अब गुजरात चुनाव पर है सभी की नजर !

नई दिल्ली: हिमाचल में विधानसभा के चुनाव सम्पन्न हो गये, अब गुजरात में विधानसभा चुनाव की तैयारी जोरों पर है ,जहां केन्द्र सरकार की नेतृत्वधारी भाजपा की प्रतिष्ठा दांव पर लगी हुई है । जिसके कारण गुजरात चुनाव विशेष आकर्षण का केन्द्र बन चुका है। वर्तमान प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी एवं भाजपा अध्यक्श अमित शाह का गृह प्रदेश होने एवं इन दोनों के प्रभाव से वर्तमान में भापजा का वर्चस्व पूरे देश में छाये रहने की स्थिति के चलते गुजरात विधानसभा का चुनाव विशेश रूप ले चुका है , जहां पूरे देश की नजर टिकी है। भाजपा की वर्तमान नई आर्थिक नीति नोट बंदी , बैंकीकरण , बढ़ती बेरोजगारी एवं जीएसटी के कारण वर्तमान हालात पूर्व जैसे भाजापा के पक्ष में दिखाई नहीं दे रहे है जिसका प्रतिकूल प्रभाव गुजरात चुनाव पर पड़ सकता है। इस बात को भाजपा भी अब समझने लगी है, इसी कारण गुजरात चुनाव पर अपनी पूरी ताकत झोंक रखी है।

इस चुनाव को प्रधानमंत्री की प्रतिष्ठा के साथ जोड़कर सहानुभूति वोट लेने का प्रयास भी नजर आने लगा है। तभी तो इस बात के संकेत मुख्य रूप से उभर कर सामने आने लगे है जहां सीधे तौर पर कहा जा रहा है कि क्या गुजरात के लोग अपने प्रधानमंत्री को हराना चाहेंगे, कतई नहीं ? जब कि इस चुनाव से प्रधानमंत्री की कोई प्रतिष्ठा नहीं जुड़ी है। पर प्रधानमंत्री नरेन्द्रमोदी का जुड़ाव गुजरात से होने के कारण चुनाव को संवेदनशील बनाने का भी प्रयास जारी है। इस तरह के हालात भाजपा के आतंरिक हलचल को भी दर्षाते है। वर्तमान में हो रहे गुजरात चुनाव के परिणाम आगामी चुनावें को भी प्रभावित करेगें । इसी कारण भाजपा ऐनकेन प्रकारेण गुजरात चुनाव को पूर्व की तरह अपने पक्ष में लाने का भरपूर प्रयास कर रही है।

गुजरात राज्य में विगत 20 साल से भाजपा का शासनकाल चलता आ रहा है जिसमें सर्वाधिक समय वर्तमान प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व का ही रहा है। नरेन्द्र मोदी को प्रधानमंत्री तक पहुंचाने में गुजरात राज्य के विकास के साथ – साथ वहां की जनता की भावना भी सर्वापरि रही है। यह स्वाभाविक भी है । वर्तमान हालात पूर्व जैसे नजर तो नहीं आ रहे है पर गुजरात में तगड़ा विपक्ष भी नजर नहीं आ रहा है। कांग्रेस का शासन भी भाजपा से पूर्व कई वर्षो तक रहा । आज कांग्रेस भी वहां के असंतुष्ट एवं भाजपा विरोधी ताकतों को अपने साथ खड़ा कर अपना पूर्व वजूद कायम करने के प्रयास में प्रयत्नशील नजर आ रही है। कांग्रेस के साथ खड़े गुजरात में हार्दिक पटेल युवा नेता है जिनके विरोधी तेवर भाजपा को नुकसान पहुंचा सकते है। जीएसटी से गुजरात का व्यापारी घराना असंतुश्ट एवं भाजपा से नराज नजर आ रहा है जिसे मनाने की भाजपा भरपूर कोशिश कर रही है। इसी दिशा में केन्द्र सरकार द्वारा जीएसटी की दर में कमी लाना एवं व्यापारी वर्ग को अन्य सहुलियत दिया जाना शामिल है पर इसका प्रभाव गुजरात के असंतुष्ट व्यापारी वर्ग पर कितना पड़ता है, यह तो चुनाव परिणाम ही बता पायेंगे।

गुजरात विधान सभा चुनाव को वर्तमान केन्द्र सरकार की आर्थिक नीतियों से आमजन एवं व्यापारी वर्ग में उभरे असंतोष एवं साथ-साथ वहां की बेरोजगार युवा शक्ति के जनाक्रोश के हालात प्रभावित कर सकते है। गुजरात विधान सभा चुनाव को असंतुष्ट पटेल समुदाय का प्रतिकूल जनमत भी प्रभावित कर सकता है। चुनाव से पूर्व से ही पाटीदार आरक्शण का मुद्दा भी गुजरात राज्य में प्रमुख बना हुआ है जिसे लेकर राजनीति गरमा गई है। इस आंदोलन से जुड़े गुजरात में उभरते नई युवा शक्ति के रूप में हार्दिक पटेल की भूमिका भी विधान सभा चुनाव के परिणाम को प्रभावित कर सकती है। विधान सभा चुनाव तो हिमाचल में भी हुये है पर गुजरात राज्य में उभरी उपरोक्त सभी विशेश परिस्थितियों के चलते गुजरात चुनाव पर सभी की नजरें टिकी हुई है। जहां सौदेबाजी युक्त राजनीति तालमेल का गणित भी शुरू हो गया है।

देश की अवाम बाजार में ताक झांक करती है और बाजार आम आदमी से बाहर होता जा रहा है। देश में दिन पर दिन बढ़ती जा रही महंगाई,,पनपते भ्रश्टाचार एवं घटते रोजगार के संसाधन, अशांत एवं असुरक्शित होते जा रहे परिवेश, राजनीति में उभरते दागी नेतृत्व आदि आम जन मानस पर प्रतिकूल प्रभाव डाल रहे है, जिससे जुड़े प्रसंग राजनीति परिवर्तन के कारण बनते जा रहे है। जिसे नकारा नहे जा सकता। केन्द्र की वर्तमान सरकार की अभी तक रोजगार देने के कोई ठोस योजना सामने नजर नहीं आ रही है। जिसे देश का युवा वर्ग स्वीकार करे । वर्तमान सरकार की योजना में भी कहें से भी आमजन को राहत नजर नहीं आ रही है। टैक्स के दायरे बढ़ते जा रहे है , जहां समाधान नहीं जटिलताएं नजर आ रही है। बैंक भी आम आदमी की जेब से बाहर होता जा रहा । इस तरह के हालात गुजरात चुनाव को प्रभावित कर सकते है।

जैसे -जैसे गुजरात चुनाव तिथि नजदीक आती जा रही है राजनीतिक सरगर्मियां तेज हो चली है। जहां देश का पूरा विपक्श भाजपा के सामने खड़ा है। जब कि एक समय देश का पूरा विपक्श भाजपा के साथ कांग्रेस के विरोध में खड़ा हुआ करता था । आज राजनीतिक परिदृश्य बदल गया है। इस तरह के हालात लोकतंत्र में बदलते रहते है । फिर बदलेंगे । इसी तरह के हालात में वर्तमान गुजरात चुनाव होने जा रहे है । भले गुजरात विधानसभा चुनाव संवेदनशीलता के कारण फिलहाल भाजपा के पक्श में चले जाय पर वहां के परिणाम पूर्व के भॉति नजर नहीं आ रहे है। यदि चुनाव परिणाम पूर्व की भॉति भाजपा के पक्श में नहीं रहते तो भाजपा के लिये विचारणीय है। इस तरह के उभरते परिदृश्य भाजपा की वर्तमान नीतियों पर ठोस मोहर लगायेंगे जहां देश में होने वाले आगामी चुनाव भी प्रभावित हो सकते है। इसी कारण गुजरात विधानसभा के चुनाव विशेश दिख रहे है जहां पूरे देश की नजर टिकी है।

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