आखिर इस किले को क्यों कहा जाता है ‘सापों का किला’? जानिए इसके पीछे की वजह !

 

भारत में कई ऐसे किले हैं जो काफी खूबसूरत होने के साथ-साथ रहस्यों से भरे हुए हैं. अगर हम किलों की बात करें तो वो प्राचीनकाल में हुई घटनाओँ और भारत के महान इतिहास के बारे में दर्शाती है, जिसे सुनने या जानने के बाद हम कई बार हैरान रह जाते हैं . और कई बार भारत के महान इतिहास से रूबरू होकर गौरान्वित महसूस करते हैं. किलों के मामलें में राजस्थान और दिल्ली की तरह महाराष्ट्र का भी इतिहास भी काफी अद्धभुत है, लेकिन कई बार हमारे मन में कई सवाल आते है की यह किला किसने और कब बनवाया होगा? तो आइये आपको एक ऐसे किले के बारे में बताते हैं जिसे ‘सापों का किला’ भी कहा जाता है इस किले को बने 800 साल से भी ज्यादा हो गया हैं. कहा जाता है कि ‘कहां राजा भोज, कहां गंगू तेली’ वाली कहावत इसी किले से जुड़ी हुई है. तो आइये जानते है इस किले के बारे में पूरी कहानी की सचाई.

पन्हाला किला जिसे पन्हालगढ़, पहाला और पनाला के रूप में भी जाना जाता है जिसका मतलब “नागों का घर” से हैं. भारत के महाराष्ट्र में कोल्हापुर से 20 किलोमीटर उत्तर पश्चिम में पन्हाला में स्थित है. पन्हाला वैसे तो एक छोटा सा शहर और हिल स्टेशन है, लेकिन इसका इतिहास शिवाजी महाराज से जुड़ा हुआ है. वैसे तो यह किला यादवों, बहमनी और आदिल शाही जैसे कई राजवंशों के अधीन रह चुका है, लेकिन 1673 ईस्वी में इसपर शिवाजी महाराज का अधिकार हो गया.

कहा जाता है कि शिवाजी महाराज पन्हाला किले में सबसे अधिक समय तक रहे थे. उन्होंने यहां 500 से भी ज्यादा दिन बिताए थे. बाद में यह किला अंग्रेजों के अधीन हो गया था. पन्हाला दुर्ग को ‘सांपों का किला’ इसलिए कहा जाता है, क्योंकि इसकी बनावट टेढ़ी-मेढ़ी है यानी यह देखने में ऐसा लगता है जैसे कोई सांप चल रहा हो। इसी किले के पास जूना राजबाड़ा में कुलदेवी तुलजा भवानी का मंदिर स्थित है, जिसमें एक गुप्त सुरंग बनी है, जो सीधे 22 किलोमीटर दूर पन्हाला किले में जाकर खुलती है. फिलहाल इस सुरंग को बंद कर दिया गया है.

पन्हाला दुर्ग में तीसरी मंजिला इमारत के नीचे एक गुप्त रूप से बनाया गया कुआं भी मौजूद है, जिसे अंधार बावड़ी के नाम से जाना जाता है. माना जाता है कि इस बावड़ी का निर्माण मुगल शासक आदिल शाह ने करवाया था. इसके निर्माण की वजह ये थी कि आदिल शाह का मानना था कि जब भी दुश्मन किले पर हमला करेंगे तो वो आसपास के कुओं या तालाबों में मौजूद पानी में जहर मिला सकते हैं, ताकि वो अपने राज्य को दुश्मनों से बचा सकें.

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