अयोध्या विवाद: भारतीय पुरातात्विक सर्वेक्षण की रिपोर्ट को लेकर मुस्लिम पक्ष को झटका

नई दिल्ली: उच्चतम न्यायालय ने अयोध्या विवाद की सुनवाई के 31वें दिन आज भारतीय पुरातात्विक सर्वेक्षण (एएसआई) की रिपोर्ट पर मुस्लिम पक्षकार की आपत्तियों पर सवाल खड़े किए। मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई, न्यायमूर्ति एस ए बोबडे, न्यायमूर्ति डी वाई चंद्रचूड़, न्यायमूर्ति अशोक भूषण और न्यायमूर्ति एस अब्दुल नजीर की संविधान पीठ ने कहा, एएसआई की रिपोर्ट को लेकर जो आपत्ति आप यहां उठा रहे हैं, आपने ट्रायल के दौरान ये बातें कही नहीं। न्यायमूर्ति गोगोई ने कहा कि इस मुद्दे पर मुस्किल पक्षकार की दलीलें भी जोरदार और ठोस नहीं हैं, क्योंकि न्यायालय ऐसे मुद्दे पर जब विशेषज्ञों की कोई समिति बनाती है तो उसमें कोई भी कमी या गलती हो तो या तो अदालत उस बारे में बताए या फिर पक्षकार बताएं। तभी विशेषज्ञ उसका जवाब दे सकते थे।

मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि इस रिपोर्ट को लेकर उस समय ऐसा कुछ नहीं हुआ था। मुस्लिम पक्षकारों की ओर से एएसआई की रिपोर्ट पर वरिष्ठ अधिवक्ता मीनाक्षी अरोड़ा आपत्तियां जता रही थीं, जो सुनवाई के दौरान अदालत के संज्ञान में नहीं लाई गईं थी। न्यायमूर्ति गोगोई ने कहा, पुरातत्व विभाग के अधिकारियों की रिपोर्ट कोर्ट कमिश्नर के तौर पर प्रक्रिया के अनुरूप थी, इस पर आपकी कोई आपत्तियां जायज नहीं हैं, क्योंकि पहली अपील में आपने आपत्ति नहीं जताई। सुश्री अरोड़ा ने कहा कि वह इस पर गुरुवार को जवाब देंगी।

इससे पहले सुन्नी वक्फ बोर्ड की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता जफरयाब जिलानी ने संविधान पीठ के समक्ष स्पष्टीकरण दिया कि बोर्ड अभी तक यह नहीं मानता कि राम चबूतरा ही वह जगह हैं जहां राम का जन्म हुआ था। उन्होंने कहा कि इस मामले में उनका भी वही रुख है जो वरिष्ठ अधिवक्ता राजीव धवन का है। जिलानी ने यह स्पष्टीकरण मीडिया के कुछ हिस्सों में प्रकाशित उस रिपोर्ट को लेकर दिया जिसमें कहा गया था कि सुन्नी वक्फ बोर्ड ने भी मान लिया है कि राम चबूतरा ही राम का जन्म स्थान था।

धवन ने इससे पहले कहा था कि वह मानते हैं कि अयोध्या में भगवान राम का जन्म हुआ था, लेकिन कहां वह नहीं बता सकते। वहीं जिलानी ने 1862 की एक रिपोर्ट का हवाला दिया, जिसमें जन्म स्थान को एक अलग मंदिर बताया गया। न्यायमूर्ति बोबड़े ने कहा, उनके गजेटियर में कहा गया है कि राम चबूतरा ही राम का जन्म स्थान है और केंद्रीय गुम्बद से 40 से 50 फुट दूर है। इस पर जिलानी ने कहा कि यह हिन्दुओं का विश्वास है उनका नहीं। न्यायमूर्ति भूषण ने कहा, अंग्रेजों ने इस जगह को दो हिस्सों में बांटा था- अंदरूनी और बाहरी कोटयार्ड। इसलिए उन्होंने बाहरी कोटयार्ड में पूजा करना शुरू किया। जिलानी ने अपनी जिरह पूरी कर ली और उसके बाद एएसआई की रिपोर्टों पर जिरह करने के लिए सुश्री अरोड़ा ने मोर्चा संभाला था।

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