आखिर कहां गायब हो गए दो हजार के नोट

नई दिल्ली: नोटबंदी के बाद जारी किए गए 2000 रुपये के नोटों पर भी क्या कारोबारियों की काली छाया पड़ गई है या फिर रिजर्व बैंक ने ही बड़े नोटों की आपूर्ति कम कर दी है? इन दिनों 2000 रुपये के नोटों की कमी चर्चा का विषय बनी हुई है। मध्य प्रदेश, बिहार और गुजरात सहित कई राज्यों से कैश किल्लत की खबरें सामने आ रही हैं। मध्य प्रदेश में तो स्थिति इतनी भयावह हो चुकी है कि सोमवार को खुद मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने इसके पीछे साजिश की आशंका जाहिर करते हुए जांच की बात कही है।

मीडिया रिपोर्टों में कहा गया है कि बैंक शाखाओं और करंसी चेस्ट में भी 2000 रुपये के नोटों की आवक लगातार कम हो रही है। आरबीआई ने नोटबंदी के बाद करीब 7 लाख करोड़ रुपये मूल्य के 2000 रुपये के नोट जारी किए थे। जुलाई में बैंकों में इन नोटों की संख्या करीब 35 फीसदथी जो नवंबर 2017 तक घटकर 25 फीसद हो गई। बैंकों से जमा नकदी रोजाना औसतन 14 करोड़ से घटकर 4 करोड़ रह गई है।

मध्य प्रदेश सहित देश के अनेक राज्यों में एटीएम में नकदी की कमी के बीच मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि कुछ लोग 2,000 के नोट दबाकर नकदी की कमी पैदा करने की की साजिश रच रहे हैं। चौहान ने किसान महासम्मेलन में कहा, ‘जब नोटबंदी हुई थी तब 15 लाख करोड़ रुपये के नोट बाजार में थे और आज साढ़े 16 लाख करोड़ के नोट छापकर बाजार में भेजे गये हैं, लेकिन 2-2 हजार के नोट कहां जा रहे हैं, कौन दबाकर रख रहा है, कौन नकदी की कमी पैदा कर रहा है। यह षड्यंत्र है।’

चौहान ने कहा कि यह षड्यंत्र इसलिए किया जा रहा है, ताकि दिक्कतें पैदा हो। उन्होंने कहा, ‘आज प्रदेश में नगदी की कमी पैदा की जा रही है, इससे राज्य सरकार निपटेगी। प्रदेश सरकार इस पर सख्ती से कार्रवाई करेगी।इस संबंध में हम केंद्र से भी बात कर रहे हैं।’ आरबीआई या वित्त मंत्रालय ने इस पर अब तक कोई प्रतिक्रिया नहीं की है।

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