आखिर क्यों भगवान विष्णु ने शिव जी को अर्पित कर दिए थे अपने नेत्र, जानिए

लखनऊ: भगवान विष्णु जी ने एक संकल्प लिया था की वो भगवान शिव जी को 1000 कमल पुष्प चढ़ाएंगे आपको बता दें कि जब भगवान् शिव ने अपनी माया से एक पुष्प को गायब कर दिया था तो भगवान विष्णु जी ने अपने नेत्र उनको अर्पित कर दिए थे।

दरअसल धार्मिक ग्रंथों में भगवान विष्णु जी के बहुत से नाम का उल्लेख किया गया है श्री हरि के इन्हीं नामों में से एक नाम नयन है आइए जानते हैं भगवान विष्णु जी का नाम कमल नयन क्यों पड़ गया इसके बारे में पौराणिक कथाओं में बहुत अच्छे से वर्णन है परन्तु भगवान विष्णु जी के नाम के पीछे की कथा बहुत ही हैरान करने वाली हैं आइए जानते हैं इसके बारे में।

पौराणिक कथाओं के बताया गया है कि असुरों से परेशान होकर सभी देवताओं ने भगवान विष्णु जी से इसके लिए निदान की प्रार्थना की थी उसके बाद भगवान विष्णु जी ने भगवान शिव जी को प्रसन्न करने के लिए बहुत घोर तपस्या की थी और वो मंत्रोच्चारण करते थे और इसके साथ ही वो शिवलिंग पर कमल का पुष्प भी चढ़ाना शुरु कर दिया था और उन्होंने यह संकल्प लिया था की वो भगवान शिव जी को 1000 कमल का पुष्प चढ़ाने का ।

जब भगवान् विष्णू जी ने भगवान शिव जी को 999 कमल के पुष्प अर्पण किए तो भगवान विष्णु को लगा कि एक हज़ार पुष्प में से एक पुष्प गायब हैं उसके बाद उन्होंने उस पुष्प को बहुत खोजने की कोशिश की परन्तु वो पुष्प नही मिला जब भगवान् विष्णु को वह पुष्प नही मिला तो उन्होंने अपने नेत्र भगवान् शिव जी के अर्पित कर दिए और यही कारण है कि भगवान् विष्णु का नाम कमल नयन पड़ गया |

कहा जाता हैं कि भगवान् शिव जी ने ये सब भगवान विष्णु की परिक्षा लेने के लिए किया था और इसके बाद ही भगवान् शिव जी ने भगवान विष्णु को तीनों लोकों की पालन की जिम्मेदारी सौंपी थी और तो और भगवान् शिव जी ने भगवान विष्णु को सुदर्शन चक्र भी प्रदान किया था फिर सुदर्शन चक्र से भगवान विष्णु ने असुरों का नाश और देवताओं को सुख प्रदान किया था।

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