आधा सैकड़ा सीटें तय करेंगी कौन होगा मुकद्दर का सिकंदर

– अरुण पटेल

विधानसभा चुनाव में मतदान के लिए अब केवल तीन दिन ही बचे हैं और भारतीय जनता पार्टी व कांग्रेस सहित अन्य दलों ने अपनी पूरी ताकत झोंक दी है। इस बार प्रदेश का चुनावी परिदृश्य जितना उलझा हुआ है उतना इसके पूर्व कभी नहीं रहा। मतदाता मौन है उसकी थाह पाना समुद्र की गहराई नापने से भी कठिन है। जब मतदाता मौन साध लेता है तब चुनावी नतीजे अक्सर चौंकाने वाले आते हैं। इस बार भी इस संभावना को नकारा नहीं जा सकता कि चुनाव नतीजे चौंकाने वाले हो सकते हैं। येे नतीजे भाजपा और कांग्रेस में से किसे अधिक आश्‍चर्यचकित करेंगे यह तो 11 दिसम्बर को ही पता चलेगा। फिलहाल जो नजर आ रहा है उसके अनुसार 230 विधानसभा सीटों में से 90-90 सीटों पर कांग्रेस और भाजपा की मजबूत पकड़ है। 50 सीटें ऐसी हैं जहां कांटे का मुकाबला हो रहा है, क्योंकि गोंगपा, सपा, बसपा, सपाक्स और आम आदमी पार्टी सहित भाजपा-कांग्रेस के विद्रोहियों की मौजूदगी ने इन 50 सीटों पर मुकाबला कड़ा करते हुए दिलचस्प बना दिया है। इन आधा सैकड़ा सीटों में से जो भी 30 के आसपास सीट जीत लेगा वही मुकद्दर का सिकंदर होगा। आने वाले पांच सालों के लिए सत्ता सरोवर में विचरण का हकदार बन जाएगा। इस बात की कतई संभावना नहीं है कि प्रदेश में त्रिशंकु विधानसभा बनेगी। यहां का मतदाता ऐसा फैसला देगा जिससे कि भाजपा या कांग्रेस जो भी सत्ता में आए उसे कम से कम इतनी सीटें अवश्य मिलें कि वह चुनाव में किए गए वायदों और वचनों को पूरा करने में कोई हीला-हवाला न कर सके।

भाजपा में शिवराज चेहरा है तो कांग्रेस के चेहरे के रूप में कमलनाथ और ज्योतिरादित्य सिंधिया सामने हैं। शिवराज चौथी बार सत्ताशीर्ष पर आसीन हों इसमें दूसरे किरदार के रूप में अहम् भ्ाूमिका केंद्रीय मंत्री और चुनाव अभियान समिति के अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर निभा रहे हैं। शिवराज और नरेंद्र की जुगलजोड़ी भाजपा के लिए लकी और जिताऊ रही है, लेकिन इस बार एक नया आयाम यह जुड़ गया है कि इस जोड़ी के बीच बतौर प्रदेशाध्यक्ष राकेश सिंह भी साथ आ गए हैं। इसके बावजूद भी असली रणनीति तथा भाजपा के लिए और पांच साल का राजपथ बनाने का रोडमैप तैयार करने वाले असली किरदार तोमर ही हैं, क्योंकि वे केन्द्र व राज्य में मंत्री रहने के साथ ही दो बार प्रदेश भाजपा अध्यक्ष भी चुके हैं इसलिए कार्यकर्ताओं से उनका सीधा सम्पर्क है और उनकी बातों पर कार्यकर्ता भरोसा भी करते हैं। मालवा-निमाड़ अंचल में भाजपा की मजबूत पकड़ रही है लेकिन इस बार वहां की परिस्थितियां कुछ प्रतिकूल नजर आ रही हैं, इसे संभालने व कांग्रेस की सेंध से बचाने के लिए भाजपा महासचिव कैलाश विजयवर्गीय पूरा जोर लगा रहे हैं। कांग्रेस की असली समस्या यह रही है कि वह गुटों व धड़ों में बंटी रही, लेकिन इस बार वह पूरी एकजुटता के साथ चुनाव लड़ रही है। नेताओं से लेकर कार्यकर्ता तक इन चुनावों को अपने लिए अंतिम अवसर मानते हुए चुनावी समर में डटे हैं। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष कमलनाथ एवं ज्योतिरादित्य प्रदेशव्यापी दौरा कर रहे हैं तो वहीं नेता प्रतिपक्ष अजय सिंह विंध्य व बुंदेलखंड अंचल में कांग्रेस का ग्राफ बढ़ाने के लिए जी-जान से जुटे हुए हैं।

कांग्रेस किसानों की कर्जमाफी, बिजली पूरी बिल हाफ, परिवार व फसल का पांच लाख का बीमा, वृद्ध किसान को एक हजार रुपए प्रतिमाह पेंशन, किसानों को दूध, सब्जी, अनाज उत्पादन का बोनस सीधे खाते में देने को अपना सबसे बड़ा ट्रम्प कार्ड मान रही है। उसे पक्का भरोसा है कि उसका वचन-पत्र गेमचेंजर होगा और वह उसे सत्ताशीर्ष तक ले जाएगा। पड़ोसी राज्य छत्तीसगढ़ से खबरें आ रही हैं कि किसानों ने बैंकों के कर्ज पटाना और धान की फसल बेचने में देरी करना प्रारंभ कर दिया है, इसका कारण यह बताया जा रहा है कि किसान मान रहे हैं कि 11 दिसम्बर के बाद कांग्रेस की सरकार बनेगी तो हमारा कर्ज भी माफ होगा और धान की अधिक कीमत के साथ बोनस भी मिलेगा। मंडियों में धान बेचने की रफ्तार पूर्व की तुलना में मात्र 40 प्रतिशत रह गई है, यदि इसका कारण वही है जो कांग्रेस मान रही है तो फिर उसने मध्यप्रदेश में किसानों से जो वायदा किया है उसका कुछ न कुछ प्रभाव यहां भी पड़ सकता है। दूसरी ओर भाजपा को भरोसा है कि मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान ने सामाजिक सरोकारों के तहत विभिन्न वर्गों को सीधे-सीधे राहत पहुंचाने के जो फैसले किए और शून्य प्रतिशत की ब्याज पर किसानों को कर्ज देने की देश में अनूठी पहल की। भाजपा ने अपने दृष्टि-पत्र में छोटी जोत के किसानों को बिना मंडी जाए बोनस की राशि जोत के मान से सीधे उनके खाते में भेजने और भविष्य में समृद्ध मध्यप्रदेश बनाने का जो वायदा किया है। इन वादों से भाजपा को लगता है कि वह चौथी बार सरकार बनाने में कामयाब हो जाएगी। इस प्रकार कांग्रेस को अपने वचनों पर भरोसा है तो भाजपा को शिवराज की 13 सालों की उपलब्धियों की थाती और ब्रांड शिवराज पर यकीन है। अब यह तो चुनाव नतीजों से ही पता चलेगा कि कौन मतदाताओं के भरोसे पर खरा उतरता है और कौन मतदाताओं की नब्ज पहचानने में चूक कर गया।

और यह भी

पूर्व मुख्यमंत्री और प्रदेश कांग्रेस समन्वय समिति के अध्यक्ष दिग्विजय सिंह को भरोसा है कि इस बार प्रदेश में कांग्रेस की लहर चल रही है और उसकी ही सरकार बनेगी। कांग्रेस सरकार बनाने में यदि सफल रहती है तो उसके असली सूत्रधार दिग्विजय सिंह होंगे जो एक साल से अधिक समय से निरंतर रुठे कांग्रेसजनों को मनाने व सबको एक साथ बैठाकर एकजुट करने में लगभग सफल रहे हैं। छह माह तक उन्होंने पैदल नर्मदा परिक्रमा की और कांग्रेस को एकजुट करने में सात जिलों को छोड़कर प्रदेश के हर जिले में अपनी उपस्थिती दर्ज कराई। यदि कांग्रेस सरकार बनती है तो भले ही मुख्यमंत्री कोई भी बने लेकिन इसके असली शिल्पकार दिग्विजय ही होंगे, क्योंकि प्रदेश में जितने भी कांग्रेस नेता हैं उनमें सर्वाधिक मजबूत पकड़ हर अंचल में ग्राम स्तर तक दिग्विजय की ही है। जितनी बारीकी से कांग्रेस एवं प्रदेश की राजनीति को वे समझते हैं उतनी अन्य किसी नेता को जानकारी नहीं है। यदि उन्हें प्रदेश में कांग्रेस लहर चलती दिखाई दे रही है तो इसे न तो हल्के में लिया जाना चाहिए और न ही नजरअंदाज किया जाना चाहिए। पिछले तीन-चार दिनों से संघ के स्वयं सेवक भी काफी सक्रिय हो गए हैं, अब देखने वाली बात यही होगी कि वे दिग्विजय सिंह के उस जमीनी अनुभव की क्या तोड़ निकालते हैं जिन्हें कांग्रेस की सरकार बनती दिख रही है।

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