कभी दुश्मनों पर वार करना पड़े तो हमें आसानी हो इस किले की दीवारों में 446 हेड हैं। जिन्हें खासकर इस वजह से बनाई गई हैं ताकि दुश्मनों पर गोलियां बरसाने के काम आ सके। इन हे दो से 10 फुट की बंदूक से भी गोली चलाई जा सकती है इस किले में रहकर हम अपने दुश्मनों पर नजर रख सकें इसके लिए जिले में 15 बड़े और 51 छोटे बुर्ज बनाए गए थे।।

जाने के है 6 दरवाजे
जानकारी से क्या अभी पता चला है कि इस किले पर कभी कोई युद्ध नहीं हुआ यही वजह है कि इसे कुंवारा किला कहा जाता है या किला काफी जगह में बनाया गया है। इसकी लंबाई 5 किलोमीटर लंबा और करीब 1 पॉइंट 5 किलोमीटर चौड़ा है। किले पर जब अंदर जाने के लिए कुल 6 दरवाजे बनाए गए है, जिनके नाम अलग-अलग रखे गए हैं। पहले दरवाजे को जय पोल दूसरे दरवाजे को सूरजपोल तीसरे दरवाजे को लक्ष्मणपुर चौथे दरवाजे को चांदपोल तथा आखिरी दरवाजे को कृष्णा पोल और अंधेरी पोल कहते है। इस प्रकार से सभी दरवाजों के अपने अलग-अलग नाम है रिपोर्ट के अनुसार कहा जाता है कि इस किले में मुगल शासक बाबर और जहांगीर भी आकर रुके हैं, जिसमें बाबर ने यहां मात्र एक रात ही बिताया था।

 

नोट: अगर आपको यह खबर पसंद आई तो इसे शेयर करना न भूलें, देश-विदेश से जुड़ी ताजा अपडेट पाने के लिए कृपया The Lucknow Tribune के  Facebook  पेज को Like व Twitter पर Follow करना न भूलें...
Loading...
--------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------- --------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------- ---------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------
E-Paper