आखिर क्यों महिलाओं की कत्लगाह बनता जा रहा बागपत?

बागपत: बागपत महिलाओं की कत्लगाह बनता जा रहा है। कभी दहेज के लिए तो कभी अश्लीलता के आरोप लगाकर महिलाओं की बलि दी जाती है। बीते बुधवार को भी बागपत में दो महिलाओं की हत्या कर दी गई। एक को जहर दिया गया तो दूसरे को फांसी पर लटका कर मारा गया। पतन की ओर जा रहे इस समाज में महिलाओं को बार-बार अपमानित किया जा रहा है। हालांकि बागपत पुलिस महिलाओं के साथ होने वाले अपराधों में त्वरित कारवाई कर कानून का पालन करने का दम भर रही है लेकिन जरूरी है कि समाज को जागरूक करने और कानून का सख्ती से पालन कराने की।

देश की न्याय पालिका से लेकर सदन और समाज तक महिलाओं के सम्मान को लेकर अक्सर बहस करते हैं और उनकी सुरक्षा का दम भरते हैं। महिलाओं के लिए अगर न्याय पालिका ने सख्त कानून का और सजा का रुख अपनाया है तो सदन ने भी महिलाओं को प्रथम स्थान पर रखा है। समाज भी अक्सर समय-समय पर माहिलाओं को सम्मानित कर अपना फर्ज अदा कर देता है लेकिन महिलाओं को कितना सम्मान मिल रहा है, उनको कितना न्याय मिल रहा है या उनकी कितनी इज्जत हो रही है। यह भी किसी से छुपा नहीं है।

आज बागपत जनपद में जब महिलाओं के साथ अपराध हुआ तो समाज ही नहीं सदन पर भी सवाल उठना लाजमी है। यूपी के बागपत जनपद में बिनौली थानाक्षेत्र के रंछाड गांव में एक विवाहिता की गला दबाकर हत्या कर दी गई और हत्या को आत्महत्या का रूप देने का भी प्रयास किया गया। मगर मृतका के भाई ने दहेज के लिए हत्या का आरोप लगाया और पुलिस कारवाई की मांग की है। वहीं दूसरा मामला छपरौली के बदरखा गांव का है, जहां एक विवाहिता जो जहर देकर मार दिया गया और आनन-फानन में अंतिम संस्कार करने का प्रयास किया तो पुलिस ने शव को कब्जे में ले लिया। मृतक के परिजनों ने हत्या का आरोप लगाते हुए पुलिस में तहरीर दी है। इतना ही नहीं दो अन्य घटनों में महिलाओं के साथ दुष्कर्म का प्रयास किया गया।

बागपत में एक ही दिन में दो हत्या और महिलाओं के साथ हुए अत्याचार की एक वारदात ने बागपत के समाज पर सवाल उठाए हैं कि यह समाज आखिर किस दिशा में जा रहा है। यह वही समाज है जिसको अपना वंश और समाज चलाने के लिए एक उत्तराधिकारी की आवश्यकता होती है और उत्तराधिकारी के लिए एक महिला की। यह समाज जब अपने घर की ओर देखता है तो उसका नजरिया बदल जाता है और शुरू होती है अत्याचार की नई कहानी। अगर यही हाल रहा तो वह दिन दूर नहीं जब समाज के विनाश का कारण भी महिला बनेंगी और समाज का नाम लेने वाला भी कोई नहीं रहेगा।

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