अपने सन्देश के जरिए बिहार की राजनीति को साध रहे लालू यादव

पटना: राजद सुप्रीमों लालू प्रसाद यादव की राजनीति आगे बढ़ रही है। भले जी चारा घोटाला में सजा पाए लालू प्रसाद इन दिनों एम्स में इलाज करा रहे हों लेकिन उनका संदेश बिहारी समाज को बल प्रदान कर रहा है। जगा रहा है और खासकर उनके वोटबैंक में जोश भर रहा है। बिमारी में भी लालू प्रसाद की सक्रियता जारी है। राजनीति में जीने वाले लालू भला राजनीति से बंचित कैसे रह सकते। उनका हर बयान राजनीति से भरा होता है और हर बयान के अपने मायने भी निकल जाते हैं।

पिछले दिनों सपा के अखिलेश यादव हों, या फिर भाजपा के शत्रु बिहारी बाबू, लालू से मिले। क्या बाते हुयी कौन जाने लेकिन एक बड़ा संदेश देश को तो चला ही गया। अब गाहे-बगाहे लालू अपने संदेश के माध्यम से बिहार की सियासत को साध रहे हैं, वहीं दूसरी ओर अपने बेटे तेजस्वी यादव को यह भरोसा दिलाने में कामयाब हो रहे हैं कि उनकी पीठ पर उनके सियासी अनुभव का हाथ हमेशा बना हुआ है।

राजनीतिक जानकार कहते हैं कि लालू यादव कहीं भी रहें, उनकी निगाह बिहार की राजनीतिक और देश में हो रहे सियासी हलचलों पर टिकी रहती है। इन दिनों वह लगातार केंद्र सरकार के खिलाफ आग उगल रहे हैं और अपने समर्थकों को संदेश के माध्यम से साधने में लगे हुए हैं। लालू ने गुरुवार को केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार पर प्रहार करते हुए आरोप लगाया कि देश में अघोषित आपातकाल की स्थिति है और आजादी के 70 सालों में दबे कुचले और उपेक्षित वर्ग ने इतना बुरा दौर कभी नहीं देखा। अपने नेता के इस बयान को बिहार में समर्थक पढ़कर फूले नहीं समाये।

लालू के संदेश में यह साफ था कि तेजस्वी के नेतृत्व में राजनीति करने वाले पार्टी के विधायक यह समझ जायें कि पल भर के लिए भी लालू की निगाह पार्टी से दूर नहीं हुई है और वह पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं। बैठक में लालू के संदेश को सबसे ज्यादा तरजीह दी गयी और उसे सभी विधायकों को मूल मंत्र समझकर आत्मसात करने की हिदायत भी दी गयी। संदेश में कहा गया है कि समाज के कमजोर वर्ग राजद से आस लगाए बैठे हैं कि हम उनकी वेदना को पूरी ताकत से हर मंच पर उठाएं और उनकी आवाज को बुलंद करें।

लालू ने इस संदेश में आगे लिखा है कि आजादी के 70 सालों में दबे कुचले और उपेक्षित वर्ग ने इतना बुरा दौर कभी नहीं देखा। यह अघोषित आपातकाल का दौर आपातकाल से भी अधिक खतरनाक है क्योंकि आज संविधान को बदलने की बात ही धड़ल्ले से की जा रही है। राजद प्रमुख जो कि वर्तमान में दिल्ली के एम्स में इलाजरत हैं, ने अपने संदेश में आरोप लगाया है कि कमजोर वर्ग की रक्षा करने वाले कानून को हटाया और बदला जा रहा है। सरकार के विरूद्ध आवाज उठाने को देशद्रोह का नाम दिया जा रहा है। स्वयं केंद्र सरकार की ओर से उन ताकतों को बल दिया जा रहा है जो समाज को बांटने, समाज का ध्रुवीकरण करने और ध्रुवीकरण के आधार पर ही चुनाव जीतने को अपना लक्ष्य मानकर आगे बढ़ रही हैं।

लालू ने इस संदेश के जरिये बिहार की नब्ज को देखते हुए साफ कहा है कि सिर्फ दबे कुचले, उत्पीडित, उपेक्षित, शोषित और वंचित वर्ग ही नहीं बल्कि अन्य राजनीतिक दल भी आज राजद से उम्मीद करते हैं कि हम फिरकापरस्त और मनुवादी ताकतों को ललकारें और उन्हें पराजित भी करें। लालू ने अपने पार्टी के नेताओं से कहा है कि आगामी 14 अप्रैल को अंबेडकर जयंती के दिन हमें अपने संघर्ष का स्मृति चिन्ह बनाकर पूरे देश को एक सूत्र में पिरोने की ओर आगे बढना है और दक्षिणपंथी राजनीति से लोगों को अवगत भी कराना है।

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