अयोध्या से रामेश्वरम तक की ‘राम राज्य रथ यात्रा’ के राजनीतिक खेल

अखिलेश अखिल

देश में चाहे जितनी भी परेशानियां हों ,सत्ता -सरकार पर विपक्ष चाहे जितने भी हमलावर हों ,बेरोजगारी को लेकर देश के युवा चाहे कितने भी निराश हों लेकिन राजनीतिक खेल कभी रुकने का नाम नहीं लेता। राजनीति की अपनी गति है और उसके मायने भी। इधर एक तरफ सुप्रीम कोर्ट में अयोध्या विवाद से जुड़े मामलो की सुनवाई जारी है उधर 13 फरवरी से अयोध्या से रामेश्वरम तक 39 दिनों की राम राज्य रथ यात्रा की शुरुआत होने जा रही है। संघ का यह कार्यक्रम चुनावी राज्यों में हिन्दुत्व का सन्देश तो पहुंचाने के साथ ही हिन्दू मिजाज को राम मंदिर के पक्ष में गोलबंद करने को लेकर। यह कार्यक्रम चुनावी राज्यों को कुछ ज्यादा ही प्रभावित करेगा। जानकारी के मुताविक 39 दिनों की इस यात्रा के दौरान लगभग 40 सार्वजनिक बैठकें करने की योजना है। ज़ाहिर है यह रथयात्रा इस साल कई राज्यों में होने वाले विधानसभा चुनावों और अगले साल होने वाले लोकसभा चुनावों ध्यान में रखकर की जा रही है।

‘राम राज्य रथ यात्रा’ के नाम से आयोजित की जा रही इस यात्रा को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ अयोध्या के कारसेवकपुरम स्थित विश्व हिंदू परिषद के मुख्यालय से रवाना करेंगे। यात्रा की शुरूआत के लिए चुनी गई यह जगह सिर्फ इसीलिए महत्वपूर्ण नहीं है कि यहां वीएचपी का मुख्यालय है, यह इसलिए भी महत्वूपूर्ण है क्योंकि यहीं वह कार्यशाला भी है जहां पिछले कई सालों से राममंदिर के लिए पत्थरों को तराशने का काम चल रहा है। अयोध्या में इस यात्रा की तैयारी का ज़िम्मा आरएसएस की दो सहयोगी संस्थाएं – विश्व हिंदू परिषद और मुस्लिम राष्ट्रीय मंच – पर है। मुस्लिम राष्ट्रीय मंच के अवध क्षेत्र के संयोजक अनिल कुमार सिंह बताते हैं, ‘यात्रा कि लिए इस्तेमाल होने वाला रथ बिलकुल राममंदिर के मॉडल पर बन रहा है।

आपको बता दें कि 13 तारीख को पहले कारसेवकपुरम में संत सम्मेलन का आयोजन किया जाएगा उसके बाद मुख्यमंत्री योगी यात्रा को रवाना करेंगे। उत्तर प्रदेश और तमिलनाडु के अलावा यह यात्रा चार अन्य राज्यों – मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, कर्नाटक और केरल – से होकर गुज़रेगी। इस यात्रा को निर्बाध जारी रखने के लिए केंद्रीय गृह मंत्री ने सभी प्रदेशों के वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों को पत्र लिखकर सभी ज़रूरी कदम उठाने की ताकीद की है। राममंदिर को एक बार फिर चुनावी मुद्दे की तरह इस्लेमाल किया जाएगा, यह तभी साफ हो गया था जब उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में बीजेपी की बड़ी जीत के बाद गोरखधाम मंदिर के महंत योगी आदित्यनाथ को प्रदेश के मुख्यमंत्री का पद सौंप दिया गया था। सत्ता में आने के कुछ ही महीनों के भीतर योगी आदित्यनाथ ने अयोध्या में सरयू नदी के किनारे राम की 100 मीटर ऊंची प्रतिमा बनवाने का ऐलान कर दिया था।

गौरतलब है कि वीएचपी इस यात्रा को सफल बनाने में बड़ी भूमिका निभाने वाली है। विहिप के महासचिव चंपत राय ने संस्था के कार्यकर्ताओं और पदाधिकारियों को पत्र लिखकर आग्रह किया है कि वे यात्रा मार्ग में होने वाली सार्वजनिक बैठकों को आयोजित करने में भरसक मदद करें। आपको बता दें कि इधर पिछले ६ साल से अयोध्या विवाद का मामला कोर्ट में है और अब खुद सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा की अगुवाई में इस मामले की सुनवाई चल रही है। इसके अलावे सामाजिक स्तर पर भी मामले को सुलझाने की कोशिश जारी है। देखना यह है कि जिस तरह से जिस तरह से राम राज्य रथ यात्रा शुरू हो रही है ,उसके सन्देश देश को क्या मिलते हैं और मंदिर निर्माण को लेकर क्या रणनीति बनती है।

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