अब कानपुर में 5 हजार करोड़ की बैंक लूट से फैली सनसनी

अखिलेश अखिल

कानपुर: नीरव मोदी द्वारा बैंक लूट की कहानी अभी जहां परवान ही चढ़ रही है वही कानपुर से भी एक बैंक घोटाला की खबरे सामने आ रही है। इस बैंकिंग घोटाले के तार कानपुर के उद्योगपति विक्रम कोठारी से जुड़े हैं। रोटोमैक ग्लेबल कम्पनी के मालिक विक्रम कोठरी इस समय कहां हैं, किसी को नहीं मालूम। इस लूट काण्ड की खानी फैलने के बाद सरकारी बैंकों में हड़कंप मच गया है। अब तक विक्रम कोठारी को ऋण देने वाले सार्वजनिक क्षेत्र के 5 बैंकों के नाम सामने आ चुके हैं। सूची भी मौजूद है कि किस बैंक ने विक्रम पर कितने पैसे लुटाए। इंडियन ओवरसीज बैंक. 1400 करोड़, बैंक ऑफ इंडिया. 1395 करोड़, बैंक ऑफ बड़ौदा. 600 करोड़,यूनियन बैंक 485 करोड़ और इलाहाबाद बैंक. 352 करोड़ के लोन कोठारी को दिए हैं। ये पैसे अभी तक ब्वंक को वापस नहीं मिले। कंपनी बंद है और कोठरी फरार। माना जा रहा है कि इस खेल में कई नेता और बैंक कर्मी शामिल रहे हैं।

बैंकिंग सेक्टर का नंगा सच सामने लाने वाले इस महाघोटाले पर आगे बढ़ने से पहलेे बता दें कि कौन है ये विक्रम कोठारी और क्या है उसका रसूख। विक्रम कोठारी का नाता पान पराग समूह से रहा है। पान मसालों का सरताज रहा यह ब्राण्ड गुजराती परिवार से ताल्लुक रखने वाले मनसुख भाई कोठरी ने 18 अगस्त 1973 को शुरू किया था। सन् 1983 से 1987 के बीच ‘‘पान पराग ’’ विज्ञापन देने वाली सबसे बड़ी कम्पनी बनी। मनसुख भाई के निधन के बाद उनके बेटों दीपक और विक्रम ने बिजनेस को आपस में बांट लिया गया। विक्रम के हिस्से में पेन बनाने वाली कम्पनी रोटोमैक आई। इसके विस्तार के लिए उसने सार्वजनिक क्षेत्र की बैंकों से 5 हजार करोड़ से अधिक के ऋण लिए।

विक्रम के रसूख के चलते बैंकों ने उसे खैरात की तरह लोन बांटे। कागजों में विक्रम की सम्पत्तियों का अधिमूल्यन किया गया। सर्वे में दिवगंत पिता मनसुख भाई कोठारी की साख को भुनाने में कोई कसर नहीं छोड़ी गई। देश के बड़े राजनेताओं के साथ रिश्तों और बाॅलीवुड की मशहूर हस्तियों के ब्राण्ड एम्बेसडर होने से बैंक प्रबन्धन ने भी आंखें मूंद ली और कम्पनी के घाटे को नजरअन्दाज करके ऋण की रकम को हजारों करोड़ में पहुंचने दिया। अब विक्रम की कम्पनी में ताला लग चुका है और उनका कहीं कोई अता-पता नहीं है।

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