अपने ही करा रहे फजीहत: भाजपा कांग्रेस की बनी मुसीबत

मध्यप्रदेश में पूरी तरह से कांग्रेस एवं भाजपा के बीच ध्रुवीकरण हो चुका है और तीन-चार लोकसभा क्षेत्रों को छोड़कर कहीं भी तीसरी शक्ति इस स्थिति में नहीं है कि वह चुनाव नतीजों को प्रभावित कर पाये। कांग्रेस और भाजपा लोकसभा चुनाव में एक-दूसरे से दो-दो हाथ करने के पूर्व हालात ऐसे बन रहे हैं कि उन्हें पहले अपनों से ही दो-दो हाथ करना पड़ेंगे। यदि बागी समय रहते नहीं संभल पाये तो फिर प्रतिद्वंद्वी के साथ ही उन्हें अपनों से भी चुनावी समर में जूझना पड़ेगा। फिलहाल तो भाजपा के लिए अधिक और कांग्रेस के लिए अपनों को समझाना थोड़ा कम चुनौतियां पेश कर रहा है। आग दोनों ओर अपनों ने ही लगा रखी है और किसका फायर ब्रिगेड इसको बुझाने में असरकारी साबित होगा यही देखने की बात होगी। भाजपा में असंतोष विधानसभा चुनाव में भी देखने को मिला, चूंकि वह समय रहते उस पर नियंत्रण नहीं पा सकी इसलिए डेढ़ दशक की सत्ता उसके हाथों से फिसल गयी।

भाजपा में टिकट वितरण के बाद से जो आपस में घमासान मचा हुआ है वह हर सूची के बाद बढ़ता जा रहा है। खजुराहो में प्रदेश के भाजपा महामंत्री विष्णु दत्त शर्मा (वी.डी.) का जमकर विरोध हो रहा है, हालांकि इससे बेफिक्र वे अपनी चुनावी जमावट करने में भिड़ गये हैं। भाजपा के कुछ नेता बागी होकर ताल ठोंक रहे हैं और यह कुछ समय बाद ही पता चलेगा कि इनमें से कोई चुनावी मैदान में उतरता है या भीतरघात कर अपने असंतोष का शमन कर लेगा। खजुराहो में टिकट वितरण में बाहरी का मुद्दा पहले से ही छाया हुआ है, यदि भाजपाई विरोध कर रहे हैं तो वी.डी. के लिए अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद चट्टान की तरह सुरक्षा कवच बनकर मैदान में आ गया है। हालात यहां तक पहुंच गये हैं कि वी.डी. का नाम सामने आते ही भाजपा के एक खेमे ने उनका पुतला जलाकर विरोध दर्ज कराया। पन्ना जिला सहकारी बैंक के पूर्व अध्यक्ष संजय नागाइच साफतौर पर कह रहे हैं कि पिछली बार नागेंद्र सिंह को टिकट दिया गया था वे भी बाहरी थे और क्षेत्र के विकास से बाहरी प्रत्याशी का कोई लेना-देना नहीं होता, हम स्थानीय प्रत्याशी की मांग पर अड़े हुए हैं और तय किया है कि पांच लोग नामांकन भरेंगे।

सीधी में रीति पाठक का खुलकर विरोध हो रहा है। पूर्व जिलाध्यक्ष लालचंद्र गुप्ता से लेकर सिंगरौली के कुछ पदाधिकारी बागी तेवर अपनाये हुए हैं तो वहीं चुरहट से विधायक और बाद में सीधी से सांसद रहे भाजपा नेता पूर्व समाजवादी गोविंद मिश्रा ने पार्टी से त्यागपत्र देते हुए प्रत्याशी का विरोध करने की ठान ली है। सतना में कांग्रेस और भाजपा दोनों में ही हालात एक जैसे हैं। रश्मि पटेल ने कांग्रेस का दामन थाम लिया है तो मौजूदा दो विधायक ही पार्टी प्रत्याशी का पूरा मनोयोग से साथ नहीं दे रहे हैं। यदि भाजपा का यह हाल है तो कांग्रेस में भी कुछ ऐसा ही आलम है, पूर्व विधानसभा उपाध्यक्ष डॉ. राजेंद्र सिंह के समर्थक उनको टिकट न मिलने से नाराज हैं। बालाघाट में मौजूदा सांसद बोधसिंह भगत बागी हो गए हैं और बतौर निर्दलीय अपना नामांकन भी दाखिल कर दिया है। यहां की स्थिति भी अजीब है, हमेशा चर्चा में बने रहे समाजवादी पार्टी के पूर्व विधायक किशोर समरीते भी चुनाव मैदान में डटे हुए हैं और उन्होंने अजीबोगरीब फरमाइश चुनाव आयोग से की है, उनका कहना है कि या चुनाव आयोग उनके लिए धन सुलभ कराये या फिर एक किडनी बेचने की अनुमति दे ताकि वे चुनावी खर्च उठा सकें।

शहडोल में भाजपा के ज्ञानसिंह नाराज होकर कोपभवन में बैठ गये हैं, उनका दर्द यह है कि कांग्रेस की प्रत्याशी के रुप में हिमाद्री सिंह को उपचुनाव में उन्होंने शिकस्त दी थी और अब उनकी ही टिकट काटकर पार्टी ने हिमाद्री को उम्मीदवार बना दिया। पहले तो वे चुनाव लड़ने के मूड में थे लेकिन पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की समझाइश के बाद चुनाव तो नहीं लड़ रहे लेकिन हिमाद्री का प्रचार करने से इन्कार कर चुके हैं। ज्ञानसिंह के विधायक बेटे शिवनारायण सिंह भी पिता की टिकट कटने से अनमने हैं। राजगढ़ में भाजपा उम्मीदवार रोडमल नागर का विरोध हो रहा है और पार्टी मुख्यालय तक कार्यकर्ताओं ने प्रदर्शन भी किया। मंदसौर में भी सुधीर गुप्ता की उम्मीदवारी को लेकर कुछ नेताओं में नाराजगी है। धार में कांग्रेस और भाजपा दोनों के एक जैसे हालात हैं, कांग्रेस प्रत्याशी का कांग्रेस के ही नेता गजेंद्रसिंह राजूखेड़ी एवं उनके समर्थक और भाजपा उम्मीदवार का विक्रम वर्मा व रंजना बघेल खेमा विरोध कर रहा है। खरगोन में कांग्रेस प्रत्याशी का कांग्रेसी ही विरोध कर रहे हैं तो वहीं दूसरी ओर पूर्व प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अरुण यादव की राह में निर्दलीय विधायक सुरेंद्र सिंह शेरा जो कमलनाथ सरकार को समर्थन दे रहे हैं कांटे बिछाने जैसे तेवर दिखा रहे हैं। धार, खरगोन और झाबुआ में कांग्रेस का समर्थन करने वाला जयस भी कांग्रेस को आंख दिखाने लगा है यहां तक कि कांग्रेस टिकट पर मनावर से विधायक चुने गये डॉ हीरालाल अलावा की मांग है कि उनके संगठन से जुड़े लोगों को धार और खरगोन में टिकट दी जाये अन्यथा जयस विद्रोही तेवर अख्तियार कर सकता है।

सुबह सबेरे से साभार

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