अब शुरू हुई बाल दिवस से चाचा नेहरू का नाम हटाने की राजनीति

दिल्ली ब्यूरो: जैसे-जैसे लोकसभा चुनाव नजदीक आ रहे हैं वोट बैंक की चिंता में लगी सियासी पार्टियां अलग-अलग राग अलापने में जुट गयी हैं। मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह साधू समाज को राजनीति से जोड़कर वोट की राजनीति करते दिख रहे हैं तो दिल्ली के सांसद प्रवेश वर्मा एक नयी राजनीति को लेकर सामने प्रकट हुए हैं। बीजेपी सांसद प्रवेश वर्मा ने प्रधानमंत्री मोदी को चिट्ठी लिखकर बाल दिवस से भारत के पहले प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू के नाम को हटाने की मांग की है।

प्रवेश वर्मा का कहना है कि बाल दिवस पंडित नेहरू के जन्मदिन की बजाय गुरु गोविंद सिंह के बच्चों की कुर्बानी के दिन के रूप में मनाया जाना चाहिए। बीजेपी सासंद का कहना है कि सिखों के दसवें गुरु गोविंद सिंह के बेटों ने देश के लिए अपने प्राण न्यौछावर किए थे, इसलिए बच्चों को उनकी कहानी पढ़ाई जानी चाहिए।

बीजेपी सांसद का कहना है कि गुरु गोविंद की जीवनी और उनके संघर्ष की कहानी पढ़ाए जाने से बच्चों में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होगा। उन्होंने कहा कि गुरु गोविंद सिंह की कहानी जानने से बच्चों को प्रेरणा मिलेगी। पीएम मोदी को प्रवेश वर्मा की ओर से लिखी गई चिट्टी में 100 सांसदों के हस्ताक्षर हैं। उन्होंने दावा किया है कि देश के 100 सांसद उनकी बात से सहमत हैं और उन्होंने बिना किसी दवाब के उनकी चिट्ठी पर हस्ताक्षर किये हैं।

बीजेपी सांसद ने सुझाव देते हुए लिखा है कि पूर्व प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू के जन्मदिन को “चाचा दिवस” के तौर पर मनाया जाना चाहिए। कयास लगाए जा रहे हैं कि शुक्रवार को होने वाली बीजेपी की बैठक में प्रवेश वर्मा, पीएम मोदी को अपनी चिट्ठी सौंप सकते हैं। इस तरह की राजनीति पर वार भी होंगे और कांग्रेस इस पर चुप नहीं रहेगी लेकिन इतना तो तय है कि चाचा नेहरू के नाम से शुरू यह राजनीति सिख वोट बैंक को बीजेपी से जोड़ने के रूप में देखा जा है। आगे देखना बाकी है कि यह राजनीति कहाँ तक चलती है और उसके क्या परिणाम सामने आते हैं।

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