अब मोदी की नजरें महिलायें और मिलेनियम बच्चों पर

एक बार कोई सरकार में आ जाए तो जाना कौन चाहता ! जो जाते हैं उनसे जाकर पूछिए तो पता चलेगा कि सत्ता का सुख क्या है ? आधुनिक जमीन्दारी कहिये या फिर राज शाही। भला इस धरती पर आकर इस महासुख को कौन त्याग पाना चाहता है ? कोई भी तो नहीं। यही वजह है कि प्राण निकलते वक्त भी सत्ता का स्वाद चखे लोगों को राजनीति करने और राजनीति में बने रहने का मोह ख़त्म नहीं होता। कितने आये और चले गए और आगे भी यही सिलसिला चलता रहेगा लेकिन ठगिनी राजनीति से मुक्ति किसे ? जो एक बार इसके मोह में फस जाय उसका इस जाल से निकलना आसान नहीं। भगवान् की चर्चा सबसे ज्यादा राजनेता ही करते हैं लेकिन राजनीति के कटते ही उनकी चर्चा गायब सी हो जाती है। बूढ़े शरीर को सम्हाले या राम गुण गाये ! राजनीति का सच यही है कि जबतक प्राण ,तबतक ध्यान। शरीर में जान रहने तक कुर्सी की चिंता सताये रहती है। कुर्सी पर बैठकर जनता का अलाप करने का जो सुख है वह तो स्वर्ग में भी नहीं। यही वजह है कि तमाम आरोप प्रत्यारोप के बावजूद भी राजनीति सबको आकर्षित करती है। राजनीति में त्याग कहाँ ? सबके सब बगुला भगत ही तो हैं।एको अहम् द्वितीय नाश्ति।

तो 2014 में हुए लोक सभा चुनाव में बाजी मारी बीजेपी अब अगले चुनाव की तैयारी में जुटी है। चार साल जो गुजर गए। वादे बहुत किये गए थे। कुछ पुरे हुए कुछ बाकी रहे। जो वादे नहीं थे वे कुछ ज्यादा ही हुए। तब नए चेहरे के रूप में मोदी अवतरित हुए थे। लोगो में आशा थी कि उनके दिन बहुरेंगे। लेकिन चार साल में कुछ बदले क्या ? 2014 से 2018 में कोई अंतर आया क्या ? कुछ भी तो नहीं। जो कल भी गरीब थे ,आज भी उसी हालत में हैं। जो कल तक बेकार थे ,आज भी बेकार हैं। जो कल तक बीमार थे आज भी बीमार ही तो है। और जो कल भी आमिर थे आज भी महा अमीर बने हुए हैं। फिर बदला क्या ? बदला यही कि जनता की आशा जैसे ही मोदी सरकार पर टिकी पुरे भारत में बीजेपी पहुँच गयी। भले ही जनता की आस टूट गयी हो। लेकिन राजनीति तो चलती रहेगी। सरकार पर जनता और विपक्ष जो भी इल्जाम लगाए ,बीजेपी फिर चुनाव जितने का प्रयास तो करेगी ही जैसे कि कांग्रेस करती रही है। ऐसे में बीजेपी की नजर अब किसी और वोट पर टिकी है। उसे पता है कि आगामी चुनाव में जिसने उसे वोट दिया था उसमे से बहुत सारे लोग अब बीजेपी को वोट नहीं देंगे। लेकिन चुनाव जितना है तो मया कही और तो फैलाना पडेगा ना ?

इसलिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की नजर अब तीन वोट बैंक पर ज्यादा टिकी है। इसे सहलाने की कोशिश भी जारी है। एक वोट बैंक तो वह है जो मिलेनियाँ बच्चे हैं। जिनका जन्म इसी सदी में हुआ है। 10 -12 करके 18 साला होकर इस मायावी संसार में जो कदम रखने जा रहे हैं। इनकी बड़ी आवादी है ,करोड़ो की ।ये निष्कपट हैं मोह माया से अलग। इनको प्रभावित जल्द ही किया जा सकता है। पीएम मोदी ने इन पर पहला बाण चला रखा है। इस वर्ग पर प्रधानमंत्री लगातार नजर रखे हुए हैं। उन्होंने रेडियो पर मन की बात कार्यक्रम में उनको बधाई दी और उनके साथ खुद को जोड़ने का प्रयास किया। उन्होंने परीक्षा के बारे में उनको सलाह दी और जीवन के संघर्षों का सामना करने के उपाय भी उनको बताए। तनावों से कैसे मुक्ति पाएं इसके भी उपाय खुद प्रधानमंत्री ने उनको बताए। दसवीं और 12वीं की बोर्ड परीक्षाओं से पहले प्रधानमंत्री ने दिल्ली के तालकटोरा स्टेडियम में बच्चों को परीक्षा से पहले और परीक्षा के दौरान तनाव से दूर रहने के उपाय सिखाए।

इस कार्यक्रम का टेलीविजन पर सीधा प्रसारण हुआ और देश भर के स्कूलों में इसे दिखाया गया। करोड़ों बच्चों से प्रधानमंत्री सीधे जुड़े। प्रधानमंत्री ने बच्चों के लिए एक्जाम वारियर नाम से एक किताब भी लिखी है, जिसमें उनको कई तरह के टिप्स दिए गए हैं। उन्होंने बच्चों को सलाह दी है कि वे एक्जाम वारियर बने। सरकार के मंत्री भी इस किताब के प्रचार में जुटे हैं। बता दें कि पीएम की नजर एनसीसी कैडेट पर भी है। प्रधानमंत्री मोदी और भाजपा अध्यक्ष अमित शाह की निगाहें एक दूसरे बड़े वोट बैंक पर है, जो महिलाओं का है। यह आम धारणा है कि मोदी से महिलाओं का मोहभंग नहीं हुआ है। यह भी चर्चा है कि सरकार महिला आरक्षण विधेयक को आगे बढ़ाने के मूड में हैं। अगर यह पहल हुई तो उसका फायदा भाजपा को होगा। तीसरा वर्ग सरकारी कर्मचारियों का है। सरकार ने उनके लिए खजाना खोला है। हालांकि सातवें वेतन आयोग की सिफारिशों को लेकर यह वर्ग नाराज था, पर सरकार ने उसके बाद उनको मनाने के कई उपाय किए हैं। पिछले दिनों महंगाई भत्ता दो फीसदी बढ़ाया गया और अब सरकार कर मुक्त ग्रेच्युटी की सीमा बढ़ कर दस से 20 लाख रुपए कर दी है।

अगर इस वोट बैंक पर बीजेपी ने माया फैला दिया तो समझिये विपक्ष को फिर से पानी पीने के अलावा कुछ नहीं मिलेगा। विपक्ष जहां आपसी जातीय खेल में ही फसी है वही बीजेपी के कारिंदे वोटबैंक की तलाश कर रहे हैं।

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