अभी भी बड़ी संख्या में जवान तैनात, लद्दाख टकराव के बाद LAC पर माहौल तनावपूर्ण

नई दिल्ली: पूर्वी लद्दाख की गलवान घाटी में सप्ताहभर पहले हुए भारत और चीनी सैनिकों के बीच हिंसक टकराव के बाद 3,488 किलोमीटर लंबी वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर माहौल अभी भी तनावपूर्ण बना हुआ है। दोनों देशों की सेनाएं सीमा पर मुस्तैद हैं। वायुसेना और नौसेना को भी किसी भी हालात से निपटने के लिए स्टैंडबाय पर रखा गया है।

भारत-चीन सीमा की मौजूदा स्थितियों को जानने वाले लोगों ने बताया कि यूं तो गलवान घाटी की झड़प के बाद स्थिति और खराब नहीं हुई है, लेकिन चीन की पीपुल्स लिब्रेशन आर्मी (चीनी सेना) की तैनाती में बढ़ोतरी आई है। वहीं, झिंजियांग और तिब्बत क्षेत्र में चीनी सेना के निर्माण के बाद भारतीय सेना की मौजूदगी भी वहां बढ़ी है।

अधिकारियों ने बताया कि दोनों ओर की वायुसेना भी एक दूसरे पर लगातार नजर बनाए हुए है। एक अधिकारी ने नाम न प्रकाशित करने की शर्त पर बताया कि भारतीय सैन्य कमांडर ने जवानों को निर्देश दिया है कि यदि चीनी सैनिक भारतीय पेट्रोल पोस्ट 14 पर हमला करने के लिए गलवान नाला पार करते हैं तो फिर बल का प्रयोग किया जाए। उन्होंने कहा, ‘गलवान नाले के पार चीन ने भी अपने जवानों को तैनात किया है।’

भारत और चीन सैनिकों के बीच में जमीनी स्तर पर हालात 16 जून की तुलना में कुछ अलग नहीं हैं। दोनों सेनाओं ने कमांडर स्तर की छह जून को हुई वार्ता पर बनी सहमति को भी किनारे रख दिया है। भारतीय सेना के वरिष्ठ कमांडर अक्साई चिन इलाके में चीनी सेना की गतिविधियों को देख रहे हैं। वहीं, विदेश मंत्रालय मामले को कूटनीतिक स्तर पर भी सुलझाने की कोशिश कर रहा है। एक वरिष्ठ राजनयिक ने कहा, ‘स्थिति में कुछ हद तक शांति आई है, लेकिन गलवान घाटी में चीन ने जो पॉजिशन बनाई हुई है, उससे डी-एस्केलेशन में अभी समय लग सकता है।’

वहीं दूसरी ओर, सेना से जुड़े कई महत्वपूर्ण लोग दोनों देशों की सोशल मीडिया पर जारी आक्रमकता के स्तर से हैरान हैं। पूर्व सेनाध्यक्ष कहते हैं कि जो युद्ध से बदला चाहते हैं, उन्हें इस बारे में कोई जानकारी नहीं है कि दोनों ही देश एक परमाणु हथियार वाले देश हैं और अगर युद्ध होता है तो कितना बड़ा नुकसान उठाना पड़ सकता है।

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