आज की डिनर डिप्लोमेसी पर टिकी है सबकी निगाहें

दिल्ली ब्यूरो: राजनीति में भोज भात का अपना अलग खेल है। इस खेल में बहुत कुछ समाया होता है। एक तो मिल बांटकर खाने का आनंद और दूसरा सामने वाले को कमजोर करने की कूटनीति। राजनीति चूंकि ठगी और झूठवाद पर ही टिकी होती है इसलिए राजनीति गिरोह चलाने वाले नेता रूपी अभिनेता अक्सर भोजभात का आयोजन करते रहते हैं। सच यह भी है कि चुकी राजनीति का कोई चरित्र नहीं होता इसलिए किसी नेताओं के बारे में कोई प्रमाणपत्र की जरूरत भी नहीं होती। देश मानकर चलता है कि जब सब सारे नेता एक ही चरित्र के होते हैं। अंतर केवल जनता के बीच झूठवाद को सलीके से कौन परोसता है यह महत्वपूर्ण रह जाता है। अब चूंकि लोक सभा चुनाव होने में साल भर ही रह गए हैं इसलिए तमाम विपक्षी पार्टियां एक दूसरे से मिलकर भविष्य को निहारने के लिए गोलबंद हो रही है। यही गोलबंदी है जो कांग्रेस की पूर्व अध्यक्ष सोनिया गांधी की डिनर पार्टी के नाम पर देखने को मिलेगी।

भारतीय जनता पार्टी के विजय रथ को रोकने के लिए विपक्ष एकजुटता के लिए रणनीति बना रहा है। भोजभात के नाम पर यह गोलबंदी सबको जच गयी तो एक व्यापक संगठन बनेगा और बीजेपी को रोकने का खेल होगा। इस गोलबंदी पर बीजेपी की ख़ास नजर है। उसके दूत सभी दलों के बीच पहुँच गए हैं और सबकी इच्छा को पढ़कर अपने हाई कमान को रिपोर्ट कर रहे हैं। इस डिनर में 2019 लोकसभा चुनाव के लिए रणनीति पर विचार हो सकता है। इस डिनर में करीब 17 विपक्षी पार्टियों के नेताओं के शामिल होने की संभावना है। हालांकि, इन पार्टियों के अलावा भी कई चेहरे ऐसे हैं जिनपर सभी की नज़र है। इनमें बाबूलाल मरांडी और जीतन राम मांझी का नाम भी शामिल है। दोनों मंगलवार शाम को सोनिया के डिनर में शामिल हो सकते हैं।

कांग्रेस, सपा, बीएसपी, टीएमसी, सीपीएम, सीपीआई, डीएमके, जेएमएम, हिंदुस्तानी अवाम मोर्चा, आरजेडी, जेडीएस, केरल काँग्रेस, इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग, आरएसपी, एनसीपी, नेशनल कांफ्रेंस, एआईयूडीएफ, आरएलडी। माना जा रहा है कि कई पार्टियां इस डिनर में अपने प्रतिनिधियों को भी भेज सकती हैं। एनसीपी प्रमुख शरद पवार के शामिल होने पर लगातार संशय बरकरार है। दूसरी तरफ पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी इस डिनर में शामिल नहीं होंगी हालांकि उनकी पार्टी की तरफ से प्रतिनिधि जरूर हिस्सा लेंगे।

दरअसल, शरद पवार ने खुद विपक्षी पार्टियों के लिए डिनर आयोजित किया है इसलिए उनके शामिल होने पर संशय बरकरार है। शरद पवार ने कांग्रेस को भी अपने डिनर के लिए निमंत्रण भेजा है। शरद पवार टीआरएस को भी डिनर में शामिल होने के लिए बुलावा भेज सकती है। साफ है कि इस डिनर डिप्लोमेसी के जरिये सोनिया एक तीर से दो निशाना साधना चाहती हैं। विपक्षी नेताओं को डिनर पर बुलाकर वह ये साबित करना चाहती हैं कि मोदी के विकल्प के तौर पर बनने वाले गठजोड़ का नेतृत्व कांग्रेस के पास ही होगा। अब देखना होगा कि सोनिया की यह डिनर पॉलिटिक्स आगामी राजनीति के लिए क्या तैयारी कर पाती है। सभी दलों के विचार क्या बनते हैं। कौन सी पार्टी इस डिनर पर क्या बोलती है और उसके क्या मायने निकलते हैं, सब समझने की जरूरत है।

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