आजम खान और खुर्शीद पर चलेगा भ्रष्टाचार का मुकदमा !

लखनऊ ब्यूरो: उत्तर प्रदेश की आर्थिक अपराध साखा और एसआईटी ने सरकार से सपा नेता पूर्व मंत्री आजम खान और कांग्रेस नेता खुर्शीद आलम के खिलाफ भ्रष्टाचार का केस चलाने की अनुमति मांगी गई। माना जा रहा है कि सत्ता में रहते हुए आजम खान ने जहां जल निगम में नियुक्तियों में गड़बड़ी किया था वही लुईस खुर्शीद ने दिव्यांगों के नाम पर मिले उपकरणों में हेराफेरी किया था।

सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक एसआईटी ने आजम व ईओडब्ल्यू ने लुईस मामले की प्रारंभिक जांच रिपोर्ट शासन को भेज दी है। दोनों ही विंग के प्रभारी डीजी आलोक प्रसाद हैं, जो 31 मार्च को रिटायर हो रहे हैं। शासन को भेजी रिपोर्ट में उन्होंने बताया है कि दोनों मामलों में पर्याप्त सुबूत हैंऔर इनके खिलाफ अभियोग चलाया जाना चाहिए। हालांकि प्रमुख सचिव गृह अरविंद कुमार का कहना है कि अभी यह रिपोर्ट नहीं मिली है। रिपोर्ट मिलने पर न्याय विभाग से राय लेकर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

बता दें कि सपा शासनकाल में कैबिनेट मंत्री रहे आजम खान जल निगम बोर्ड के चेयरमैन भी थे। वर्ष 2016 में 122 सहायक अभियंता, 335 नैतिक लिपिक व 32 आशुलिपिट समेत 1300 पदों पर भर्तियां की गईं थीं। भर्ती के लिए वित्त विभाग से अनुमति नहीं ली गई थी। सरकार के बजाय जल निगम के अध्यक्ष के स्तर पर ही भर्ती की मंजूरी दी गई थी। एई कंप्यूटर के 4 पदों पर भर्ती भी बिना पद सृजन के कर दी गई। योगी सरकार इस मामले में पहले ही 122 सहायक अभियंताओं को बर्खास्त कर चुकी है। बता दें कि आजम के साथ उनके सचिव रहे एसपी सिंह, निजी सचिव, जल निगम के एमडी समेत अन्य लोग भी मामले में फंसे हुए हैं।

भ्रष्टाचार के लग रहे आरोप आजम खान ने सफाई देते हुए प्रदेश की योगी सरकार पर जमकर निशाना साधा है। उन्होंने कहा कि पूरे मामले में पैसे के लेन-देन की कोई शिकायत नहीं है। उन्होंने कहा मंत्री रहते उन्होंने पढ़े-लिखे बेरोजगारों को नौकरी देने का कम किया और यह कोई पाप नहीं है। आजम खान ने इस दौरान पीएम नरेंद्र मोदी पर निशाना साधते हुए कहा कि प्रधानमंत्री जी ने नौकरी देने का वादा किया था, लेकिन एक भी नौकरी नहीं दी। आजम खान ने कहा कि हमारी सरकार ने रोजगार दिया है, लिया नहीं है। बच्चों को रोजगार देने की जो भी सजा होगी भुगतेंगे।

उधर, सलमान खुर्शीद की पत्नी लुईस खुर्शीद डॉ. जाकिर हुसैन मेमोरियल ट्रस्ट चलाती हैं। 2010 में सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय ने ट्रस्ट को 71.50 लाख रुपये का अनुदान देकर दिव्यांगों का शिविर लगाकर उपकरण बांटने के लिए कहा था। ट्रस्ट ने दावा किया कि कायमगंज (फर्रुखाबाद) में कैंप लगाकर उपकरण बांटे गए। हालांकि 5 साल तक चली ईओडब्ल्यू की जांच में सब फर्जी पाया गया। ईओडब्ल्यू ने ट्रस्ट की सर्वेसर्वा लुईस व अन्य के खिलाफ केस की अनुमति मांगी है।

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