आखिर क्यों राजीव गांधी से हो रही है भारत रत्न वापस लेने की मांग

नई दिल्ली । दिल्ली सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी ने पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी से भारत रत्न पुरस्कार वापस लेने की मांग की है। कांग्रेसी नेता जगदीश टाइटलर द्वारा 1984 में सिख कत्लेआम के दौरान राजीव गांधी के साथ दिल्ली में घूमने के मीडिया को दिए साक्षात्कार को आधार बनाया गया है। वहीं दंगा पीड़ितों की पैरवी करने वाले वरिष्ठ अधिवक्ता एचएस फुलका ने भी केंद्र सरकार से पूरे घटनाक्रम की जांच करवाने का आग्रह किया है।

कमेटी के अध्यक्ष मनजीत सिंह जीके एवं महासचिव मनजिंदर सिंह सिरसा ने 33 वर्ष बाद टाइटलर द्वारा साक्षात्कार में राजीव गांधी का नाम लेने पर सवाल उठाए। जीके ने कहा कि टाइटलर के खुलासे से एक बात साबित हो गई है कि राजीव गांधी को कत्लेआम की पूरी जानकारी थी। दिल्ली छावनी में फौज होने के बावजूद 3 दिन बाद मेरठ छावनी से फौज बुलाई गई।

उन्होंने संभावना जताई कि टाइटलर का यह खुलासा सीधे तौर पर गांधी परिवार को संकेत देने की कोशिश लगता है कि या तो मुझे बचा लो या मैं सारे भेद उजागर कर दूंगा। वहीं सिरसा ने सभी सांसदों को राजीव गांधी से भारत रत्न खिताब वापस लेने की मांग उठाने की अपील की है।

सिरसा ने कहा कि टाइटलर ने इस मसले पर किसी जांच एजेंसी, पुलिस या आयोग के सामने इस बारे में कोई जानकारी आज तक नहीं दी थी, इसलिए टाइटलर के खुलासे पर दिल्ली पुलिस को टाईटलर को समन भेजकर सारे रिकॉर्ड की पड़ताल करनी चाहिए। वहीं पीड़ितों के अधिवक्ता फुलका ने कहा कि इस पूरे खुलासे से स्पष्ट हो गया है कि राजीव गांधी की भी दंगों में भूमिका रही है। उन्होंने केंद्र सरकार से पूरे घटनाक्रम की जांच के लिए एसआईटी के गठन की मांग की है।

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