आई वी आर आई में “स्टेम सेल थिरैपुटिक्स इन लाईवस्टाक एन्ड पेट्स “पर प्रशिक्षण कार्यक्रम का शुभारम्भ

बरेली,12 जनवरी। भारतीय पशु चिकित्सा अनुसंधान संस्थान, इज्जतनगर के दैहिकी एवं जलवायुकी विभाग में सेन्टर फार एडवांसड फैकल्टी ट्रेनिंग इन वेटनरी फिजियोलॉजी के अन्तर्गत भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान द्वारा प्रायोजित ”स्टेम सेल थिरैपुटिक्स इन लाइवस्टाक एण्ड पेटस“ विषय पर 21 दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का कल शुभारम्भ हुआ। इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में देश के विभिन्न प्रांतों के विश्वविद्यालयों; केरल, तमिलनाडु, गुवाहटी, आसाम, गुजरात, नागालैण्ड, आन्ध प्रदेश, राजस्थान, उड़ीसा आदि के 23 सहायक प्राध्यापक भाग ले रहे हैं। प्रशिक्षण कार्यक्रम के उद्घाटन अवसर पर बोलते हुये कार्यक्रम के मुख्य अतिथि एवं संस्थान के संयुक्त निदेशक शैक्षणिक डा. एस.के. मेंदीरत्ता ने कहा कि स्टेम सेल में आज अपार संभावनायें हैं तथा इसका प्रयोग मानव में तो हो ही रहा है साथ ही साथ पशुओं में भी इसके अच्छे परिणाम देखने को मिले हैं। उन्होंने कहा कि संस्थान का पशुचिकित्सा दैहिकी में प्रगामी संकाय प्रशिक्षण केंद्र अपने प्रशिक्षण कार्यक्रमों से लगातार पशुचिकित्साविदों का ज्ञानार्जन करता आया है। उन्होंने कहा कि इस प्रशिक्षण कार्यक्रम को संस्थान तथा संस्थान के बाहर की उच्च संकाय सदस्यों द्वारा तैयार किया गया। उन्होंने आशा व्यक्त कि आप इस अर्जित ज्ञान का प्रशिक्षणार्थियों भरपूर लाभ उठायेंगे। उन्होंने प्रशिक्षणार्थियों से ज्ञान के आदान-प्रदान तथा वार्तालाप की आवश्यकता जतायी। निदेशक सी.ए.एफ.टी. एवं दैहिकी एवं जलवायुकी विभाग के विभागाध्यक्ष डा. वी.पी. मौर्या ने विभाग के इतिहास पर प्रकाश डालते हुए कहा कि इस विभाग की स्थापना 1970 में की गयी। अनुसंधान और शिक्षण में उपलब्धियों के आधार पर, 2 मार्च 1995 को भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद द्वारा संभाग को पशु चिकित्सा दैहिकी में उन्नत अध्ययन केंद्र (सी.ए.एस.) के रूप में मान्यता दी गई थी और बाद में इसे 2010 में प्रगामी संकाय प्रशिक्षण केंद्र (सी.ए.एफ.टी.) के रूप में नामित किया गया । तब से यह विभाग लगातार प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित कर रहा है तथा अब तक यह विभाग 48 प्रशिक्षण कार्यक्रम सम्पन्न करा चुका है और इस क्रम में यह ४९वां प्रशिक्षण कार्यक्रम है ।
पाठयक्रम निदेशक सह समन्वयक तथा विभाग के वरिष्ठ वैज्ञानिक डा. विकास चन्द्र ने प्रशिक्षण कार्यक्रम में सभी प्रशिक्षणार्थियों का स्वागत करते हुए कार्यक्रम की रूपरेखा प्रस्तुत करते हुए कहा कि इस प्रशिक्षण कार्यक्रम को अन्य विभागों के साथ मिलकर तैयार किया है जिनमें जीव रसायन, शल्य चिकित्सा, भैषज्य एवं विष विज्ञान आदि सामिल हैं। स्टेम सेल में दो दशकों से कार्य किया जा रहा है। प्रशिक्षणार्थियों को स्टेम सेल में नवीन तकनीकियों के बारे में सैद्धांतिक एवं प्रयोगात्मक तथा जीवंत प्रदर्शन के माध्यम से जानकारी प्रदान की जायेगी।
कार्यक्रम का संचालन डा. विकास चन्द्र द्वारा किया गया जबकि धन्यवाद ज्ञापन विभाग की वैज्ञानिक डा. यशोदा द्वारा किया गया । इस अवसर पर संस्थान के प्रधान वैज्ञानिक, शैक्षणिक समन्वयक एवं रजिस्ट्रार डा. ज्ञानेन्द्र सिंह सहित विभाग के सभी कर्मचारीगण उपस्थित रहे। बरेली से ए सी सक्सेना की रिपोर्ट

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