अब निजी नलकूपों के कनेक्शन को किसानों का नहीं होगा उत्पीड़न, नई व्यवस्था लागू

लखनऊ ब्यूरो। उत्तर प्रदेश में निजी नलकूपों के कनेक्शन के लिये अब किसानों का अनावश्यक उत्पीडऩ नहीं होगा। पावर कारपोरेशन ने कनेक्शन स्वीकृत करने की प्रक्रिया को बदलकर नयी व्यवस्था बना दी है। इससे बिजली विभाग के कर्मचारियों की मनमानी भी नहीं चल पायेगी।

ऊर्जा विभाग के प्रमुख सचिव एवं उप्र पावर कारपोरेशन के अध्यक्ष आलोक कुमार ने गुरुवार को बताया है कि पूर्व में वितरण खण्डों में स्टीमेट की धनराशि को जमा करने की तिथि को ही प्राथमिक तिथि माना जाता था लेकिन नयी व्यवस्था के तहत अब उपभोक्ता द्वारा निजी नलकूपों के संयोजन प्राप्ति हेतु प्रोसेसिंग फीस जमा करने की तिथि को ही वरीयता क्रम की प्राथमिकता की तिथि मानी जायेगी। यह मात्र 100 रूपये होती है।

उन्होंने बताया कि इस नयी व्यवस्था से विद्युत विभाग के कार्मिकों द्वारा किसानो के उत्पीडऩ की सम्भावना खत्म हो गयी है। अब किसान तीन महीने के अन्दर जब भी स्टीमेट जमाकर देगा प्रोसेसिंग फीस के आधार पर उसकी प्राथमिकता तय होगी। प्रोसेसिंग फीस जमा करने के बाद यदि वह तीन माह के अन्दर स्टीमेट नहीं जमा करता है तो उसकी प्राथमिकता खत्म हो जायेगी और उसे पुन: प्रोसेसिंग फीस जमा करनी होगी।

प्रमुख सचिव ऊर्जा ने बताया कि मुख्य मंत्री एवं ऊर्जा मंत्री किसानों को अधिक से अधिक सुविधा देना चाहते हैं तथा निजी नलकूपो के माध्यम से प्रदेश की सिंचाई क्षमता को बढ़ाना चाहते हैं। इसीलिये यह नये नियम बनाये गये हैं। इस नये नियम से प्रदेश के किसानों को निजी नलकूपों के लिये विद्युत कार्यालयों के अनावश्यक चक्कर एवं शोषण से मुक्ति मिलेगी। इसी के साथ निजी नलकूपों के संयोजनों को अवमुक्त करने हेतु प्राक्कलन में लगने वाले सुपरवीजन चार्जेज तथा जीएसटी भी अब नहीं लगेगी।

आलोक कुमार ने बताया कि निजी नलकूप वाले किसानों की सुविधा के लिये पावर कारपोरेशन ने कई और घोषणायें भी की है, जो किसान अपना विद्युत बिल हर महीने रेग्यूलर जमा करेंगे उनको बिल पर पॉच प्रतिशत की छूट मिलेगी। इसी तरह यदि किसान किसी कारण से बिल जमा करने में विलम्ब करता है और वर्ष में दो बार ही विद्युत बिल जमा कर पाता है तो भी उसको लेट शुल्क नहीं देना होगा।

प्रमुख सचिव ऊर्जा का कहना है कि यह व्यवस्था किसानों द्वारा फसल होने पर आर्थिक उपलब्धता को दृष्टिगत करके लागू की गयी है। वित्तीय वर्ष (2018-2019) में प्रत्येक 06 माह के बिल का भुगतान अर्थात् माह अप्रैल 2018 से माह सितम्बर 2018 तक के बिल की पूर्ण राशि का भुगतान माह नवम्बर 2018 के अन्त तक तथा अक्टूबर 2018 से माह मार्च 2019 तक के बिल की पूर्ण राशि का भुगतान माह मई 2019 के अन्त तक करने पर उक्त 06 माह की अवधि के बिल राशि पर लगे सरचार्ज को पूर्ण रूप से माफ कर दिया जायेगा।

यदि उपभोक्ता द्वारा उपरोक्तानुसार निर्धारित अवधि में बिल का भुगतान नहीं किया जाता है तो उपभोक्ता से उक्त अवधि का नियमानुसार पूर्ण सरचार्ज वसूला जायेगा। इससे प्रदेश के 11 लाख कृषक उपभोक्ताओं को लाभ होगा। निजी नलकूप उपभोक्ता को प्रदत्त एस्टीमेट की वैधता अवधि टीसी के कार्यालय ज्ञापन जारी होने की तिथि से 90 दिन होगी। इसके पश्चात् उपभोक्ता को पुन: आवेदन कर प्रोसेसिंग चार्ज जमा कराना होगा।

उपभोक्ता द्वारा एस्टीमेट की धनराशि जमा करने पर वरीयता क्रम में प्रथम प्रोसेसिंग फीस जमा करने वाले उपभोक्ता को पूर्ण सामग्री (उपलब्धता के आधार पर) निर्गत की जायेगी। इस प्रकार तैयार होने वाली वरीयता सूची खण्डीय नोटिस बोर्ड पर तथा सामग्री निर्गत कराने हेतु भण्डार केन्द्र को प्रेषित की जायेगी।

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