अयोध्या: संघ आर पार के मूड में

लखनऊ ब्यूरो। उच्चतम न्यायालय द्वारा राम जन्म भूमि पर सुनवाई जनवरी तक टाले जाने के बाद राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और उससे जुड़े संगठनों के ताबड़तोड़ कार्यक्रमों से अयोध्या आन्दोलन के एक बार फिर नब्बे के दशक में जाने के कयास लगने शुरू हो गये हैं।

मंदिर निर्माण के लिये संघ आर-पार का मन बना चुका है। संघ ने स्पष्ट कह दिया है कि इसके लिये जरूरत पड़ी तो नब्बे के दशक वाला आन्दोलन फिर खड़ा किया जा सकता है।विश्व हिन्दू परिषद ने 31 जनवरी और 01 फरवरी को प्रयागराज के कुंभ में आयोजित धर्म संसद से पहले 25 नवम्बर को अयोध्या, बेंगलुरु और मुम्बई में बड़ी धर्मसभा जबकि देश के अन्य हिस्सों में 500 धर्मसभायें आयोजित की जायेंगी। इसके अलावा 25 नवम्बर से 10 दिसम्बर तक जागरूकता अभियान चलाया जायेगा।

कार्यक्रमों को धार देने के लिये संघ के सरकार्यवाह सुरेश जोशी उर्फ भैय्याजी जोशी दो दिवसीय दौरे पर आगामी 20 दिसम्बर को यहां आ रहे हैं। वह अयोध्या भी जा सकते हैं हालांकि इसकी अभी पुष्टि नहीं हुई है।

अयोध्या में धर्मसभा को सफल बनाने के लिये विहिप के उपाध्यक्ष चम्पत राय जी-जान से जुटे हैं। उन्होंने आज ही अयोध्या में सतों के साथ बैठक की।  राय कहते हैं कि मंदिर निर्माण में पहले ही काफी देरी हो चुकी है,अब इसमें और देरी बर्दाश्त नहीं की जायेगी । हिन्दू समाज अब किसी भी दशा में देरी नहीं चाहता। 05 दिसम्बर को नई दिल्ली में हिन्दुओं का बड़ा सम्मेलन होगा, जिसमें पांच लाख से अधिक लोगों के आने की सम्भावना है।

गौरतलब है कि 90 के दशक में राम मंदिर आन्दोलन अपने चरम पर था। आन्दोलन की वजह से ही अयोध्या में ढांचे को छह दिसम्बर 1992 को ध्वस्त कर दिया गया था।

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