आई वी आर आई में संयुक्त निदेशक (केडराड)एवं संयुक्त निदेशक (शोध)द्वारा कार्यभार ग्रहण

बरेली: भारतीय पशु चिकित्सा अनुसंधान संस्थान (आईवीआरआई )में डॉ. के.पी. सिंह, संयुक्त निदेशक (केडराड) एवं डॉ एस के सिंह का संयुक्त निदेशक (शोध) के पद पर चयन हुआ हैं। दोनों संयुक्त निदेशकों ने अपने अपने कार्यभार ग्रहण कर लिए हैं । इस अवसर पर संस्थान के निदेशक डॉ त्रिवेणी दत्त ने दोनों संयुक्त निदेशकों को बधाई दी एवं संस्थान हित के कार्यों के लिए प्रेरित किया ।

संयुक्त निदेशक (केडराड), के पद पर आसीन डॉ. के.पी. सिंह, प्रधान वैज्ञानिक और आईसीएआर-आईवीआरआई, इज्जतनगर, ने वेटरनरी कॉलेज मथुरा से पशु चिकित्सा विज्ञान में स्नातक की डिग्री प्राप्त की, आईवीआरआई, इज्जतनगर के डीम्ड विश्वविद्यालय से वेटरनरी पैथोलॉजी में मास्टर और डॉक्टरेट की डिग्री प्राप्त की। पीएचडी के बाद, वे अक्टूबर, 1990 में आईसीएआर-आईवीआरआई इज्जतनगर में वैज्ञानिक के रूप में नियुक्ति प्राप्त की । इसके बाद 1995 में वैज्ञानिक (सीनियर स्केल), 1999 में वरिष्ठ वैज्ञानिक और 2007 में प्रधान वैज्ञानिक बने। जनवरी, 2019 – फरवरी, 2021 के दौरान पैथोलॉजी विभाग के प्रमुख के रूप में कार्य किया।

डॉ के पी सिंह ने कई विदेशों का भ्रमण भी किया जिनमें यूनाइटेड किंगडम, इटली, फ्रांस, नीदरलैंड, मस्कट, ओमान आदि शामिल हैं डॉ सिंह के राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय ख्याति के विभिन्न पत्रिकाओं में 250 से अधिक शोध पत्र प्रकाशित हो चुके हैं तथा विभिन्न सम्मेलनों/संगोष्ठियों में 150 शोध पत्र प्रस्तुत किए, विभिन्न वैज्ञानिक मंचों/प्रशिक्षणों में 100 से अधिक आमंत्रित व्याख्यान दिए हैं । रेबीज और ब्लूटंग के इम्यूनो-पैथोलॉजी और आणविक महामारी विज्ञान पर व्यापक रूप से काम किया। अंतर्राष्ट्रीय जीन डेटाबैंक में 150 से अधिक जीन अनुक्रम सबमिट किए गए। डॉ सिंह को इंडियन एसोसिएशन ऑफ वेटरनरी पैथोलॉजिस्ट (IAVP) के युवा वैज्ञानिक पुरस्कार, फेलो नेशनल एकेडमी ऑफ वेटरनरी साइंसेज (NAVS), डिप्लोमेट इंडियन कॉलेज ऑफ वेटरनरी पैथोलॉजिस्ट (ICVP) जैसे विभिन्न पुरस्कारों से सम्मानित किया गया है। इनके डॉ सिंह IAVP और सोसाइटी ऑफ ईमयोनोलाजी एवं ईमयोनो पथोलोजी (SIIP) सहित विभिन्न वैज्ञानिक समाजों की आजीवन सदस्य हैं । अनुसंधान, निदान, स्नातकोत्तर शिक्षण में सक्रिय रूप से शामिल और 10 एम.वी.एससी. और 12 पीएच.डी. छात्रों को गाईड कर चुके हैं ।

डॉ संजय कुमार सिंह, प्रधान वैज्ञानिक और संयुक्त निदेशक (शोध ), को पशुधन में बांझपन और प्रसूति संबंधी समस्याओं के प्रबंधन पर विशेषज्ञता के साथ अनुसंधान, शिक्षण और प्रशिक्षण का 22 वर्षों का अनुभव है । डॉ सिंह ने गोविन्द बल्लभ पंत कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय, पंतनगर से पशु चिकित्सा विज्ञान और पशुपालन में स्नातक की डिग्री प्राप्त की और बाद में डीम्ड विश्वविद्यालय, आईसीएआर-आईवीआरआई, इज्जतनगर से पशु चिकित्सा स्त्री रोग और प्रजनन में मास्टर और डॉक्टरेट की डिग्री प्राप्त की । पीएचडी के बाद, वह फरवरी, 2000 में आईसीएआर-आईवीआरआई, मुक्तेश्वर में वैज्ञानिक के रूप में चयन हुआ । वर्ष 2015 में प्रधान वैज्ञानिक के पद पर आसीन हुए । उन्‍होंने कुल 14 बाहरी वित्‍तीय परियोजनाओं (3 पीआई के रूप में और 11 सह-पीआई के रूप में) और 11 संस्‍थान द्वारा वित्‍तपोषित (3 पीआई के रूप में और 8 सह-पीआई के रूप में) और कई प्रौद्योगिकियों का विकास किया है, जिनमें बकरी चेचक और पीपीआर टीकों का विकास शामिल है।

डॉ सिंह ने कई औद्योगिक घरानों को वैक्सीन प्रौद्योगिकी के व्यवसायिकरण का कार्य किया है जिससे संस्थान को को राजस्व प्राप्ति हुई है । डॉ सिंह द्वारा प्रजनन से संबंधित पांच पेटेंट, 6 कापीराइट पांच डिजाइन फ़ाइल किए गये जिसमें से चार पेटेंट हो चुके हैं । डॉ सिंह को कई पुरस्कारों से सम्मानित किया गया है जिनमे आईसीएआर टीम रिसर्च अवार्ड, आईएसवीआईबी-फेलो, निल्स लेगरलोफ अवार्ड, युवा वैज्ञानिक, डॉ. एस.एन. लुकटुक, पुरस्कार, युवा वैज्ञानिक पुरस्कार आदि शामिल हैं । इनके अंतर्राष्ट्रीयऔर राष्ट्रीय जनरलों में 96 से ज्यादा शोध पत्र प्रकाशितहो चुके हैं इसके अतिरिक्त इन्होंने 13 छात्रों को गाइड भी किया है ।

बरेली से ए सी सक्सेना ।

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