आखिर क्यों आज के दिन महिलाओं के लिए दूध और दूध से बनी चीजें पीना माना जाता है वर्जित, वजह जरूर जानिए

हिंदू धर्म में कई उपवासो का अपना अलग-अलग महत्व है. आज गोवत्स द्वादशी के उपवास का भी अपना अलग महत्व है. एकदशी के दूसरे दिन यानि 27 अगस्त 2019 को गोवत्स द्वादशी मनाई जाती है. अधिकांश हिस्सों में भाद्रपद कृष्ण पक्ष की द्वादशी को गोवत्स द्वादशी मनाई जाती है. कई महिलाएं पुत्र प्राप्ति, संतान और परिवार की खुशी के लिए आज के दिन गौ मां की पूजा करती हैं और व्रत रखती हैं. वैसे तो भारतीय धार्मिक पुराणों में गौमाता में समस्त तीर्थ होने की बात कहीं गई है. कहा जाता है कि गौमाता की पूजा कर ली तो मानों सभी देवी-देवातओं की पूजा हो गई. जानिए क्या है कि व्रत का महत्व…

भविष्य पुराण के अनुसार गौमाता कि पृष्ठदेश में ब्रह्म का वास है, गले में विष्णु का, मुख में रुद्र का, मध्य में समस्त देवताओं और रोमकूपों में महर्षिगण, पूंछ में अनंत नाग, खूरों में समस्त पर्वत, गौमूत्र में गंगादि नदियां, गौमय में लक्ष्मी और नेत्रों में सूर्य-चन्द्र विराजित हैं.यह पर्व पुत्र की मंगल-कामना के लिए किया जाता है. इस पर्व पर गीली मिट्टी की गाय, बछड़ा, बाघ तथा बाघिन की मूर्तियां बनाकर पाट पर रखी जाती हैं तब उनकी विधिवत पूजा की जाती है.

इस पूजा के लिए सबसे पहले सुबह उठकर नाह-धोकर भगवान से सामने खड़े होकर व्रत रखने की शक्ति प्रदान करने की प्रार्थना करें. उसके बाद गीली मिट्टी की गाय, बछड़ा, बाघ और बाघिन की मूर्तियां बनाएं और घर के आंगन में रखकर चौकी पर रखें. उसके बाद तिलक लगाएं, ध्यान रहे कि चावल या धान का इस्तेमाल ना करें. चावल की जगह काकून के चावल का इस्तेमाल करें. धूप और दीपक जलाने के बाद ऐसा प्रसाद चढ़ाएं जो दूध से ना बना हो.

व्रत रखने वाली महिलाएं दूध या दूध से बनी चीजें ना खाएं, क्योंकि इस दिन पर गाय की पूजा की जाती हैं ऐसे में गाय का दूध पीना अच्छा नहीं माना जाता है. गाय के दूध की जगह भैस या बकरी के दूध का इस्तेमाल कर सकते हैं. आज के दिन खाने में चने की दाल और बाजरे और मक्के की रोटी जरूर बनाएं.

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