आई आई टियन्स की नवऊर्जा और तकनीकी से ग्रामीण स्कूली शिक्षा को सुधारने का मॉडल

कानपुर आज, प्रो अभय करंदीकर (निदेशक, आई आई टी कानपुर) और डॉ राजशेखर (मंडलयुक्त) ने श्री राम जानकी इंटर कॉलेज बिठूर मे स्मार्ट क्लास का अनावरण किया। एक नए प्रयोग में, IITians ग्रामीण स्कूली बच्चों के लिए लाइव ऑनलाइन कक्षाओं की पेशकश करने के लिए एक साथ आए हैं। बच्चे अपनी कक्षाओं में जो सीख रहे हैं उसे बढ़ाने के लिए स्कूल समय के बाद कक्षाएं लगाई जाती हैं। आईआईटी कानपुर के विद्यार्थी और स्कूल की स्मार्ट कक्षाओं में इकट्ठा बैठे बच्चे आपस में लगातार संवाद करके पढ़ाई करते हैं। इस तकनीकि से बच्चे शिक्षक और बोर्ड को प्रॉजेक्टर के जरिये देख पाते है व शिक्षक भी कक्षा मे बैठे बच्चों को देखने में सक्षम होते हैं, और इस प्रकार दोनों ही एक वास्तविक कक्षा के वातावरण जैसा अनुभव कर पाते है।

रीता सिंह जो इस कार्यक्रम का संचालन कर रही हैं ने बताया कि शिक्षण के इस मिश्रित तरीके में, पढ़ाने वाले आई आई टीयन्स और स्कूली बच्चों प्रायः मिलते हैं और विज्ञान के प्रयोग भी करते हैं। अनुभवी अध्यापकों और प्रोफेसर लोगों के मार्गदर्शन में कार्यक्रम मे कंटैंट और प्रयोग विकसित किया जा रहा है। इस कार्यक्रम को सुचारु रूप से संचालित करने के लिए स्कूग्लिंक ऐप का प्रयोग भी किया किया गया है। अध्यापकों द्वारा लिखे ब्लैकबोर्ड नोट्स और व्याख्यान रिकॉर्ड किए जाते हैं, और वैबसाइट के जरिये छात्रों को फिर से देखने के लिए उपलब्ध कराये जा रहे हैं। इस अनूठे मॉडल में, नवयुवकों की ऊर्जा को तकनीकी के द्वारा ग्रामीण क्षेत्रों में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान करने के लिए किया जा रहा है। हिमांशु अग्रवाल जो स्कूग्लिंक के डाइरेक्टर हैं, ने अपने एप को दिखाया की कैसे सभी कक्षाओं और बोर्ड की लिए विडियो, नोट्स, प्रश्न उत्तर उत्तर भी उपलब्ध है।

प्रोफ संगल ने बताया कि कोविड से पूर्व के समय में आईआईटी कानपुर के छात्र आस पास के गाँव में ट्यूटोरियल कक्षाएं आयोजित करते थे और प्रतापपुर हरि, डल्लापुरवा और ईश्वरीगंज के सैकड़ों बच्चे इन केन्द्रों मे पढ़ते थे। कोविड पश्चात, इस कार्यक्रम की पहुँच और प्रभाव को बढ़ाने हेतु नई तकनीकी का इस्तेमाल किया गया है। विदित हो कि उन्नत भारत अभियान के तहत रणजीत सिंह रोज़ी शिक्षा केंद्र का निर्माण IITK के पहले बैच के पूर्व छात्र स्वर्गीय डॉ रंजीत सिंह के द्वारा दिये गए डोनेशन से स्थापित किया गया है। इस केंद्र को ग्रामीण क्षेत्र मे सभी की सामाजिक और आर्थिक समृद्धि के उद्देश्य से चलाया जा रहा है। इस केंद्र द्वारा युवाओं को कौशल प्रदान करना, रोजगार की सुविधा प्रदान करना, सामाजिक उद्यमों को मार्ग दर्शन देना और ग्रामीण स्कूलों के लिए गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान करना है।

प्रो अभय करंदीकर (निदेशक, आई आई टी कानपुर) ने बताया की संस्थान समाज का हिस्सा है और आई आई टी के प्रोफेसर और विद्यार्थी इस सामाजिक दायित्व को निभाना चाहते है। उन्होने रंजीत सिंह जी का उदाहरण देते हुये बच्चों से कहा कि कड़ी मेहनत और लगन से ऊंचे लक्षय रखे और आगे बढ़ें। मंडलायुक्त जी ने कहा कि ग्रामीण क्षेत्र के लिए यह क्रांतिकारी तकनीकि है। उन्होने आई आई टी से उन सरकारी स्कूल को जो स्मार्ट सिटी के तहत लिए गए हैं, लेकर पठन पाठन प्रारम्भ करने का निवेदन किया। प्रो संदीप संगल जो आई आई टी कानपुर से उन्नत भारत अभियान का संचालन कर रहे हैं, कहा कि संस्थान के जरिये ऐसे नामी टीचर जुड़ रहे हैं जो अन्यथा ग्रामीण बच्चों तक नही पहुच पाते थे। प्रो हरीश वर्मा भए प्रत्येक माह मे दो बार विज्ञान के प्रयोग करवा रहे हैं।

प्रो विजय जो उन्नत भारत अभियान के राष्ट्रीय समन्वयक हैं, दिल्ली से जुड़े और कहा की आई आई टी कानपुर का मॉडल पूरे देश के लिए है, और यूजीसी और एआईसीटीई कॉलेज तक उन्नत भारत अभियान ले जाएगा। डॉ सर्वेश सिंह (प्रधानाचार्य) जे ने आगंतुकों का स्वागत किया और कपट सुधीर सुभेदर जी ने धन्यवाद दिया। कार्यक्रम मे जिला स्तरीय शिक्षा विभाग के अधिकारी (जाइंट डाइरेक्टर व डी आई ओ एस) उपस्थित रहे, व साथ मे रीता सिंह (समन्वयक), हिमांशु अग्रवाल (स्कूग्लिंक), आईआईटी से प्रो सुधांशु शेखर सिंह (सह समन्वयक), और प्रो सिद्धार्थ पांडा व प्रोफ कानतेश बलानी, प्रभाकर जी और सीमा पंत थीं।

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