आज है विशेष संयोग, करें यह उपाय, दूर होगी दरिद्रता

नई दिल्ली: सोमवार को पड़ने वाली अमावस्या को सोमवती अमावस्या कहते हैं। ये वर्ष में लगभग एक अथवा दो ही बार पड़ती है। इस अमावस्या का हिन्दू धर्म में विशेष महत्त्व होता है। विवाहित स्त्रियों द्वारा इस दिन अपने पतियों के दीर्घायु कामना के लिए व्रत का विधान है। इस दिन मौन व्रत रहने से सहस्र गोदान का फल मिलता है।

शास्त्रों में इसे अश्वत्थ प्रदक्षिणा व्रत की भी संज्ञा दी गयी है। अश्वत्थ यानि पीपल वृक्ष। इस दिन विवाहित स्त्रियों द्वारा पीपल के वृक्ष की दूध, जल, पुष्प, अक्षत, चन्दन इत्यादि से पूजा और वृक्ष के चारों ओर 108 बार धागा लपेट कर परिक्रमा करने का विधान होता है। और कुछ अन्य परम्पराओं में भँवरी देने का भी विधान होता है। धान, पान और खड़ी हल्दी को मिला कर उसे विधान पूर्वक तुलसी के पेड़ को चढाया जाता है।

सोमवार को भगवान शिवजी का दिन माना जाता है। सोमवती अमावस्या तो पूर्णरूप से भगवान शिवजी को समर्पित होती है। इस दिन पवित्र नदियों में स्नान का भी विशेष महत्व समझा जाता है। कहा जाता है कि महाभारत में भीष्म ने युधिष्ठिर को इस दिन का महत्व समझाते हुए कहा था कि, इस दिन पवित्र नदियों में स्नान करने वाला मनुष्य समृद्ध, स्वस्थ्य और सभी दुखों से मुक्त होगा। ऐसा भी माना जाता है कि स्नान करने से पितरों कि आत्माओं को शांति मिलती है।

1- तुलसी परिक्रमा से दूर होती है दरिद्रता: मान्यता है कि सोमवती अमावस्या को स्नान ध्यान के बाद तुलसी की 108 परिक्रमा की जाए तो इससे दरिद्रता दूर होती है।

2- सोमवार को करें व्रत: सोमवती अमावस्या को किया गया व्रत बहुत ही फलदाई होता है।

3- सोमवती अमावस्या के दिन सूर्य नारायण को अर्घ्य देने से गरीबी दूर होगी।

4- आज के दिन भगवान शिव का जलाभिषेक और उनकी पूजा अर्चना करने से मनवांछित फल प्राप्त होते हैं।

5- उपलों की आग में गुड़ – घी का धूप करने से पितरों का आशीर्वाद प्राप्त किया जा सकता है।

नोट: अगर आपको यह खबर पसंद आई तो इसे शेयर करना न भूलें, देश-विदेश से जुड़ी ताजा अपडेट पाने के लिए कृपया The Lucknow Tribune के  Facebook  पेज को Like व Twitter पर Follow करना न भूलें... ---------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------
--------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------- ---------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------
---------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------
E-Paper