आज दशकों बाद बन रहा गजकेसरी और पंचग्राही योग का अद्भुत संयोग

भोपाल। महाशिवरात्रि (mahashivratri) पर कई दशकों बाद गजकेसरी और पंचग्राही योग का अद्भुत संयोग (Amazing combination of Panchagrahi Yoga) बन रहा है। इस विशेष संयोग में भोलेनाथ का अभिषेक करने से विशेष फल मिलेगा। यह जानकारी प्रसिद्ध ज्योतिषाचार्य डॉ. मृत्युंजय तिवारी ने सोमवार को दी।

उन्होंने बताया कि फाल्गुन मास में कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को शिवरात्रि मनाई जाती है, जो इस बार मंगलवार, एक मार्च को मनाई जाएगी। चतुर्दशी धनिष्ठा नक्षत्र और शिव योग के साथ गजकेसरी नामक दुर्लभ संयोग होने से विशेष फलदायी हैं। शिवरात्रि को निराकार रूप को साकार करके शिवलिंग के रूप में प्राकाट्य होने का दिन भी माना जाता है। शिवरात्रि के दिन भगवान शिव प्रसन्न मुद्रा में नंदी पर वास करते हैं। अत: इस दिन जलाभिषेक, रुद्राभिषेक, पूजन आदि से भगवान शिव जल्द प्रसन्न होते हैं। भक्तों की सभी प्रकार की अभिष्ट मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं।

डॉ. तिवारी के अनुसार, इस वर्ष कई दशकों बाद महाशिवरात्रि विशेष योग-संयोग लेकर आ रही है। इस बार महाशिवरात्रि धनिष्ठा नक्षत्र में कुमार योग, परिघ योग, सिद्धि योग व शिव के साथ गजकेसरी योग में मनाई जाएगी। उन्होंने बताया कि वर्षों बाद इस तरह के योग निर्मित हुए हैं। इसलिए इस शिवरात्रि पर भोलेनाथ की आराधना का महत्व कई गुणा अधिक बढ़ गया है। इस शिवरात्रि पर पूजा-अर्चना करने एवं व्रत रखने वाले भक्तों पर भोले बाबा असीम कृपा बरसाएंगे। भक्त शिवजी का गन्ने का रस, दूध, गंगाजल सहित पंचामृत से अभिषेक कर बील्व पत्र, बेर, मोगरी, गाजर, आंक-धतुरा, भांग इत्यादि अर्पित कर सुख-समृद्धि की कामना करेंगे।

ये है विशेष समय :

डॉ. तिवारी के अनुसार, सोमवार को त्रयोदशी तिथि सोमवार-मंगलवार की दरमियानी रात 3.15 बजे तक है। इसके बाद चतुर्दशी तिथि प्रारंभ होगी, जो मंगलवार रात एक बजे तक रहेगी। इसलिए महाशिवरात्रि का पर्व शिव की तिथि फाल्गुन कृष्ण चतुर्दशी धनिष्ठा नक्षत्र में कुमार योग, परिघ योग, सिद्धि योग व शिव के साथ गजकेसरी योग में मंगलवार को मनाई जाएगी। इस दिन सूर्योदय कालीन परिघ योग सुबह 11.18 बजे तक रहेगा। इसके बाद शिव योग प्रारंभ होगा। वहीं शाम 4. 31 के बाद गजकेसरी महायोग भी बन रहा है, जो महाशिवरात्रि को खास बना रहा हैं। इस योग में की गई पूजा का साधक को कई गुणा अधिक फल मिलेगा। इस दिन भोलेनाथ का अभिषेक करने से कालसर्प योग के दोष का प्रभाव कम होगा।

मान्यता है कि इस दिन भगवान शिव और माता पार्वती का विवाह हुआ था और भोलेनाथ ने वैराग्य जीवन त्याग कर गृहस्थ जीवन अपनाया था। इस दिन व्रत रखने से सौभाग्य में वृद्धि होती है। सबसे खास बात यह रहेगी कि कोरोना संक्रमण थमने से मंदिरों और शिवालयों में श्रद्धालु दर्शन-पूजन कर सकेंगे। पर्व को लेकर विशेष आयोजनों की तैयारियां भी शुरू हो गई हैं।

चार प्रहर की पूजा का समय इस प्रकार है : –

चार प्रहर की पूजा मुहूर्त : यदि शिवरात्रि को चार प्रहर में चार बार पूजा करें, तो इसका विशेष फल मिलता है। मंगलवार की रात्रि में निशिथ काल में 50 मिनट तक सर्वश्रेष्ठ शुभ समय है। निशिथ काल की पूजा रात्रि 12.14 से लेकर एक बजकर चार मिनट तक है। प्रथम प्रहर-शाम 6.24 से रात्रि 9.29 बजे तक, द्वितीय प्रहर रात्रि 9.29 से 12.35 बजे तक, तृतीय प्रहर- 12.35 से 3.37 बजे तक, चतुर्थ प्रहर -3.37 से सुबह 6.54 बजे तक है।

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