अब होगी बीजेपी को घेरने की तैयारी

यह बात और है कि यूपी-बिहार में हुए उपचुनाव के मतगणना अभी जारी है लेकिन जिस तरह के ट्रेंड दिख रहे हैं उससे साफ़ लगता है कि बीजेपी के प्रति लोगों में गुस्सा है और गठबंधन की तरफ आशा भरी नजरों से जनता देख रही है। यूपी के दोनों सीट गोरखपुर और फूलपुर से बीजेपी काफी पीछे चल रही है जबकि सपा के उम्मीदवार आगे हैं। उधर बिहार के अररिया लोकसभा और जहानाबाद विधान सभा सीट पर राजद काफी मतों से आगे है जबकि भभुआ सीट पर बीजेपी बढ़त बनाये हुए है।

रूझानों के मुताबिक, यूपी के दोनों ही सीटों पर भाजपा हारती नजर आ रही है। गोरखपुर सीट योगी आदित्यनाथ के कारण और फूलपुर सीट यूपी सरकार में योगी के डिप्टी केशव प्रसाद मौर्य के कारण खाली हुई थी। भाजपा यहां हार रही है, यानी सपा और बसपा के हाथ मिलाने की रणनीति काम कर गई।अब सवाल उठेंगे कि क्या जो प्रयोग सपा और बसपा ने किया, उसे राष्ट्रीय राजनीति में आजमाया जा सकता है। भाजपा और मोदी को रोकने के लिए थर्ड फ्रंट की तेजी से उठती आवाज को समर्थन मिल सकता है।

क्षेत्रीय दल तो कम से कम यही उम्मीद लगा सकते हैं कि थर्ड फ्रंट 2019 में उन्हें कामयाबी दिला सकता है। कांग्रेस की जो स्थिति है, उसे देखते हुए राजनीतिक पंडित 2019 में ‘क्षेत्रीय दल बनाम भाजपा’ का मुकाबला देख रहे हैं। सपा और बसपा के गठबंधन के कारण अन्य राज्यों के दलों की भी इन चुनावों पर नजर थी। जब वोटों की गिनती जारी थी और भाजपा हार रही थी, तब ही जम्मू-कश्मीर में बैठे नेशनल कॉन्फ्रेंस के नेता उमर अब्दुल्ला ने ट्वीट किया था कि कम ऑन गोरखपुर-फूलपुर, यू केन डू इट।

यूपी में हार का सीधा असर योगी आदित्यनाथ पर पड़ेगा। प्रदेश विधानसभा में उनके काम पर सवाल उठेंगे। नरेंद्र मोदी और अमित शाह की जोड़ी पर भी सवाल उठेंगे। भाजपा के लिए इन परिणामों के मायने साफ हैं कि यदि 2019 से पहले विपक्षी दल मिलते हैं तो उसके लिए सत्ता बचाना मुश्किल हो सकता है। सबसे बड़ा झटका यहां योगी आदित्यनाथ को लगता दिख रहा है जबकि बिहार में नीतीश और मोदी की राजनीति पर सवाल उठने शुरू हो गए हैं।

यह बात और है कि दोनों राज्यों के इस उपचुनाव में कांग्रेस की हालत कमजोर ही देखी जा रही है लेकिन यह साफ़ हो गया है कि अगर सारे विरोधी मिलकर 2019 में उतरे तो बीजेपी की विस्तारवादी राजनीति को रोका जा सकता है। बिहार के परिणाम लालू की राजनीति को आगे बढ़ाती दिखा रही है। लालू के प्रति लोगों में आज भी उम्मीद कायम है जबकि माना जा रहा था कि जेल जाने के बाद लालू और राजद की राजनीती समाप्त हो जायेगी। ऐसे में यह चुनाव परिणाम अगले लोकसभा चुनाव के लिए विपक्षी एकता की तरफ अग्रसर करने के लिए काफी है।

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