अमित शाह जी! लिंगायत मठ ने तो आपको अच्छी राजनीति सिखाई

कभी कभी कद्दावर नेताओं की भी राजनीति चूक जाती है। नहले पे दहले की कहावत राजनीति में काफी लोकप्रिय है। सेर पर सवा सेर वाली कहावत भी लोग खूब जपते हैं। बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह कर्नाटक गए चुनाव प्रचार करने। दो गलती कर बैठे। उनकी एक गलती तो यह हुयी कि भ्रष्टाचार पर बहस करते-करते अपनी पार्टी के मुख्यमंत्री उम्मीदवार यदुरप्पा को सबसे बड़ा भ्रष्टाचारी कह गए। उनका इशारा वर्तमान मुख्यमंत्री सिद्धरमैया की तरफ था, लेकिन बात पलट गयी। प्रेस वार्ता में बैठे पत्रकार भी भौंचक्के हो गए। शाह जी भी शरमा गए। बाद में उनकी बड़ी फजहत भी लोगों ने की। कुछ इसी तरह की फजीहत कई बार राहुल गांधी को भी झेलना पड़ा है। हालिया वह घटना तो खूब सुर्खियां बनी जब राहुल गांधी एनसीसी कैडेट के सामने भाषण दे रहे थे और एक कैडेट ने एनसीसी से जुडी कोई तकनीकी जानकारी पर उनकी राय जानने की कोशिश की थी। राहुल नहीं बता पाए थे। लेकिन अमित शाह का बयान राहुल जैसा नहीं था। साफ़ है कि येदुरप्पा के लिए आगे काफी मुश्किल होगी। और वह इसलिए भी कि वह भ्रष्टाचार के कई मामलों में आरोपी में रहे हैं।

बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह कर्नाटक पहुंचे थे कांग्रेस की राजनीति को जमींदोज करने। प्रदेश कांग्रेस सरकार ने लिंगायत समाज को अल्पसंख्यक का दायरा देने का ऐलान किया था और कानून भी बनाया। बीजेपी को यह पसंद नहीं आया। शाह चुकी राजनीति के चतुर खिलाड़ी है ,सीधे पहुँच गए लिंगायत समाज के सबसे बड़े मठ के महंत से मिलने। उनको नमन किया, सर झुकाये, हाथ जोड़े और लिंगायत समाज पर कांग्रेस के खेल की चर्चा की। कहा ऐसे में तो हिन्दू समाज बंट जाएगा। यह सब हिंदुयों को बांटने का खेल है। मठ के महंत शिवमूर्ति सब ध्यान से चुप्पी मारे सुनते रहे। कुछ बोले नहीं।

शाह जी को लगा कि उनका दांव कारगर होगा। लेकिन हो गया उलटा। लिंगायतों के बड़े मठ चित्रदुर्ग मठ के महंत शिवमूर्ति मुरुघा शरानारु ने अमित शाह को एक पत्र लिखा है। पत्र में कहा है कि लिंगायत को अल्पसंख्यक का दर्जा देने से समुदाय के युवाओं का लाभ मिलेगा। इससे समुदाय के अन्य लोगों को भी लाभ होगा। उन्होंने लिखा है कि यह कदम समुदाय को बांटने के लिए नहीं उठाया गया है, बल्कि यह लिंगायतों की उपजातियों को संगठित करने के लिए किया गया प्रयास है। महंत शिवमूर्ति का यह पत्र अब शाह जी को भारी पड़ गया है। अब आगे की राजनीति क्या हो और कैसे लिंगायत समाज को अपने पाले में किया जाय इसपर रणनीति बीजेपी बना रही है।

बता दें कि भाजपा ने कर्नाटक में लिंगायत नेता वीएस येदुरप्पा को मुख्यमंत्री पद का उम्मीदवार बनाया है। लिंगायत समाज से ही आने वाले येदुरप्पा पहले भी कर्नाटक में भाजपा की पहली सरकार का नेतृत्व कर चुके हैं और विवादों के कारण उन्हें पद छोड़ना पड़ा था। अब बीजेपी येदुरप्पा पर कितना भरोसा कर पायेगी यह देखने वाली बात होगी।

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