आजमगढ़ में सजा मीडिया और साहित्य का दुर्लभ मंच

लखनऊ ब्यूरो: उत्तर प्रदेश के आजमगढ़ में मीडिया और साहित्य का दुर्लभ मंच सजा। 7-8 अप्रैल को आयोजित मीडिया समग्र मंथन 2018 का यह कार्यक्रम अपने आप में बेजोड़ रहा। देश के कोने-कोने से पहुंचे पत्रकार और साहित्यकार इस मंच से देश के लोकतंत्र, मीडिया, राजनीति और साहित्य पर जमकर बोले। मीडिया, साहित्य, समाज और सियासत से जुड़ा यह मंच देश में हो रही राजनीति, फर्जी समाचार, सरकार की नीति, पत्रकारों और साहित्यकारों पर पड़ते दबाव और समाज में पनपती जातीय और धार्मिक हिंसा को रेखांकित कर लोकतंत्र बचाने का आह्वान किया। इस राष्ट्रीय कार्यक्रम दर्जनों पत्रकारों और साहित्यकारों ने अपनी बातें रखी और लोगों को आगाह भी किया कि राजनीतिक खेल से जनता को बचने की जरूरत है। यह ऐसा समय है जिसमे हर बात राजनीति से तय की जा रही है और समाज को बांटने की कोशिश की जा रही है।

मीडिया समग्र मंथन 2018 का यह दो दिवसीय संवाद ,परिसंवाद और सम्मान कार्यक्रम स्व. गुंजेश्वरी प्रसाद ,स्व. मुखराम सिंह एवं स्व. विवेकी राय की स्मृतियों में आयोजित किया गया था। कार्यक्रम के आयोजक वरिष्ठ पत्रकार अरविन्द सिंह थे। पत्रकार अरविन्द सिंह पिछले 10 वर्षों से शार्प रिपोर्टर पत्रिका के जरिए लोकतंत्र की रक्षा और मीडिया की सम्प्रभुता की लड़ाई लड़ते रहे हैं। शार्प रिपोर्टर की 10 बरस की कामयाबी भी इस आयोजन के मूल में रही।

इस दो दिवसीय कार्यक्रम में प्रोफ़ेसर ऋषभ देव, प्रोफ़ेसर देव राज, प्रोफ़ेसर एम वेंकटेश्वर योगेन्द्रनाथ शर्मा ‘अरुण ‘समेत दर्जनों साहित्यकारों, समाज सेवियों और आंदोलनकारियों ने सम्बोधित किया। वरिष्ठ पत्रकार पुण्य प्रसून वाजपई, जय शंकर गुप्त, गिरीश पंकज, यशवंत सिंह, प्रशांत राजावत, गोपाल राय, राम किंकर सिंह ने सम्बोधित किया और लोकतंत्र में बढ़ते खतरे और मीडिया के सामने आती चुनौतियों को रेखांकित किया। जयशंकर गुप्त ने मीडिया में फैले भ्रष्टाचार पर प्रहार किया और कहा कि बदलते समय में पत्रकारों को सावधान होकर काम करने की जरूरत है। जिस तरह से फेंक न्यूज़ की कहानी सामने आ रही है वैसे में प्रतिबद्ध पत्रकारों की जिम्मेदारी और बढ़ जाती है।

वरिष्ठ पत्रकार यशवंत सिंह ने कहा लोकतंत्र में मीडिया की भूमिका बड़ी होती है लेकिन सरकार नहीं चाहती है कि सच सामने आये। लेकिन पत्रकारों को सच बोलने और कहने से पीछे नहीं हटना चाहिए। वरिष्ठ पत्रकार गिरीश पंकज ने मीडिया में बढ़ रहे फेक न्यूज़ पर काफी क्षोभ प्रकट किया और कहा कि लोकतंत्र की रक्षा मीडिया को धारदार बनाकर की संभव है। वहीँ युवा पत्रकार प्रशांत राजावत और रामकिंकर सिंह ने मीडिया पर बढ़ते हमले और लोकतंत्र के स्तम्भों को कमजोर करने की साजिशों का खुलासा किया। वरिष्ठ पत्रकार प्रसून वाजपई ने दिल्ली से ही लाइव के जरिए अपनी बात रखी और पत्रकार एवं पत्रकारिता के साथ ही लोकतंत्र से जुड़े मुद्दों को बखूबी उकेरा। वाजपई ने कहा कि अभी का समय चिंतन करने का है और मीडिया को लोकतंत्र पर हो रहे हमले पर चुप्पी तोड़ने का समय है। साथ ही संविधान के साथ खड़े रहने की जरूरत है ताकि जनता की गरिमा को बचाया जा सके।

दो दिवसीय इस मीडिया मंथन में मुख्य भूमिका गोरखपुर रेडियो स्टेशन की अधिकारी डॉ अनामिका श्रीवास्तव ने निभाया और मीडिया, साहित्य, लोक रंग से लेकर संस्कृति से जुड़े मसलों पर बेबाक राय रखी। डॉ अनामिका ने कहा कि जब तक समाज में साहित्य और मीडिया है तबतक लोकतंत्र को कोई कमजोर नहीं कर सकता। यह हमारी पूंजी है और आत्मा भी। राजनीति चाहे जो भी हो मीडिया कर साहित्य के दम पर समाज को जोड़ने का काम चलता रहेगा।

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