आजादी के बाद पहली बार नहीं निकलेगी तीज माता की सवारी, जानिए क्यों

बूंदी. बूंदी में आस्था और शौर्य का प्रतीक कजली तीज महोत्सव इस बार टाला जाएगा। पन्द्रह दिन तक इस महोत्सव के तहत भरने वाला मेला इस बार कोविड-19 की भेंट चढ़ेगा। सिर्फ कजली तीज माता की पूजा-अर्चना की जाएगी। लोग नगर परिषद परिसर में कजली तीज माता के सोशल डिस्टेंस के साथ सिर्फ दर्शन कर सकेंगे। इस साल महोत्सव की शुरुआत 5 अगस्त से होनी थी।

बूंदी सहित प्रदेश में लगातार बढ़ते कोरोना के मामले को ध्यान में रखते हुए नगर परिषद प्रशासन ने महोत्सव को टालने की अपने स्तर पर सहमति बना ली। जिला प्रशासन के साथ बैठक कर इस पर जल्द निर्णय किया जाएगा। प्राप्त जानकारी के अनुसार महोत्सव के तहत दो दिन तक कजली तीज माता की सवारी और इसके बाद पन्द्रह दिन तक चलते वाले मेले में सैकड़ों की तादाद में लोग जुटते रहे हैं। कोविड-19 का फैलाव और बूंदी में बढ़ते संक्रमण के मामले को देखते हुए नगर परिषद प्रशासन ऐसा कोई निर्णय नहीं करना चाहता जिससे आमजन की परेशानी बढ़े। लोगों की भीड़ जुटने के आयोजन तो फिलहाल सभी निरस्त ही रहेंगे। हालांकि आजादी के बाद यह पहला अवसर होगा जब बूंदी मेंं ऐतिहासिक कजली तीज महोत्सव का आयोजन टाला जाएगा। कजली तीज महोत्सव बूंदी का प्रमुख महोत्सव होने के साथ-साथ इसे ग्रामीण इलाकों से भी सैकड़ों की संख्या में लोग देखने आते हैं। ऐसे में इस भीड़ को जुटने से रोकने के लिए इसे टालने का नगर परिषद ने निर्णय किया।

पन्द्रह दिन तक चलने वाले इस महोत्सव में मोटे तौर पर चार लाख से अधिक लोग शामिल होते हैं। इस महोत्सव के तहत भरने वाले मेले में बूंदी शहर ही नहीं बल्कि जिलेभर के लोग आते हैं। ऐसे में इस संक्रमण के बीच यह उत्सव मनाया जाना कतई उचित नहीं होगा। महोत्सव को निरस्त रखने के साथ ही नगर परिषद ने फिलहाल तीज माता की प्रतिमा दर्शनों के लिए रखने का निर्णय किया। तीज माता के सोशल डिस्टेंस के साथ दर्शन कर सकेंगे। ताकि हर साल तीज के दर्शनों का क्रम नहीं टूटे। हालांकि नगर परिषद के इस निर्णय पर जिला प्रशासन की मोहर लगना अभी बाकी है।

बूंदी रियासत में गोठडा के ठाकुर बलवंत सिंह जांबाज सैनिक भावना से ओतप्रोत थे। जयपुर के चहल-पहल वाले मैदान से तीज की सवारी, शाही तौर-तरीकों से निकल रही थी। ठाकुर बलवंत सिंह अपने जांबाज साथियों के पराक्रम से जयपुर की तीज को गोठडा ले आए और तभी से तीज माता की सवारी गोठडा में निकलने लगी। बाद में बूंदी के राव राजा रामसिंह उसे बूंदी ले आए और तीज की सवारी निकलने लगी। स्वतन्त्रता के बाद भी तीज की सवारी निकालने की परम्परा बनी रही। यह बूंदी का प्रमुख महोत्सव बन गया। दो दिन सवारी निकालने का जिम्मा नगर परिषद के पास आ गया। इसके साथ पन्द्रह दिन का मेला भरने लग गया।

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