अपने साहस का लोहा मनवाने वाली महिलाओं को सीएम योगी ने किया सम्मानित

लखनऊ: उत्तर प्रदेश सरकार के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गुरुवार को वीरता और साहस के क्षेत्र में असाधारण काम करने और विभिन्न क्षेत्रों में खास उपलब्धियां हासिल करने वाली महिलाओं व बलिकाओं को रानी लक्ष्मी बाई वीरता पुरस्कार से सम्मानित किया। इस मौके पर उन्होंने धर्मनाथ मिश्र व उस्ताद सखावत हुसैन खान को बेगम अख्तर पुरस्कार भी दिया गया। संस्कृति विभाग और महिला बाल विभाग द्वारा आयोजित कार्यक्रम में सभी को एक लाख की पुरस्कार राशि देकर सम्मानित किया गया।

लखनऊ के लोकभवन में आयोजित कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने 15 लोगों को पुरस्कार दिया। अन्य लोगों को महिला एवं परिवार कल्याण मंत्री रीता बहुगुणा जोशी और लक्ष्मी नारायण चौधरी व राज्यमंत्री स्वाति सिंह समेत अन्य मंत्रियों ने पुरस्कार देकर सम्मानित किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि गांवों में विकास के लिए पर्याप्त धनराशि उपलब्ध कराई जा रही है। लेकिन इस धनराशि से योजनाओं को संचालित कराए जाने के लिए सामुदायिकता का भाव होना चाहिए। गांव का विकास खुद जनता को तय करना चाहिए। हर गरीब के पास राशन कार्ड होना चाहिए। गरीबी से मौत तो एक की होती है, लेकिन बुराई तो पूरे समाज की होती है। हर गरीब तक योजनाओं का लाभ पहुंचाने के लिए समाज के जागरूक लोगों को आगे आना होगा।

उन्होंने कहा कि पिछले वर्ष हाईस्कूल व इंटर की परीक्षाओं में टॉप 10 में जगह बनाने वाले मेधावियों को सम्मानित करने का कार्य भी हमने शुरू किया है। यह जानकर अत्यंत प्रसन्नता हुई कि टॉप टेन में शामिल 147 विद्याार्थियों में से 99 सिर्फ बालिकाएं थीं। बालिकाओं ने अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि परिवार में बालिका जन्म लेती है तो सबसे पहली टिप्पणी घर की दादी की होती है। ऐसी मानसिकता को बदलना होगा। बालक हो या बालिका, उसके साथ समान व्यवहार किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि कुछ जिले ऐसे हैं, जहां बालिकाओं के साथ भेदभाव की शिकायतें आती हैं। लिंगानुपात में भारी अंतर देखने को मिल रही है। भेदभाव खत्म करने को एक वर्ष के दौरान बहुत काम हुआ है लेकिन अभी और सुधार की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि विषमता सिर्फ सरकार खत्म नहीं कर सकती, इसके लिए महिलाओं को भी आगे आना होगा।

योगी ने कहा कि हम सबके लिए प्रसन्नता का क्षण है कि एक साथ इतनी महिलाओं को सम्मानित करने का अवसर मिला है। पुरस्कार के लिए चयन अपने और पराए के आधार पर नहीं बल्कि उनके अपने-अपने क्षेत्र में किए गए योगदान के आधार पर किया गया है।

मुख्यमंत्री के हाथों से इन्हे मिला सम्मान

मुख्यमंत्री ने जिन्हें पुरस्कार दिया, उनमें लखनऊ की ज्योति श्रीवास्तव, सिंधु व डॉ. जेड एमएस (मऊ), कुंवर दिव्यांश व महजबी (बाराबंकी), पुष्पा व तारा (बहराइच), रीतिका (मेरठ), रीमा सिंह (चंदौली), वर्षा सिंह (बस्ती), रंजना द्विवेदी व अवधेश कुमारी (गोरखपुर), सलिया बानो (फर्रुखाबाद) और शहनाज बानो (वाराणसी) शामिल हैं।

इन्होंने दिखाया साहस

सिंधु- मऊ के दोहरीघाट निवासी सिंधु की 12 साल की बेटी खुशबू पर तेंदुए ने हमला कर दिया। उन्होंने उससे संघर्ष कर अपनी बेटी को बचाया। इस दौरान इन्होंने अपने साहस का परिचय दिया।

वर्षा चौधरी – मेरठ के एक गरीब किसान की बेटी वर्षा ने ओपेन इंडिया इंटरनेशनल बाक्सिंग चैैंपियन शिप में मैरीकॉम से लड़ने के लिए बहुत मेहनत की। पिता सुखबीर सिंह न मजदूरी करके बेटी को रिंग में उतारा।

डा. ज्यूड एमएसजे- फातिमा हॉस्पिटल, मऊ में मुख्य चिकित्सा अधीक्षक हैैं। इन्हें मऊ में मदर टेरेसा के नाम से जाना जाता है। 17 साल से ही अपना जीवन मानवता की सेवा के लिए समर्पित कर दिया।

कुंवर दिव्यांश- बाराबंकी निवासी कुंवर ने एक सांड से मोर्चा लेकर अपनी छोटी बहन की जान बचाई। इन्हें इनोवेशन के क्षेत्र में काम करने के लिए बेस्ट चाइल्ड साइंटिस्ट अवार्ड भी दिया गया।

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