आज बेहद करीब होंगे बृहस्पति और शनि ग्रह, अंतरिक्ष में 800 साल बाद दिखेगा दुर्लभ नजारा

वॉशिंगटन: क्रिसमस से ठीक पहले दुनियाभर के अंतरिक्ष प्रेमियों के लिए आज की रात ऐतिहासिक होने जा रही है। करीब 800 साल बाद अंतरिक्ष में बृहस्‍पति-शनि ग्रह एक-दूसरे के इतने करीब आ जाएंगे कि देखकर ऐसा लगेगा कि दोनों ग्रह एक-दूसरे में समा गए हैं। बृहस्‍पति-शनि के मिलन का नजारा अपने आप में दुर्लभ है क्‍योंकि यह किसी शख्स के जीवनकाल में एक ही बार आता है। इसीलिए इसे महान संयोग (The Great Conjunction) कहा जा रहा है।

21 दिसंबर को ग्रहों के एक सीध में आने को क्रिसमस स्‍टार कहा जा रहा है। अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा के मुताबिक शाम के समय दोनों ग्रहों के पास आने को देखा जा सकेगा। यह दुर्लभ खगोलीय घटना अगले दो सप्‍ताह तक देखी जा सकेगी। दरअसल, बृहस्पति और शनि ग्रहों इस दिन इतने करीब होंगे कि ये एक ही दिखेंगे। इन दोनों के बीच सिर्फ 0.1 डिग्री की दूरी होगी। खास बात यह है कि 800 सौ साल पहले यह मौका रात के वक्त आया था और इस बार भी इसे रात को देखा जा सकेगा।

क्रिसमस पर द‍िखेगा बेथलेहम का तारा
इसे क्रिसमस स्‍टार या बेथलेहम का तारा कहा जाता है। यूं तो दोनों ग्रह 60 साल बाद फिर इतने ही करीब आएंगे लेकिन इन्हें देखा जा सकेगा या नहीं, यह बाद में पता चलेगा। Great Conjunction हर 20 साल बाद होता है लेकिन इस साल ये दोनों बेहद करीब होंगे, इसलिए यह साल खास है। किन्हीं दो ग्रहों या स्पेस ऑब्जेक्ट्स इस तरह से गुजरने को संयोग या Conjunction कहते हैं।

बृहस्‍पति और शनि ग्रह दोनों ही मध्‍यकाल के बाद अभी तक पृथ्‍वी के बेहद करीब एक साथ नहीं आए हैं। राइस यूनिवर्सिटी के खगोलविद पैट्रिक हर्टिगन ने फोर्ब्‍स पत्रिका से कहा कि बृहस्‍पति और शनि ग्रह 20 साल के बाद हमेशा एक सीधी रेखा में आते हैं लेकिन इस बार का संयोग अपने आप में दुर्लभ घटना है। ऐसा इसलिए कि ये दोनों ही ग्रह काफी करीब आ जाएंगे और इंसान इन्‍हें देख सकेंगे।

कैसे देखा जा सकेगा दुर्लभ नजारा?
हर्टिगन ने कहा कि इससे पहले 4 मार्च 1226 को यह दुर्लभ घटना हुई थी और उस समय भी आकाश में क्रिसमस का तारा नजर आया था। इस बार इनकी बेहद करीबी की वजह से इन्हें धरती के हर हिस्से से देखा जा सकेगा। 21 दिसंबर को सूरज के अस्त होने के बाद 45-60 मिनट बाद इन्हें आसमान में देखा जा सकेगा। बृहस्पति जहां एक चमकते तारे जैसा दिखेगा और शनि उससे ऊपर थोड़ा कम चमक रहा होगा लेकिन हाथ सीधा करने पर दोनों एक उंगली के अंदर आ सकेंगे। जब सूरज का चक्कर लगाते हुए बृहस्पति शनि से आगे निकल जाएगा तो दोनों की स्थिति भी बदल जाएगी।

21 दिसंबर को सबसे छोटा दिन

क्रिसमस से सिर्फ चार दिन पहले दिखने के कारण इसे इस साल ‘क्रिसमस स्टार’ कहा जा रहा है। 21 दिसंबर को ही Winter Solstice भी होगा जो उत्तरी गोलार्ध में साल का सबसे छोटा दिन और सबसे लंबी रात होती है। इसके साथ ही इस हिस्से पर सूरज की किरणें पड़ने का समय बढ़ता रहता है। फोर्ब्‍स ने कहा कि अब अगली बार ऐसा नजारा वर्ष 2080 में देखने को मिलेगा।

 

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