आगरा में भूख-बीमारी से बच्ची की मौत, NHRC ने यूपी सरकार को भेजा नोटिस

आगरा: उत्तर प्रदेश के आगरा में एक बच्ची की गरीबी के चलते मौत हो गई। परिवार के लोग बेरोजगार थे। बिल सात हजार से ज्यादा आने के चलते बिजली कनेक्शन कट गया था। आर्थिक तंगी से जूझ रहे परिवार के पास कोई इंतजाम नहीं था। हालातों से जूझते परिवार की बुखार से पीड़ित 6 साल की बच्ची ने इसी बीच दम तोड़ दिया।

इस मामले में राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) ने उत्तर प्रदेश सरकार को नोटिस जारी कर जवाब- तलब किया। आयोग ने उत्तर प्रदेश के मुख्य सचिव को भेजे नोटिस में चार हफ्ते में प्रशासन द्वारा पीड़ित परिवार के पुनर्वास और लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों के खिलाफ की गई कार्रवाई के मामले में रिपोर्ट देने को कहा है।

गौरतलब है कि नगला विधिचंद के पप्पू की छह वर्षीय बेटी सोनिया पिछले पांच दिनों से बुखार से पीड़ित थी। उसे डायरिया भी हो गया था। शनिवार को परिजनों ने उसे दूध पिलाया। जिसके बाद उसने उल्टी कर दी। घर वालों ने मेडिकल स्टोर से दवा लाकर दी, लेकिन हालत में सुधार नहीं हुआ। आखिर में उसकी मौत हो गई। परिजनों ने बच्ची को दफना दिया।

ग्रामीणों का कहना था कि मृतक बच्ची का परिवारीजन एक महीने से बेरोजगार हैं। घर पर एक हफ्ते से खाने का सामान नहीं था। बच्ची की मां शीला देवी परिवार पालने के लिए अकेले ही काम करती थीं। वह कहती हैं, ‘मैं उसके खाने के लिए कुछ जुगाड़ नहीं कर पाई। वह दिन-पर-दिन कमजोर होती गई। उसे तीन दिन से बुखार था और अब मैंने उसे खो दिया।’

परिवार को दी गई राशन सामग्री
मामले की जानकारी मिली तो जिला प्रशासन की टीम पहुंची। तत्काल पीड़ित परिवार के घर पर 50 किलो गेहूं, 40 किलो चावल, 3 किलो अरहर की दाल, सब्जियां और अन्य खाद्य सामग्री भिजवाई गई। टोरेंट का बिजली बिल जमा कराने के लिए बिजली विभाग के अधिकारियों को बोल दिया गया। साथ ही कनेक्शन जोड़ दिया गया।

परिवार की हर संभव मदद की जाएगी
जिलाधिकारी ने कहा कि परिवार में राशन कार्ड नहीं बना था। इसको प्राथमिकता के आधार पर बनवाया जाएगा। साथ ही परिवार के लोगों को मनरेगा में काम दिलाया जाएगा। इसके अलावा पेंशन, प्रधानमंत्री आवास योजना में मकान दिलवाने की व्यवस्था भी प्रशासन द्वारा कराए जाने का प्रयास किया जाएगा। प्रदेश सरकार की अन्य योजनाओं से का लाभ भी पीड़ित परिवार को दिलाया जाएगा।

बच्ची की मौत के मामले की जांच के आदेश दिए गए हैं। परिवार को बिना पोस्टमॉर्टम के शव नहीं दफनाना चाहिए था। पोस्टमार्टम से मौत की वजह स्पष्ट हो सकती थी। हालांकि उसकी मौत गरीबी के चलते हुई है। -प्रभु एन सिंह, जिलाधिकारी

नोट: अगर आपको यह खबर पसंद आई तो इसे शेयर करना न भूलें, देश-विदेश से जुड़ी ताजा अपडेट पाने के लिए कृपया The Lucknow Tribune के  Facebook  पेज को Like व Twitter पर Follow करना न भूलें...
Loading...
--------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------- --------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------- ---------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------
E-Paper